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कोलकाता में शब्द संग्रहालय का उद्घाटन

'युवा अपने व्यक्तित्व को गढ़ने में पुस्तकालय का उपयोग करें'

बंगाल भारतीय चेतना का प्रकाशमय प्रकाश स्तंभ बनेगा-गृहमंत्री

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Monday 20 July 2026 03:50:43 PM

inauguration of a word museum in kolkata

कोलकाता। गृहमंत्री अमित शाह ने देशभर की भाषाओं और संस्कृति केलिए एक बड़ा दिन बताते हुए कोलकाता में ‘म्यूजियम ऑफ़ वर्ड’ के पहले फेज का उद्घाटन किया। अमित शाह ने कहाकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देश के सांस्कृतिक पुनरुत्थान के संकल्प को यह शब्द संग्रहालय साकार कर रहा है। उन्होंने कहाकि किसीभी देश या प्रदेश की संस्कृति की अभिव्यक्ति भाषा के बिना संभव नहीं हो सकती और भाव से उत्पन्न शब्दों के बिना भाषा बन ही नहीं सकती। उन्होंने कहाकि जबतक हमारी आनेवाली पीढ़ियां यह नहीं जानेंगी कि भाषा शब्दों से बनती है, शब्द भाव से उत्पन्न होते हैं, भाषा से संस्कृति बनती है और संस्कृति की अभिव्यक्ति होती है, तबतक इस देश का सांस्कृतिक पुनरुत्थान नहीं हो सकता। अमित शाह ने विश्वास जतायाकि यह शब्द संग्रहालय देश की भाषाओं, संस्कृति और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की यात्रा को आनेवाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बनेगा। गृहमंत्री ने कहाकि शब्द संग्रहालय में पाणिनि के व्याकरण की रचना के पूरे चरित्र को बहुत अच्छे ढंग से दर्शाया गया है।
गृहमंत्री अमित शाह ने कहाकि शब्द संग्रहालय को डिजिटल और एआई तक विस्तारितकर भारतीय भाषाओं को भविष्य की तकनीकों के अनुरूप विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहाकि हमने कभी नवाचार से परहेज नहीं किया, इसीलिए अनेक आघातों के बावजूद हमारी सांस्कृतिक यात्रा हिमालय की तरह अटल खड़ी है। उन्होंने कहाकि शब्द संग्रहालय भारत की बहुभाषी चेतना, ज्ञान परंपरा और जनस्मृति को दृश्य, श्रव्य और अनुभवात्मक रूपमें संरक्षित करने का अभिनव प्रयास है। अमित शाह ने कहाकि बंगाल में अनेक प्रकार के संग्रहालय हैं और उन्हें विश्वास हैकि शब्द संग्रहालय बहुत कम समय के अंदर अपना स्थान मजबूत बना लेगा, यहां आनेवाले शब्द के साधक निश्चित रूपसे कुछ न कुछ प्राप्तकर जाएंगे। उन्होंने कहाकि शब्द और शब्द विज्ञान का परिचय आनेवाली पीढ़ी को कराना बहुत कठिन काम था, मगर संस्कृति मंत्रालय ने यह कर दिखाया हैकि शब्दों को कोई बांध नहीं सकता, मगर शब्द के विज्ञान को इस संग्रहालय ने बांध दिया है। शब्द को सुना जा सकता है, बोला जा सकता है, जिया जा सकता है और अगली पीढ़ी को दिया भी जा सकता है। यह अगली पीढ़ी को देने का काम शब्द संग्रहालय करेगा। उन्होंने कहाकि संस्कृति मंत्रालय ने शब्द संग्रहालय के जरिए अदृश्य विरासत को दृश्य, श्रव्य, स्पर्शनीय और अनुभवात्मक बनाने का काम किया है।
