राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से आईएफएस प्रशिक्षुओं ने की मुलाकात
आईएफएस अफसरों को देश की प्राकृतिक धरोहर का संरक्षक कहास्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Friday 17 July 2026 03:27:46 PM
नई दिल्ली। भारतीय वन सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों ने आज राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की। राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में प्रशिक्षु अधिकारियों को अपने प्रेरक संबोधन में राष्ट्रपति ने कहाकि वे केवल वनों के प्रशासक नहीं हैं, बल्कि भारत की प्राकृतिक धरोहर के संरक्षक भी हैं। राष्ट्रपति ने कहाकि आज उनकी भूमिका औरभी महत्वपूर्ण हो गई है, सम्पूर्ण विश्व जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता के ह्रास जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है, इनका निराकरण करने में वन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहाकि भारतीय वन सेवा के अधिकारियों का योगदान केवल भारत की पर्यावरणीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उनके योगदान से सतत विकास के वैश्विक प्रयासों को भी बल मिलेगा। उन्होंने अधिकारियों को वन क्षेत्र का विस्तार करने पर ध्यान देने की सलाह दी, क्योंकि वन ही पृथ्वी पर जीवन के आधार हैं।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहाकि वनों एवं उनके आसपास रहने वाले लोगों की वैध आकांक्षाओं केसाथ संतुलन बनाते हुए पारिस्थितिक संरक्षण को आगे बढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहाकि विकास और संरक्षण को एक-दूसरे के विरोधी लक्ष्यों के रूपमें नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह कियाकि वे ऐसे समाधान विकसित करने की दिशामें कार्य करें, जिनसे प्रकृति और स्थानीय समुदाय दोनों एकसाथ फल-फूल सकें। उन्होंने संरक्षण, वन-पुनर्स्थापन तथा सतत आजीविका से जुड़ी पहलों में जनभागीदारी को बढ़ावा देने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहाकि जनजातीय समुदायों, वनवासियों, महिलाओं, किसानों, स्थानीय संस्थाओं के विचारों और चिंताओं को समझने से अधिकारियों को बहुमूल्य दृष्टिकोण प्राप्त होगा। द्रौपदी मुर्मु ने कहाकि समाज को वनों की सुरक्षा के कार्य में भागीदार बनाने से संरक्षण के प्रयास अधिक प्रभावी एवं दीर्घस्थायी बनेंगे।
राष्ट्रपति ने कहाकि लोक सेवा का मूल उद्देश्य लोगों के जीवन को बेहतर बनाना और राष्ट्र की प्रगति में योगदान देना है। उन्होंने उल्लेख कियाकि वर्ष 2047 तक 'विकसित भारत' के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने केलिए पारिस्थितिक सुरक्षा बहुत जरूरी है। उन्होंने विश्वास व्यक्त कियाकि भारतीय वन सेवा के अधिकारियों के रूपमें वे यह सुनिश्चित करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगेकि भारत की विकास यात्रा हरित, समावेशी और सतत बनी रहे। गौरतलब हैकि भारतीय वन सेवा के दो बैच के प्रशिक्षु अधिकारी वर्तमान में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी देहरादून में अपनी प्रोफेशनल ट्रेनिंग ले रहे हैं। वर्ष 2024 बैच में 111 प्रशिक्षु अधिकारी हैं, जबकि वर्ष 2025 बैच में 131 प्रशिक्षु अधिकारी हैं, दोनों ही बैच में भूटान के दो-दो प्रशिक्षु अधिकारी भी शामिल हैं।