दिल्ली विश्वविद्यालय और समुद्री अर्थव्यवस्था व समन्वय केंद्र में करार
देश के युवाओं के लिए समुद्री क्षेत्र में खुलेंगे अपार अवसर-नौवहन मंत्रीस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Saturday 25 April 2026 03:18:34 PM
नई दिल्ली। पत्तन पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा हैकि विश्वस्तरीय समुद्री पेशेवरों की मांग में बढ़ोत्तरी हुई है और आर्थिक विकास को गति देने में भारत के समुद्री क्षेत्र की परिवर्तनकारी क्षमता उल्लेखनीय है। उन्होंने कहाकि देश के युवाओं केलिए समुद्री क्षेत्रमें अपार अवसर खुलेंगे। इस संबंध में दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में सेंटर फ़ॉर मैरीटाइम इकोनॉमी एंड कनेक्टिविटी और दिल्ली विश्वविद्यालय केबीच महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों का आदान प्रदान किया गया। सर्बानंद सोनोवाल ने इस सहयोग को एक भविष्योन्मुखी कदम बताया, जो शिक्षा और उद्योग केबीच की खाई को पाटता है। नौवहन मंत्री ने कहाकि भारत की समुद्री आकांक्षाओं के केंद्र में मानव पूंजी होगी।
नौवहन मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने यह भी उल्लेख कियाकि इन 12 वर्ष में देश के नाविक कार्यबल में लगभग तीन गुना वृद्धि हुई है और अब यह वैश्विक समुद्री कार्यबल में लगभग 12 प्रतिशत का योगदान देता है, जिसे 2030 तक 20 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य है। सर्बानंद सोनोवाल ने कहाकि दिल्ली विश्वविद्यालय और सीएमईसी केबीच यह समझौता समुद्री शिक्षा, अनुसंधान और कौशल विकास को बढ़ावा देगा। सर्बानंद सोनोवाल ने कहाकि दिल्ली विश्वविद्यालय और विकासशील देशों की अनुसंधान एवं सूचना प्रणाली के समुद्री अर्थव्यवस्था और समन्वय केंद्र (सीएमईसी) केबीच हुए एमओयू का उद्देश्य भारत के दीर्घकालिक समुद्री विजन के अनुरूप समुद्री शिक्षा, अनुसंधान और क्षमता निर्माण को मजबूत करना है। इस अवसर पर ‘ब्लू इकोनॉमी: विकसित भारत केलिए इसकी अनिवार्यताएं’ विषय पर सर्बानंद सोनोवाल ने कहाकि जैसे-जैसे हम विकसित भारत की ओर बढ़ रहे हैं, समुद्री क्षेत्र भारत के आर्थिक विकास, व्यापार प्रतिस्पर्धात्मकता और सतत विकास को गति देने में औरभी अधिक परिवर्तनकारी भूमिका निभाएगा।
सर्बानंद सोनोवाल ने कहाकि हम गुणवत्ता और पैमाने दोनों में विश्वस्तरीय समुद्री पेशेवरों की बढ़ती मांग को पूरा करने केलिए एक मजबूत इकोसिस्टम बना रहे हैं, जो भारत को इस क्षेत्रमें एक वैश्विक नेता के रूपमें स्थापित करेगा। उन्होंने कहाकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन केतहत भारत एक वैश्विक समुद्री नेता के रूपमें उभरने केलिए शिक्षा, नीति और नवाचार को एकसाथ जोड़ रहा है। भारत के रणनीतिक समुद्री लाभों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने उल्लेख कियाकि 11000 किलोमीटर से अधिक लंबी तटरेखा और 111 राष्ट्रीय जलमार्गों केसाथ समुद्री इकोसिस्टम को मजबूत करना एक राष्ट्रीय अनिवार्यता है। सर्बानंद सोनोवाल ने कहाकि सरकार का समुद्री विजन, क्षेत्रीय सहयोग, समुद्री सुरक्षा और साझा समृद्धि केप्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहाकि यह एमओयू शैक्षणिक जगत और नीतिगत संस्थानों केबीच अंतःविषय सहयोग को बढ़ावा देने का प्रयास करता है, जिसका मुख्य ध्यान उभरते हुए समुद्री क्षेत्रों में कौशल विकास, क्षमता निर्माण और अनुसंधान पर है।
नौवहन मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहाकि भारत के समुद्री कायाकल्प में बंदरगाहों का आधुनिकीकरण, मल्टीमोडल कनेक्टिविटी, सस्टेनेबिलिटी की पहल और डिजिटलीकरण प्रमुख हैं। उन्होंने सागरमाला और मैरीटाइम अमृतकाल विजन 2047 जैसे कार्यक्रमों को इस विकास पथ के मुख्य आधार के रूपमें रेखांकित किया। उन्होंने यह भी कहाकि इस सहयोग से समुद्री लॉजिस्टिक्स, ग्रीन शिपिंग, सप्लाई चेन मैनेजमेंट और समुद्री नीति जैसे क्षेत्रोंमें छात्रों और शोधकर्ताओं केलिए नए रास्ते खुलने की उम्मीद है, जो एक टिकाऊ और वैश्विक स्तरपर प्रतिस्पर्धी ब्लू इकोनॉमी के व्यापक विजन में योगदान देंगे। इस दौरान सार्वजनिक नीति अनुसंधान और प्रशिक्षण में संयुक्त कार्यक्रमों को बढ़ावा देने केलिए आरआईएस और दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स केबीच एक और एमओयू का आदान प्रदान किया गया।