अमित शाह ने कहाकि जब कहा जाता हैकि विश्व में सबसे पहला शब्द कौन सा बोला गया होगा और जब ओंकार सामने आता है तो हमें भी लगता हैकि ओंकार ही विश्व का सबसे पहला शब्द होगा। उन्होंने कहाकि मां की लोरियां जब हम अपनी भाषा में सुनते हैं तो वो हमें अपनी मां की याद दिला देती हैं। अमित शाह ने कहाकि संग्रहालय में कई प्रकार की कलाकृतियां और पांडुलिपियां हैं, वो स्पर्शनीय और अनुभवात्मक हैं। उन्होंने कहाकि संग्रहालय में देश की कई बोलियों, भाषाओं और हर प्रांत की लोक संस्कृति को संजोकर शब्दों से वर्णन किया गया है, कई शिलालेख, ताम्रपत्र, भोजपत्र, पांडुलिपि हैं और कई मुद्रित पुस्तकें भी हैं। उन्होंने कहाकि हमें डिजिटल टेक्स्ट ध्वनि अभिलेख केबाद अब एआई तककी यात्रा पूरी करनी है, शब्द संग्रहालय की हर गैलरी बहुत वैज्ञानिक तरीके से सृजित की गई है। ओरिएंटेशन स्पेस में भाषा की उत्पत्ति से शुरुआत की गई है, मिथकों, लोरियों, संवेदनात्मक अनुभवों से भाषा के विकास को समझाने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहाकि मातृभाषा केप्रति हर व्यक्ति का लगाव होता है, मातृभाषा केप्रति लगाव को हमें अपने चरित्र का हिस्सा बनाना चाहिए। गृहमंत्री ने कहाकि भाषा विज्ञान सहजता से विकसित हुआ विज्ञान है, भाषा वैज्ञानिक जरूर है, मगर वो जरूरत के आधार पर विकसित हुई है, बहुत सहजता से भाषाएं विकसित गई हैं, इसीलिए समाज में स्वीकृत हैं।
अमित शाह ने कहाकि हमारे देश की हर भाषा को जीवित रखने केलिए कई महापुरुषों, कवियों और लेखकों ने अनुकरणीय योगदान दिया है, उनके प्रति सम्मान प्रकट करने केलिए संग्रहालय में गैलरी बनाई गई है। गृहमंत्री ने कहाकि भारत का भविष्य इस बातपर निर्भर नहीं करताकि इस देश की कॉलेज यूनिवर्सिटी में कितनी भीड़ है, बल्कि देश का भविष्य इस बातपर निर्भर करता हैकि देश की लाइब्रेरी में कितने युवा और किशोर जाते हैं। उन्होंने युवाओं से अपील कीकि वे अपने व्यक्तित्व को गढ़ने में पुस्तकालय का उपयोग करें। गृहमंत्री ने कहाकि बंगाल समग्र भारतीय चेतना का वैश्विक प्रकाश स्तंभ रहा है, एक लंबा कालखंड आया, जब हमारी भारतीय सांस्कृतिक चेतना को बंगाल से विमुक्त करने का प्रयास किया गया, संकुचित और विदेशी विचारधाराओं ने बंगाल की देश दुनिया में योगदान करने की क्षमता को क्षीण कर दिया। उन्होंने कहाकि बंगाल में महर्षि अरविंद, स्वामी विवेकानंद और रामकृष्ण परमहंस जन्मे थे और यहीं चैतन्य महाप्रभु हुए, बंगाल ने वैज्ञानिक, साहित्यकार, सबसे बड़े क्रांतिकारी सुभाष चंद्रबोस देने का अनुपम कार्य किया। उन्होंने विश्वास जतायाकि भारतीय चेतना का बौद्धिक प्रकाश स्तंभ एकबार फिर अपनी पूरी शक्ति केसाथ पूरे विश्व की चेतना को जगाने का काम करेगा। उन्होंने कहाकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में बंगाल में विकासात्मक परिवर्तन के कारण उन्हें विश्वास हैकि बंगाल देखते-देखते भारतीय चेतना का प्रकाशमय प्रकाश स्तंभ बन जाएगा।
