प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एआई के लिए मानव विजन प्रस्तुत किया
ऐतिहासिक इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट का भारत मंडपम में उद्घाटनस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Thursday 19 February 2026 02:22:18 PM
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज दुनिया की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का भारत मंडपम दिल्ली में उद्घाटन किया। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर कहाकि ये समिट भारत में हो रही है, जो मानवता के छठे हिस्से को रिप्रजेंट करता है, भारत दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी का देश है, सबसे बड़े तकनीकी प्रतिभा पूल का केंद्र है और सबसे बड़े तकनीक सक्षम पारिस्थितिकी तंत्र का उदाहरण भी है। नरेंद्र मोदी ने कहाकि भारत नई टेक्नोलॉजी बनाता भी है और उसे अभूतपूर्व तेजीसे अपनाता भी है। उन्होंने नई टेक्नोलॉजी केप्रति उत्सुक 140 करोड़ भारतीयों की ओरसे मैं सभी राष्ट्र प्रमुखों, ग्लोबल एआई इकोसिस्टम के नेताओं और इनोवेटर्स का समिट में स्वागत और आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहाकि समिट का भारत में होना, भारत केसाथ ही पूरे ग्लोबल साउथ केलिए गर्व का विषय है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि सम्मेलन में एआई जगत की जानी-मानी हस्तियां एकसाथ आई हैं, सौ से अधिक देशों के प्रतिनिधि और विश्वभर के प्रतिष्ठित प्रतिभागी शामिल होने से इस आयोजन की सफलता नई ऊंचाइयों पर पहुंच गई है और इसमें युवा पीढ़ी की बढ़चढ़कर भागीदारी एक नया विश्वास पैदा करती है। प्रधानमंत्री ने कहाकि जिस तेजी और भरोसे से दुनिया की युवा पीढ़ी एआई को स्वीकार कर रही है, उसकी स्वामित्व ले रही है, उसका इस्तेमाल कर रही है, वो अभूतपूर्व है। उन्होंने कहाकि यहां एआई समिट प्रदर्शनी को लेकर भी बहुत उत्साह है, खासकर युवा प्रतिभाएं बहुत बड़ी संख्या में हैं, एग्रीकल्चर, सिक्योरिटी, दिव्यांगों की मदद, मल्टी-लिंगुवल जनसंख्या की तमाम जरूरतों से जुड़े, जोभी सॉल्यूशंस यहां प्रेजेंट किए गए हैं, वो इस फील्ड में ‘मेड इन इंडिया’ की ताकत और भारत की नवीन क्षमताओं का बहुत बड़ा उदाहरण है। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहाकि मानव इतिहास में हर कुछ शताब्दियों केबाद एक महत्वपूर्ण मोड़ आता है और वो सभ्यता की दिशा रीसेट करता है और वहीं से विकास की रफ्तार बदलती है, सोचने, समझने और काम करने के पैराडाइम्स बदलते हैं।
नरेंद्र मोदी ने कहाकि कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानव इतिहास का ऐसा ही परिवर्तन है, आज जो हम देख रहे हैं, जो भविष्यवाणी कर रहे हैं, वो इसके प्रभाव का सिर्फ प्रारंभिक संकेत है। उन्होंने कहाकि वर्तमान पीढ़ी केसाथ ही हमें इस बातकी भी चिंता करनी हैकि आनेवाली पीढ़ियों के हाथों में हम एआई का क्या स्वरूप सौंपकर जाएंगे, इसलिए आज प्रश्न यह नहींकि भविष्य में एआई क्या कर सकती है, प्रश्न यह हैकि वर्तमान में हम एआई केसाथ क्या करते हैं, ऐसे प्रश्न मानवता के सामने पहले भी आए हैं और सबसे सशक्त उदाहरण हैं-परमाणु शक्ति, हमने उसका विनाश भी देखा है और सकारात्मक योगदान भी देखा है। नरेंद्र मोदी ने कहाकि एआई भी एक बदलाव लाने वाली ताकत है, दिशाहीन हुई तो विघटन, सही दिशा मिली तो समाधान। उन्होंने कहाकि एआई को मशीनकेंद्रित से मानवकेंद्रित कैसे बनाएं, संवेदनशील और उत्तरदायी कैसे बनाएं, यही इस वैश्विक एआई शिखर सम्मेलन का मूल उद्देश्य है। प्रधानमंत्री ने कहाकि भारत एआई को किस दृष्टि से देखता है, उसका स्पष्ट प्रतिबिंब इस समिट की थीम में है-सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय! यही हमारा बेंचमार्क है, एआई केलिए इंसान सिर्फ डेटा बिंदु न बन जाए, इंसान सिर्फ कच्चा माल तक सीमित न रह जाए, इसलिए एआई को डेमोक्रेटाइज करना होगा, इसे समावेश और सशक्तिकरण का माध्यम बनाना होगा, विशेष रूपसे ग्लोबल साउथ में।
