नई दिल्ली में भारत-रवांडा संयुक्त व्यापार समिति का सत्र आयोजित
खनिज, स्वास्थ्य और डिजिटल प्रौद्योगिकी सहयोग क्षेत्रों की पहचानस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Saturday 1 August 2026 02:53:05 PM
नई दिल्ली। भारत के मध्य-पूर्व अफ़्रीकी देशों केसाथ बढ़ते द्विपक्षीय संबंधों खासतौर पर व्यापारिक क्षेत्र में भारत-रवांडा संयुक्त व्यापार समिति (जेटीसी) का पहला सत्र 30 और 31 जुलाई को नई दिल्ली में हुआ। सत्र में दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय व्यापार में विविधता लाने, व्यापारिक संबंधों को और सुगम बनाने एवं बाजार पहुंच संबंधी मुद्दों को हल करने केलिए मिलकर प्रयास करने पर सहमति व्यक्त की। भारत के वाणिज्य विभाग में संयुक्त सचिव अमित कुमार ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया, जबकि रवांडा प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व रवांडा गणराज्य के विदेश मामलों और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग मंत्रालय के एशिया, प्रशांत और मध्य पूर्व मामलों के महानिदेशक वर्जिल रवान्यागाटारे ने किया। सत्र में द्विपक्षीय व्यापार की समीक्षा करने, व्यापार में विविधता लाने, दोनों देशों केबीच निवेश बढ़ाने और रसद संबंधी बाधाओं को दूर करने के एक स्थायी, संरचित और आवधिक शीर्ष तंत्र की स्थापना पर चर्चा हुई।
भारत से रवांडा को निर्यात की जानेवाली प्रमुख वस्तुओं में औषधि निर्माण और जैविक उत्पाद, दोपहिया और तिपहिया वाहन, औद्योगिक और विद्युत मशीनरी, तेल खली और लोहा एवं इस्पात उत्पाद शामिल हैं, जबकि रवांडा से भारत को निर्यात की जानेवाली वस्तुओं में सीसा, मसाले, आवश्यक तेल, तांबा, बहुमूल्य और अर्ध बहुमूल्य पत्थर, प्रसंस्कृत कृषि उत्पाद और खनिज प्रमुख हैं। भारत ने भारी इंजीनियरिंग सामान, फार्मास्यूटिकल्स और चिकित्सा उपकरण, परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पाद, वस्त्र, समुद्री उत्पाद, प्लास्टिक, खेल सामग्री और खिलौने, रत्न और आभूषण, वैज्ञानिक उपकरणों के निर्यात में विस्तार की संभावनाओं के बारेमें बताया। भारत रवांडा के फार्मास्यूटिकल आयात का सबसे बड़ा स्रोत है, यह देश के फार्मास्यूटिकल आयात का लगभग 24.5 प्रतिशत है। रवांडा ने मिर्च, मैकाडामिया, फ्रेंच बीन्स, एवोकाडो, आवश्यक तेल, चाय, कॉफी, बागवानी उत्पाद, खनिज और कीमती पत्थरों को भारत को प्राथमिकता के आधार पर निर्यात करने योग्य वस्तुओं के रूपमें पहचाना।
भारत और रवांडा ने मानकों के सामंजस्य पर सहयोग पर भी चर्चा की, जिसमें भारतीय मानक ब्यूरो और रवांडा मानक बोर्ड केबीच क्षमता विकास शामिल है। रवांडा ने बतायाकि 2025 तक भारत उसका दूसरा सबसे बड़ा विदेशी निवेशक है और उसने खनन, कृषि प्रसंस्करण, किफायती आवास, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, विनिर्माण, स्वास्थ्य सेवा, पर्यटन और वित्तीय सेवाओं में अवसरों का उल्लेख किया। दोनों पक्षों ने जेटीसी ढांचे केतहत इन्वेस्ट इंडिया और रवांडा विकास बोर्ड को निवेश केंद्र के रूपमें नामित किया और व्यापार मेलों, व्यापार मंचों और क्रेता-विक्रेता बैठकों के कैलेंडर का आदान प्रदान किया। रवांडा ने पूर्वी अफ्रीकी समुदाय, पूर्वी और दक्षिणी अफ्रीका के साझा बाजार और अफ्रीकी महाद्वीपीय मुक्त व्यापार क्षेत्र के प्रवेश द्वार के रूपमें अपनी रणनीतिक स्थिति के बारेमें बताया और भारतीय व्यवसायों को एक व्यापक क्षेत्रीय बाजार तक पहुंच प्रदान करने का प्रस्ताव दिया।
भारत और रवांडा ने क्षेत्रीय सहयोग केलिए कई प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान की, भारत ने महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्रमें रवांडा के टिन, टंगस्टन और टैंटलम संसाधनों में सहयोग को मजबूत करने में रुचि व्यक्त की। इसमें भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण और रवांडा खान, पेट्रोलियम और गैस बोर्ड केबीच संस्थागत सहयोग शामिल है। फार्मास्यूटिकल्स और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्रमें दोनों देशों केबीच समझौता ज्ञापन हस्ताक्षर केलिए अंतिम रूप देने के चरण में है। भारत ने भारतीय औषध संहिता को मान्यता देने और पारंपरिक चिकित्सा में सहयोग बढ़ाने का भी प्रस्ताव रखा। चर्चा में कृषि और कृषि-प्रसंस्करण में सहयोग के विषय-एवोकाडो, वस्त्र और चमड़ा, हरित गतिशीलता, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, फिनटेक और साइबर सुरक्षा और नवीकरणीय ऊर्जा केलिए बाजार पहुंच थे।
भारत ने भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग कार्यक्रम, 'स्टडी इन इंडिया' पहल और 'स्किल इंडिया मिशन' से क्षमता विकास में निरंतर सहायता प्रदान करने का प्रस्ताव रखा। प्रस्ताव में रवांडा के तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण तंत्र को मजबूत करने केलिए सहयोग भी शामिल है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने द्विपक्षीय वाणिज्यिक साझेदारी को बढ़ावा देने केलिए दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों को बधाई दी और सहमति के कार्यवृत्त में दर्ज परिणामों की गहन निगरानी और समयबद्ध कार्यांवयन की आवश्यकता पर बल दिया। दोनों पक्ष एकवर्ष बाद रवांडा में भारत-रवांडा संयुक्त व्यापार समिति का दूसरा सत्र आयोजित करने पर सहमत हुए।