अमित शाह ने कहाकि महर्षि अरविंद को पढ़े बिना भारत को समझ नहीं सकते, उन्होंने भारत के भूतकाल और वर्तमान को लिखा और भविष्य को भी चिन्हितकर नई पीढ़ी के सामने रखा, उनकी ही वाणी हैकि एक दिन भारत माता निश्चित रूपसे विश्वगुरु के स्थान पर पुनः प्रतिष्ठापित होगी और पूरे विश्व को अपना सर्वश्रेष्ठ देने का प्रयास करेगी। अमित शाह ने युवाओं से कहाकि वे शब्द और भाषा को समझें, उच्चारणों को शुद्ध करें और व्याकरण को आत्मसातकर अपनी अभिव्यक्ति को प्रभावशाली बनाएं, यह समाज में उनकी स्वीकृति अनेक गुना बढ़ा देगी। गृहमंत्री ने कहाकि देश वंदे मातरम का 150वां वर्ष मना रहा है, मंच पर खड़े रहकर जब वंदे मातरम का पूरा गान सुनते हैं, तब हमें मालूम पड़ता हैकि भारत माता केप्रति हमारा भाव क्या होना चाहिए। उन्होंने कहाकि इतने बड़े बोध से आजादी के 76-77 साल तक देश अनजान रह गया, हर्ष का विषय हैकि अब हर स्कूल में वंदे मातरम पूरा गाया जाता है। अमित शाह ने कहाकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2024 में बांग्ला को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया था और बंगाल फिरसे ‘सोनार बांग्ला’ बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। गृहमंत्री ने कहाकि मनुष्य समझता हैकि भाषा को उसने बनाया है, लेकिन वह मानते हैंकि भाषा ने मनुष्य को बनाया है, भाषा का मूल शब्द और अपनी भाषा के शब्द हैं, शब्द संग्रहालय इन्हें आगे बढ़ाएगा।
गृहमंत्री अमित शाह ने भाषा के पांच सूत्र बताए, इनमें-परिवार की भाषा ही पहली पाठशाला बने, मां की भाषा में ही बच्चे की पढ़ाई हो, विद्यालय और विश्वविद्यालय मौलिक चिंतन का केंद्र बनें। उन्होंने कहाकि मौलिक चिंतन की शुरुआत विश्वविद्यालयों को करनी चाहिए, हर भारतीय भाषा को डिजिटल और एआई सक्षम बनाकर उन्हें 1000 साल की अतिरिक्त आयु देने का प्रयास होना चाहिए। उन्होंने कहाकि पुस्तकालय और संग्रहालय सिर्फ भवन में सीमित न हों, उनके अंदर की भावनाएं युवाओं और किशोरों तक पहुंचे, इसके लिए अभियान चलाएं। उन्होंने कहाकि हर युवा अपनी मातृभाषा केसाथ एक अन्य भारतीय भाषा अवश्य सीखे, इससे हम न सिर्फ अपनी मातृभाषा, बल्कि भारत की सभी भाषाओं को लंबी आयु देने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। अमित शाह ने कहाकि भारतीय संस्कृति का प्रकाश स्तंभ मानी जानेवाली बंगाल की धरती से हम संकल्प लेते हैंकि हम शब्द से संस्कृति को ताकत देंगे, संस्कृति से आत्मविश्वास जगाएंगे और आत्मविश्वास से 2047 में ‘विकसित भारत’ बनाकर भारत माता को विश्वगुरु बनाने का अपना स्वप्न पूरा करेंगे। इस अवसर पर वित्तमंत्री स्वप्न दासगुप्ता, केंद्रीय गृह सचिव, केंद्रीय संस्कृति सचिव और आसूचना ब्यूरो के निदेशक और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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