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'आईसीएआर ने असंभव को आविष्कार में बदला'

केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान भोपाल का स्थापना दिवस समारोह

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कपास हार्वेस्टिंग मशीन किसानों को समर्पित की

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Monday 16 February 2026 02:22:54 PM

agriculture minister dedicates cotton harvesting machine to farmers

भोपाल। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आईसीएआर यानी केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान भोपाल के 51वें स्थापना दिवस समारोह में कपास हार्वेस्टिंग मशीन किसानों को समर्पित की। शिवराज सिंह चौहान ने कहाकि इससे कपास हार्वेस्ट आसान हो सकेगा, अबतक कपास की तुड़ाई पूरी तरह हाथों से की जाती थी, जिसमें समय, श्रम और लागत तीनों की भारी खपत होती थी। उन्होंने कहाकि किसानों की वर्षों मांग थीकि कपास की तुड़ाई केलिए स्वदेशी और किफायती मशीन विकसित की जाए। कृषिमंत्री ने कहाकि हमारे वैज्ञानिकों ने इस मांग को साकार कर दिखाया है, लगभग 15 लाख रुपये की लागत से विकसित ये मशीन न केवल तुड़ाई की प्रक्रिया को तेज और सरल बनाएगी, बल्कि किसानों की उत्पादन लागत भी कम करेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त कियाकि इससे कपास की खेती अधिक लाभदायक बनेगी और किसानों की आय में वास्तविक वृद्धि होगी।
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आईसीएआर के वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों को बधाई दी और कहाकि सरकार का संकल्प स्पष्ट हैकि कृषि में आधुनिक तकनीक का अधिकतम उपयोगकर हम किसानों को सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाएंगे। कृषिमंत्री ने कहाकि अब खेती केवल हाथ या बैलों के सहारे नहीं चल सकती, बदलते समय में यंत्रीकरण अनिवार्य है, पिछले कुछवर्ष में इस दिशा में तेज़ प्रगति हुई है और पांच दशक में इस संस्थान ने कृषि यंत्रीकरण को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है, विशेष रूपसे छोटे किसानों केलिए उपयोगी और किफायती मशीनें विकसित कर बड़ा काम किया गया है। स्थापना दिवस पर संस्थान में नवाचारों की प्रदर्शनी भी आयोजित की गई है, यहां किसानों को प्रशिक्षण दिया जाता है, नई मशीनें विकसित की जाती हैं और फिर कृषि यंत्र निर्माताओं के माध्यम से उन्हें देशभर के किसानों तक पहुंचाया जाता है।
शिवराज सिंह चौहान ने किसानों और महिलाओं को आधुनिक और किफायती उपकरण भी वितरित किए। उन्होंने मानव चालित एक कतारी सब्जी ट्रांसप्लांटर, हस्तचालित मक्का शेलर और ऐसी दरांती वितरित की, जिसे बार-बार धार देने की जरूरत नहीं पड़ेगी, अब पत्थर से घिस-घिसकर धार बनाने की परेशानी भी नहीं उठानी पड़ेगी। उन्होंने कहाकि किसानों को उन्नत बीज वितरित किए जा रहे हैं। संस्थान प्रशिक्षण के लिए सदैव खुला रहेगा और छोटे किसानों को लगातार प्रशिक्षण दिया जाएगा। आईसीएआर की उपलब्धियों की सराहना करते हुए उन्होंने कहाकि इस संस्थान ने असंभव को आविष्कार में बदला है, यह अनुसंधान, आत्मनिर्भरता और नवाचार का त्रिवेणी संगम है, परिश्रम को परिणाम में और लागत को लाभ में बदलने का कार्य किया है, जो कृषि क्षेत्र केलिए मील का पत्थर है। कृषि मंत्री ने कहाकि बदलते फसल चक्र और चुनौतियों केबीच देश को हर प्रकार की फसल की आवश्यकता है, विशेषकर कपास उत्पादन को फिरसे मजबूती देने की जरूरत है।
कृषि मंत्री ने कहाकि एक समय भैरूंदा, देवास और खातेगांव जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर कपास होती थी, लेकिन अब वहां दूसरी फसलों ने स्थान ले लिया है, सोयाबीन भी चुनौतियों में है और उसकी जगह मक्का जैसी फसलें आ रही हैं पर हमें संतुलित फसल व्यवस्था चाहिए। केंद्रीय मंत्री ने कहाकि कपास की घटती उत्पादकता का एक बड़ा कारण पिंक बॉल वॉर्म यानी गुलाबी सुंडी है, जिसने फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने कहाकि इस चुनौती से निपटने केलिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई उन्नत किस्में विकसित कर रहा है, साथही हाई डेंसिटी प्लांटेशन यानी घने पौधे लगाने की पद्धति को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे उत्पादन बढ़ सके। उन्होंने कहाकि अबतक कपास हाथ से चुनी जाती है, जिसमें समय और खर्च अधिक लगता है, मजदूरों का जीवन भी बदले, यहभी जरूरी है, हर व्यक्ति को आगे बढ़ने और बेहतर जीवन जीने का अधिकार है। उन्होंने कहाकि किसानों और कृषि यंत्र निर्माताओं केलिए प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया गया है, जहां विभिन्न मशीनों के संचालन और निर्माण का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि तकनीक का लाभ तेजीसे किसानों तक पहुंच सके।
शिवराज सिंह ने कहाकि अब छोटी-छोटी मशीनें गांवों में आनी चाहिएं, केवल बोनी ही नहीं, बल्कि दाल जैसी फसलों की प्रोसेसिंग भी किसान खुद करें। उन्होंने कहाकि लगभग ढाई लाख रुपये की लागत वाली दाल मशीन प्रतिघंटे 200 किलो और 10 घंटे में 2000 किलो यानी लगभग 20 क्विंटल दाल तैयार कर सकती है, अरहर चना या मूंग को दाल बनाकर बाजार में बेच सकते हैं। शिवराज सिंह ने कहाकि दलहन मिशन सहित विभिन्न यंत्रीकरण योजनाओं केतहत 50 प्रतिशत तक सब्सिडी उपलब्ध है। उन्होंने कहाकि किसान समूह या सेल्फ हेल्प ग्रुप मिलकर मशीन खरीदें, जहां दाल पैदा हो रही है, वहीं प्रोसेसिंग करें, ब्रांडिंग करें और शुद्ध दाल बेचकर आय बढ़ाएं। उन्होंने कहाकि मशीनों ने जीवन को बदला है, लेकिन संतुलन आवश्यक है, तकनीक का उपयोग करें पर इंसान खुद मशीन न बन जाए, साथही प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दें और गौमाता व पशुधन कोभी खेती की व्यवस्था में सम्मानजनक स्थान दें।

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