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जगद्गुरु कृपालु विवि कटक में शैक्षिक सत्र शुरू

'छात्र आधुनिक ज्ञान केसाथ नैतिक मूल्यों केप्रति भी आस्थावान हों'

राष्‍ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का शिक्षार्थियों व शिक्षण संस्थानों से आह्वान

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Tuesday 4 August 2026 03:23:59 PM

academic session begins at jagadguru kripalu university cuttack

कटक। राष्‍ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कटक में जगद्गुरु कृपालु विश्वविद्यालय का उद्घाटन और प्रथम शिक्षण सत्र का शुभारंभ किया। राष्ट्रपति ने कार्यक्रम में कहाकि शिक्षा केवल ज्ञान एवं रोज़गार अर्जित करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्र के समृद्ध भविष्य की आधारशिला है। उन्होंने कहाकि ओडिशा ज्ञान, संस्कृति, आध्यात्मिकता और सेवा की समृद्ध परंपरा की धरती है, महाप्रभु श्रीजगन्नाथ की पावन भूमि ने सदियों से समावेश, करुणा और मानव कल्याण का संदेश दिया है। उन्होंने जिक्र कियाकि कटक का यह क्षेत्र भी ‘उत्कल गौरव’ मधुसूदन दास, ‘कर्मवीर’ गौरीशंकर राय, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और बीजू पटनायक जैसे महान विभूतियों की जन्मभूमि है। यह उत्कलमणि पंडित गोपबंधु दास और उत्कल केसरी डॉ हरेकृष्ण महताब की कर्मभूमि भी है।
राष्‍ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहाकि जनसेवा, साहित्य और संस्कृति के क्षेत्रमें कटक का योगदान अत्यंत प्रेरणादायी है, ऐसे में इस विश्वविद्यालय से अपेक्षा की जाती हैकि यह संस्थान भारत की प्राचीन सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक परंपरा को आधुनिक शिक्षा केसाथ जोड़ते हुए समाज और राष्ट्र की सेवा का एक सशक्त माध्यम बने। द्रौपदी मुर्मु ने कहाकि भारत विश्व की सबसे युवा आबादी वाले देशों में से एक है, यह हमारी सबसे बड़ी पूंजी है, इसका समुचित उपयोग करने केलिए विश्वविद्यालय ऐसे वातावरण का निर्माण करें, जहां युवा अपनी प्रतिभा का पूर्ण विकास कर सकें और अपने सपनों एवं आकांक्षाओं को साकार कर सकें। राष्ट्रपति ने कहाकि शिक्षण संस्थानों को मूल्यपरक शिक्षा प्रदान करनी है, उनपर ऐसे नागरिक तैयार करने की जिम्मेदारी है, जो सत्यनिष्ठा, अनुशासन, संवेदनशीलता और राष्ट्रहित की भावना से ओतप्रोत हों। उन्‍होंने कहाकि युवाओं का ज्ञान तभी सार्थक है, जब वह मानवसेवा, समाज कल्याण और राष्ट्र की उन्नति का माध्यम बने।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहाकि हमने वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य रखा है, इसकी प्राप्ति में हमारे उच्च शिक्षण संस्थानों की अहम भूमिका है। राष्‍ट्रपति ने विश्‍वविद्यालयों का आह्वान कियाकि उन्हें ऐसे ज्ञान केंद्रों के रूपमें कार्य करना है, जहां पर विकसित विचार और प्रौद्योगिकी समाज की आवश्यकताओं का समाधान करें। उन्होंने कहाकि छात्र आधुनिक ज्ञान को अपनाने केसाथ नैतिक मूल्यों केप्रति भी आस्थावान हों। राष्ट्रपति को यह जानकर प्रसन्‍नता हुईकि जगद्गुरु कृपालु विश्वविद्यालय में शोध, नवाचार व उद्यमिता को बढ़ावा दिए जाने केसाथ विद्यार्थियों के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विकास पर भी बल दिया जाएगा। उन्होंने विश्‍वास व्‍यक्‍त कियाकि यह विश्वविद्यालय कौशल प्राप्‍त मानवशक्ति, शोधवेत्‍ताओं और उद्यमियों को तैयार करेगा, जो ‘विकसित ओडिशा’ और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की प्राप्ति में अपना योगदान देंगे। इस अवसर पर ओडिशा के राज्यपाल डॉ हरिबाबू कंभमपति और मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी भी उपस्थित थे।

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