भारत के राष्ट्रपति भवन का औपनिवेशिक प्रभाव से मुक्ति का सफर शुरू
'राजाजी उत्सव' में सी राजगोपालाचारी की प्रतिमा का अनावरण कियास्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Monday 23 February 2026 04:10:48 PM
नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने आज संयुक्त रूपसे राष्ट्रपति भवन में 'राजाजी उत्सव' में एडविन लुटियंस की प्रतिमा के स्थान पर सी राजगोपालाचारी की प्रतिमा का अनावरण किया। उन्होंने इस अवसर पर कहाकि राजाजी की प्रतिमा का अनावरण औपनिवेशिक प्रभाव के अवशेषों को मिटाने की दिशामें एक और महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहाकि भारत का औपनिवेशिक प्रभाव से मुक्ति का सफर कोई एक घटना नहीं है, बल्कि शासन, कानून, शिक्षा, संस्कृति और राष्ट्रीय पहचान के क्षेत्रमें एक सतत बदलाव है। उन्होंने कहाकि इन सुधारों के केंद्र में लगातार उस औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति की बात कही गई है, जिसने ब्रिटिश शासन के दौरान संस्थानों और मनोभावों को आकार दिया था।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और उपराष्ट्रपति ने कहाकि गुलामी की मानसिकता से मुक्ति की परिकल्पना को कई पहलों से साकार किया जा रहा है, जिनमें राजभवनों का लोकभवनों में परिवर्तन, प्रधानमंत्री कार्यालय का सेवा तीर्थ में परिवर्तन, केंद्रीय सचिवालय का नाम बदलकर कर्तव्य भवन करना, औपनिवेशिककाल के आपराधिक कानूनों को निरस्त करना, इंडिया गेट केपास नेताजी सुभाषचंद्र बोस की प्रतिमा स्थापित करना और राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का निर्माण करना आदि शामिल हैं। उन्होंने कहाकि ये बदलाव महज प्रतीकात्मक नहीं हैं, ये सरकार की सेवा भावना के नजरिए को दर्शाते हैं। उन्होंने राष्ट्रपति भवन में शुरू की गईं पहलों में-उद्यानों को अमृत उद्यान के रूपमें खोलना, दरबार हॉल का नाम बदलकर गणतंत्र मंडप रखना, ब्रिटिश सहायक अधिकारियों की तस्वीरों की जगह परमवीर चक्र वीरों की तस्वीरें लगाना, भारतीय शास्त्रीय भाषाओं केलिए समर्पित पुस्तकालय और भंडार ग्रन्थ कुटीर का उद्घाटन करना शामिल है। उन्होंने विश्वास व्यक्त कियाकि ऐसे कदम जनमानस से औपनिवेशिक छाप मिटाने और भारत के सभ्यतागत आत्मविश्वास को मजबूत करने में सहायक होंगे।
राजाजी उत्सव को भारत के एक महान सपूत को उचित सम्मान बताते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और उपराष्ट्रपति ने कहाकि सी राजगोपालाचारी ने राष्ट्र के इतिहास में एक विशिष्ट स्थान अर्जित किया है। एक वकील, स्वतंत्रता सेनानी, राजनीतिज्ञ और लेखक के रूपमें राजाजी की बहुमुखी प्रतिभा को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहाकि वे असाधारण प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने कहाकि राजाजी ने निरंतर आर्थिक स्वतंत्रता की वकालत की और उनका मानना थाकि भारत की आर्थिक नीति स्वतंत्र और उदार होनी चाहिए। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और उपराष्ट्रपति ने संबोधन का समापन करते हुए आशा व्यक्त कीकि राजाजी का जीवन नागरिकों को प्रेरित करता रहेगाकि वे अधिक जिम्मेदारियां ग्रहण करते समय अपने चरित्र को ऊंचा उठाएं, अपनी भूमिकाओं के विस्तार केसाथ अपने विश्वासों को मजबूत करें और हमेशा राष्ट्र को स्वार्थ से ऊपर रखें।