मांझी और चालकी सामाजिक जीवन व सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षक
'बस्तर पंडुम गौरवशाली परंपराओं एवं सांस्कृतिक अस्मिता का उत्सव'स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Friday 31 July 2026 02:10:38 PM
नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग से राष्ट्रपति भवन आए एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल में बस्तर पंडुम 2026 के विजेता, बस्तर के परगना मांझी, चालकी और समाज प्रमुख शामिल थे। राष्ट्रपति ने बस्तर के लोगों को राष्ट्रीय स्तरपर पहचान और प्रोत्साहित करने केलिए गृहमंत्री अमित शाह, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उनकी टीम की सराहना की। राष्ट्रपति ने कहाकि इस वर्ष फरवरी में बस्तर पंडुम का शुभारंभ करने का अवसर उन्हें प्राप्त हुआ था, जो छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय परंपराओं, लोककलाओं और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उत्सव है। इस अवसर पर जनजातीय नृत्य, गीत संगीत, शिल्पकला, चित्रकला, जनजातीय साहित्य जैसी विभिन्न विधाओं को देखकर वे अत्यंत प्रभावित हुई थीं।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहाकि ‘पंडुम’ शब्द का प्रयोग बस्तर की जनजातीय बोलियों में उत्सव, पर्व और सामूहिक आनंद के अर्थ में किया जाता है। उन्होंने कहाकि बस्तर पंडुम केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि बस्तर की गौरवशाली परंपराओं और सांस्कृतिक अस्मिता का उत्सव है, इसका उद्देश्य बस्तर की वास्तविक पहचान को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करना है। उन्होंने कहाकि बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों ने युवाओं को अपनी परंपराओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक विरासत से पुनः जोड़ने का अनुकरणीय कार्य किया है, ऐसे कार्यक्रम पर्यटन को भी बढ़ावा देते हैं और रोज़गार के अवसर भी उत्पन्न करते हैं। द्रौपदी मुर्मु ने सामाजिक जीवन और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण में मांझी और चालकी की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहाकि वे समुदाय और प्रशासन केबीच एक प्रभावी सेतु के रूपमें कार्य करते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त कियाकि वे अपने समर्पण और नेतृत्व से समाज में सुख-शांति और समृद्धि केलिए कार्य करते रहेंगे।
राष्ट्रपति को यह जानकर प्रसन्नता हुईकि सरकार के प्रयासों और बस्तर के लोगों की सक्रिय भागीदारी से आज बस्तर क्षेत्र विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहाकि लोग हिंसा के वातावरण से निकलकर शिक्षा, रोज़गार और विकास के अवसरों से जुड़ रहे हैं। उन्होंने कहाकि यह परिवर्तन बस्तर के उज्ज्वल भविष्य का शुभ संकेत है, दूर-दराज के गांवों तक सड़क, बिजली और पेयजल जैसी सुविधाएं पहुंच रही हैं, लंबे समय तक बंद रहे विद्यालयों में फिरसे बच्चों की चहल-पहल दिखाई दे रही है और शिक्षा का प्रकाश घर-घर तक पहुंच रहा है। द्रौपदी मुर्मु ने कहाकि बस्तर में आशा, विश्वास और प्रगति का एक नया वातावरण निर्मित हो रहा है, यह परिवर्तन देश केलिए प्रसन्नता और गर्व का विषय है। राष्ट्रपति ने कहाकि जनजातीय युवा शिक्षा, विज्ञान, कला और खेलकूद के क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। राष्ट्रपति ने कहाकि जनजातीय समुदाय के लोगों में खेल और कला की नैसर्गिक प्रतिभा होती है तथा उन्हें यह जानकर खुशी हुईकि हालही में छत्तीसगढ़ में बस्तर ओलंपिक खेलों का आयोजन किया गया था।
राष्ट्रपति ने विश्वास जतायाकि जनजातीय समुदाय के लोग अपनी सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखते हुए विकास यात्रा में भागीदारी करेंगे और राष्ट्र निर्माण में योगदान देंगे। उन्होंने कहाकि सहयोग और सद्भाव की संस्कृति को सुदृढ़ करना हम सबका कर्तव्य है। उन्होंने महिलाओं, बच्चों, समाज के वंचित वर्गों और वरिष्ठ नागरिकों के सशक्तीकरण केलिए कार्य करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने लोगों से जल, पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाने का आग्रह किया। इस अवसर पर गृहमंत्री अमित शाह, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा भी उपस्थित थे।