प्रधानमंत्री ने कहाकि हमें एआई को खुला आकाश भी देना है और कमांड भी अपने हाथ में रखना है, आज हम एआई को जिस दिशा में लेकर जाएंगे, वैसाही हमारा भविष्य तय होगा। उन्होंने विश्वास जतायाकि भारत का मानव विजन 21वीं सदी की एआई दुनिया में मानवकल्याण की अहम कड़ी बनेगा। नरेंद्र मोदी ने कहाकि दशकों पहले जब इंटरनेट की शुरुआत हुई तो कोई सोच भी नहीं पाता थाकि इससे कितनी जॉब्स बनेंगी, यही बात एआई में है, आज कल्पना करना मुश्किल हैकि आनेवाले समय इस फील्ड में किस तरह की नौकरियां पैदा होंगी। उन्होंने कहाकि एआई का भविष्य प्रि-डिफाइंड नहीं है, ये हमारे निर्णय, कोर्स ऑफ़ एक्शन पर निर्भर होगा। नरेंद्र मोदी ने कहाकि अगर हम मिलकर आगे बढ़ें तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पूरी मानवता की क्षमता को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी। उन्होंने कहाकि कहा जाता हैकि सूरज की रोशनी सबसे अच्छा कीटाणुनाशक है यानी पारदर्शिता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है, कुछ देश और कंपनियां मानती हैंकि एआई एक रणनीतिक परिसंपत्ति है, इसलिए इसे गोपनीय तरीके से विकसित किया जाना चाहिए, लेकिन भारत की सोच अलग है।
प्रधानमंत्री ने कहाकि हम मानते हैंकि एआई जैसी तकनीक तभी दुनिया केलिए लाभकारी होगी, जब उसे शेयर किया जाएगा, हम ये संकल्प लेंकि एआई को वैश्विक सामान्य भलाई के रूपमें विकसित किया जाएगा। नरेंद्र मोदी ने कहाकि आजकी एक बहुत बड़ी आवश्यकता वैश्विक मानक बनाने की भी है। उन्होंने कहाकि डीप फेक और फैब्रिकेटेड कॉन्टेंट, खुले समाज में अस्थिरता ला रहे हैं, भौतिक दुनिया में हम फूड पर न्यूट्रीशन लेबल्स देखते हैं, ताकि हमें पता होकि हम क्या खा रहे हैं, ठीक उसी तरह डिजिटल दुनिया में कंटेंट पर भी ऑथेन्टिसिटी लेबल्स होने चाहिएं, ताकि लोगों को पता होकि क्या असली है और क्या एआई से बनाया गया है, जैसे-जैसे एआई ज़्यादा टेक्स्ट, इमेज और वीडियो बना रहा है, वैसे-वैसे इंडस्ट्री में वाटर मार्किंग और क्लियर सोर्स स्टैंडर्ड्स की ज़रूरत बढ़ती जा रही है, इसीलिए ये जरूरी हैकि ये विश्वास टेक्नोलॉजी में शुरू से निर्मित में हो। बच्चों की सुरक्षा के महत्व पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहाकि जिस प्रकार स्कूलों का पाठ्यक्रम तैयार किया जाता है, उसी प्रकार एआई क्षेत्र भी बच्चों की सुरक्षा और परिवार के मार्गदर्शन में होना चाहिए। उन्होंने कहाकि आज दो तरह के लोग हैं, एक वो जो एआई में डर देखते हैं और दूसरे वो जो इसमें भविष्य देखते हैं। उन्होंने कहाकि प्रतिभा, ऊर्जा क्षमता और स्पष्ट नीति के बल पर भारत एआई में भविष्य और समृद्धि देखता है।
नरेंद्र मोदी ने भारतीय कंपनियों के एआई मॉडल और ऐप देखकर प्रसन्नता व्यक्त की और कहाकि ये भारतीय युवाओं की प्रतिभा को दर्शाते हैं और वैश्विक एआई परिदृश्य में भारत के समाधानों की गहराई और विविधता को प्रदर्शित करते हैं। प्रधानमंत्री ने कहाकि भारत सेमीकंडक्टर और चिप निर्माण से क्वांटम कंप्यूटिंग तक एक मजबूत इकोसिस्टम का निर्माण कर रहा है। उन्होंने कहाकि हमारे सुरक्षित डेटा सेंटर एक मजबूत आईटी आधार और एक गतिशील स्टार्टअप देश को किफायती, स्केलेबल और सुरक्षित एआई समाधानों का एक स्वाभाविक केंद्र बनाते हैं। नरेंद्र मोदी ने कहाकि भारत में विविधता, जनसांख्यिकी और लोकतंत्र मौजूद हैं, भारत में सफल होने वाला कोईभी एआई मॉडल वैश्विक स्तरपर लागू किया जा सकता है। उन्होंने 'भारत में डिजाइन और विकासकर विश्व तथा मानवता को प्रदान करने’ के आह्वान केसाथ वैश्विक समुदाय को आमंत्रित किया। उन्होंने प्रतिभागियों को शुभकामनाएं देते हुए अपना संबोधन समाप्त किया। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, संयुक्त राष्ट्र के महासचिव, कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष, मंत्रीगण, बहुपक्षीय संस्थानों के वरिष्ठ प्रतिनिधि और प्रौद्योगिकी एवं एआई दिग्गज उपस्थित थे।