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जैन दर्शन की शिक्षाएं बहुत प्रासंगिक-बिरला

रायपुर में आचार्य पदारोहण एवं सहस्त्रावधान तपस्या महोत्सव

'अपने जीवन में धैर्य आत्मसंयम और नैतिक मूल्यों को अपनाएं'

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Friday 19 June 2026 12:48:29 PM

acharya installation and sahastravadhan penance festival in raipur

रायपुर। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा हैकि जैन मुनि और संत जैन दर्शन के सिद्धांतों और मूल्यों से न केवल भारत, बल्कि विश्वभर में सामाजिक परिवर्तन ला रहे हैं। ओम बिरला रायपुर में ‘आचार्य पदारोहण एवं सहस्त्रावधान तपस्या महोत्सव’ में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। वे परमपूज्य पंन्यास प्रवर विनय कुशल मुनि महाराज के आचार्य पदारोहण के भी साक्षी बने। ओम बिरला ने वर्तमान समय की चुनौतियों का समाधान करने में जैन दर्शन की शिक्षाओं को बहुत प्रासंगिक बताया। उन्होंने कहाकि जैन धर्म ने सदैव अहिंसा, करुणा, अपरिग्रह, आत्मविजय और अनेकांतवाद का संदेश देकर मानवता को शांति एवं सह अस्तित्व का मार्ग दिखाया है, ऐसे आध्यात्मिक आयोजन हमें स्मरण कराते हैंकि किसी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति केवल उसकी आर्थिक समृद्धि में नहीं, बल्कि उसके नागरिकों के नैतिक चरित्र, आध्यात्मिक चेतना और संस्कारों में निहित होती है।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने जैन दर्शन के मूल सिद्धांतों पर प्रकाश डालते हुए कहाकि सच्ची खुशी केवल भौतिक संपदा से प्राप्त नहीं की जा सकती, बल्कि आत्मसंयम, अपने मन पर नियंत्रण, विचारों की पवित्रता और नैतिक मूल्यों के पालन से ही स्थायी संतुष्टि प्राप्त होती है। उन्होंने कहाकि अहिंसा, करुणा और संयम संबंधी भगवान महावीर की शिक्षाएं आज पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहाकि सभी जीवों केप्रति अहिंसा, करुणा और दया का व्यवहार करके ही विश्व में शांति स्थापितकी जा सकती है। उन्होंने जैन संतों की प्रशंसा करते हुए कहाकि उन संतों ने सत्य, सहानुभूति और आध्यात्मिक जागरुकता जैसे मूल्यों आधारित नैतिक समाज के निर्माण केलिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। जैन संतों के आत्मसंयम को नमन करते हुए ओम बिरला ने उन संतों के प्रेरक उदाहरण पर प्रकाश डाला जो अपने अंतर्मन को दृढ़ बनाने और समाज का मार्गदर्शन करने केलिए दीर्घ उपवास एवं कठोर आध्यात्मिक साधना करते हैं। गहन आध्यात्मिक अनुशासन से एक युवा बाल मुनि से सिद्धि प्राप्त करने की उल्लेखनीय उपलब्धि का उल्लेख करते हुए ओम बिरला ने कहाकि यह इस बात को दर्शाती हैंकि कम आयु में भी एकाग्रता, ज्ञान और तपस्या से अपने जीवन को पूरी तरह से बदला जा सकता है।
ओम बिरला ने कहाकि जैन आचार्यों और संतों का जीवन अनुशासन, त्याग और नि:स्वार्थ सेवा का जीवंत उदाहरण है, उनका आचरण लोगों को अपने जीवन में धैर्य, आत्मसंयम और नैतिक मूल्यों को अपनाने केलिए प्रेरित करता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त कियाकि संतों और मुनियों का मार्गदर्शन भावी पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा और आध्यात्मिक विकास तथा नैतिक उत्कृष्टता केप्रति समाज की प्रतिबद्धता को मजबूत करेगा। ओम बिरला ने लोगों से सत्य, नैतिकता, आत्म अनुशासन और करुणा के मूल्यों को अपनाने का आह्वान करते हुए कहाकि इन्हीं मूल्यों के आधार पर मजबूत और अधिक सौहार्दपूर्ण समाज का निर्माण हो सकता है। उन्होंने दोहरायाकि जैन संतों की शिक्षाएं और भगवान महावीर का दर्शन शांतिपूर्ण, नैतिक और प्रबुद्ध समाज के निर्माण केलिए प्रेरणास्रोत बनी हुई हैं। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह, केंद्रीय मंत्री तोखन साहू, सांसद बृजमोहन अग्रवाल और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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