पारंपरिक प्रस्तुतियों और पवित्र अनुष्ठान से किया गया स्वागत
बुद्ध पूर्णिमा पर जीवत्सल में ऐतिहासिक आध्यात्मिक उत्सव!स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Thursday 30 April 2026 12:36:19 PM
लेह। तथागत भगवान गौतम बुद्ध के पवित्र पिपरावा अवशेष लेह पहुंच चुके हैं। अवशेषों को एक भव्य जुलूस में जीवत्सल ले जाया गया, जो 1 मई से सार्वजनिक प्रदर्शन केलिए निर्धारित स्थान है। यह 2569वीं बुद्ध पूर्णिमा का दिन है। यह केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख में एक ऐतिहासिक आध्यात्मिक उत्सव के प्रारंभ का भी प्रतीक है। भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष के स्वागत समारोह में पारंपरिक प्रस्तुतियां, औपचारिक सम्मान और पवित्र अनुष्ठान हुए। द्रुकपा थुकसे रिनपोचे और माथो मठ के खेनपो थिनलास चोसल द्वारा विशेष वायुसेना विमान से दिल्ली से लाए गए अवशेषों को लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने खामतक रिनपोचे, रिग्याल रिनपोचे, लद्दाख गोम्पा एसोसिएशन के अध्यक्ष वेन दोरजे स्टैनज़िन, लद्दाख बौद्ध एसोसिएशन के अध्यक्ष चेरिंग दोरजे लकरुक, पूर्व सांसद थुपस्टन चेवांग और जामयांग त्सेरिंग नामग्याल, पूर्व सीईसी एलएएचडीसी लेह ताशी ग्यालसन और विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधियों सहित प्रमुख धार्मिक और सार्वजनिक हस्तियों की उपस्थिति में ग्रहण किया।
बुद्ध के पवित्र अवशेष के स्वागत समारोह में लद्दाख पुलिस ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया और बौद्ध भिक्षुओं एवं अनुयायियों ने विशेष प्रार्थनाएं कीं। इस आयोजन में लद्दाखभर से समुदाय बड़ी तादाद में मौजूद थे, जो एकता, आस्था और सामूहिक श्रद्धा को दर्शाती है। इस दौरान हजारों श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में जीवत्सल तक जानेवाले मार्ग पर पवित्र अवशेषों के दर्शन केलिए कतार में खड़े थे। पवित्र अवशेषों को साथ लेकर आए वरिष्ठ अधिकारियों का स्कूल के बच्चों और तिब्बती समुदायों के लोगों ने पारंपरिक वेशभूषा में फूलों और शुभकामनाओं केसाथ गर्मजोशी से स्वागत किया। उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने इस अवसर को अत्यंत शुभ बताते हुए कहाकि पवित्र अवशेषों के आगमन से पूरे क्षेत्र को आशीर्वाद प्राप्त हुआ है। उन्होंने बतायाकि इन अवशेषों को पहले अंतर्राष्ट्रीय स्तरपर प्रदर्शित किया जा चुका है, लेकिन यह पहलीबार हैकि इन्हें इनके मूल संरक्षण स्थान से निकालकर भारत में प्रदर्शित किया जा रहा है।
विनय कुमार सक्सेना ने इस पवित्र आयोजन केलिए लद्दाख को चुनने केलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया और बौद्ध धर्म और आध्यात्मिकता से इस क्षेत्र के गहरे जुड़ाव पर प्रकाश डाला। उन्होंने लोगों से भगवान बुद्ध का आशीर्वाद प्राप्त करने केलिए बड़ी संख्या में भाग लेने का आग्रह किया। बीते वर्षों में भगवान बुद्ध के पवित्र पिपरावा अवशेषों को थाईलैंड, मंगोलिया, वियतनाम, रूस, सिंगापुर, भूटान, श्रीलंका और म्यांमार सहित कई देशों में प्रदर्शित किया गया, जिससे वैश्विक ध्यान और श्रद्धा का संचार हुआ है। लद्दाख में ये अवशेष 2 से 10 मई तक जीवत्सल में सार्वजनिक दर्शन केलिए उपलब्ध रहेंगे, इसके बाद 11 और 12 मई को ज़ांस्कर में और फिर 13 से 14 मई तक लेह के धर्म केंद्र में प्रदर्शित किए जाएंगे और 15 मई को दिल्ली वापस लाए जाएंगे। गृहमंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्रियों, राजदूतों, बौद्ध बहुल राज्यों के मुख्यमंत्रियों और विभिन्न बौद्ध संगठनों के प्रतिनिधियों केसाथ लेह में श्रद्धा अर्पित करने केलिए उपस्थित रहेंगे।
हालके वर्षों में भगवान बुद्ध के पवित्र पिपरावा के अवशेषों ने वैश्विक स्तरपर पुनः महत्व प्राप्त कर लिया है। लगभग 127 वर्ष तक औपनिवेशिक कब्जे में रहने केबाद जुलाई 2025 में एक ब्रिटिश परिवार और एक निजी संग्रह से संबंधित रत्नों और भेंटों का एक महत्वपूर्ण संग्रह भारत को वापस लौटाया गया। इस दौरान सभी आगंतुकों केलिए एक सुखद, सौंदर्यपूर्ण और आध्यात्मिक रूपसे समृद्ध अनुभव सुनिश्चित करने केलिए वृक्षारोपण अभियान, फूलों के गमलों की स्थापना और शहरव्यापी स्वच्छता पहल को एक मिशन की तरह अपनाया गया है।