राष्ट्रपति ने स्व रोजगार से सशस्त्र बलों तक शानदार योगदान को सराहा
दिल्ली में महिला विचारकों के सम्मेलन में महिला सशक्तिकरण के चर्चेस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Monday 9 March 2026 02:52:29 PM
नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर राष्ट्र सेविका समिति शरण्या और भारतीय विद्वत परिषद के संयुक्त रूपसे नई दिल्ली में हुए महिला विचारकों के राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित किया। सम्मेलन का विषय ‘भारती-नारी से नारायणी’ था। राष्ट्रपति ने कहाकि हमारा देश महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास के विचार केसाथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहाकि वैदिककाल में ब्रह्मवादिनी महिलाओं की प्रखरता से लेकर आधुनिक युग में रानी दुर्गावती, वीरमाता जीजाबाई, रानी चेन्नम्मा, लक्ष्मीबाई, झलकारीबाई, देवी अहिल्याबाई होल्कर के शौर्य और बुद्धिमत्ता के आदर्श पूरे समाज विशेष रूपसे महिलाओं केलिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने लोगों से महिला सशक्तिकरण के इन प्रेरक उदाहरणों को याद रखने और उनके आदर्शों को अमल में लाने का आग्रह किया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहाकि सेवा, समर्पण, राष्ट्रवाद, बहादुरी, धैर्य और प्रतिभा जैसे कई आयामों में महिलाएं पुरुषों के बराबर या उनसे भी श्रेष्ठ हैं। उन्होंने कहाकि उच्चशिक्षा संस्थानों में अधिकांश दीक्षांत समारोहों में उत्कृष्ट प्रदर्शन केलिए पदक प्राप्त करनेवाली छात्राओं की संख्या अधिक होती है, इससे पता चलता हैकि अवसर मिलने पर लड़कियां बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं। उन्होंने कहाकि हालांकि हमें इस कड़वी सच्चाई को भी मानना होगाकि आजभी कई महिलाओं को सामाजिक रूढ़ियों, आर्थिक असमानताओं और मनोवैज्ञानिक बाधाओं का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहाकि महिलाओं के सामने आनेवाली ऐसी समस्याओं का समाधान संवेदनशीलता पर आधारित सामूहिक प्रयासों से ही किया जा सकता है। द्रौपदी मुर्मु ने कहाकि राष्ट्रीय सेविका समिति जैसे संगठन इस दिशा में अहम योगदान दे सकते हैं, उन्हें यह जानकर प्रसन्नता हुईकि लगभग नौ दशक पहले शुरू किया गया एक संगठन महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने केलिए विभिन्न पहलों में सक्रिय रूपसे लगा हुआ है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहाकि लगभग एक दशक पहले राष्ट्रीय सेविका समिति केतहत शरण्या की स्थापना की गई थी, जिसका उद्देश्य वंचित समुदायों की महिलाओं में शिक्षा, कौशल, आत्मनिर्भरता और नेतृत्व क्षमता का विकास करना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त कियाकि यह पहल एक समावेशी और विकसित भारत निर्माण में एक सकारात्मक कदम साबित होगी। राष्ट्रपति ने कहाकि हमारी परंपरा में शक्ति ही शिव को पूर्ण करती है, शिव और शक्ति की अभिन्नता हमारी सांस्कृतिक चेतना का मूलतत्व है। उन्होंने कहाकि मानव समाज की प्रगति का रथ तभी आगे बढ़ेगा, जब उस रथ के दोनों पहिए यानी महिला और पुरुष पूर्णतः समान और समंवित रहेंगे। राष्ट्रपति ने कहाकि महिलाएं स्वरोज़गार से लेकर सशस्त्र बलों तक कई क्षेत्रों में योगदान दे रही हैं, उन्होंने खेलों में विश्व स्तरपर नए मानक स्थापित किए हैं। उन्होंने कहाकि महिलाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण वाले राष्ट्रीय प्रयासों से कई क्षेत्रोंमें महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। दो दिवसीय सम्मेलन का उद्देश्य भारत में महिलाओं की भूमिका का उत्सव मनाना, प्रतिबिंबित करना और फिरसे स्पष्ट करना है, जो एक सामाजिक भागीदार के रूपमें नारी से ज्ञान, नेतृत्व, करुणा और शक्ति केसाथ नारायणी में परिवर्तित हो रही है।