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बुद्ध पूर्णिमा पर लद्दाख में ऐतिहासिक आयोजन

बुद्ध पूर्णिमा खासतौर से लद्दाखवासियों केलिए मणिकांचन-गृहमंत्री

तथागत भगवान बुद्ध के अवशेषों के दर्शनार्थ पहुंचे बौद्ध अनुयायी

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Saturday 2 May 2026 12:08:52 PM

viewing the sacred relics of lord buddha

लेह। गृहमंत्री अमित शाह बुद्ध पूर्णिमा पर लेह में भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों के दर्शनार्थ कार्यक्रम में पहुंचे और कहाकि बुद्ध पूर्णिमा खासतौर से लद्दाखवासियों केलिए मणिकांचन अवसर है, यहां 75 साल बाद भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष आने से बौद्धधर्म के साथही अन्य मतों के अनुयायी इनसे ऊर्जा प्राप्त करेंगे। अमित शाह ने कहाकि भगवान बुद्ध की तरह शायद ही किसी के जीवन में ऐसा होगाकि जन्म, ज्ञानप्राप्ति और महापरिनिर्वाण एकही दिन हुए हों, इसीलिए बुद्ध पूर्णिमा सबके लिए बहुत शुभ और प्रेरणादायक है। उन्होंने कहाकि बुद्ध पूर्णिमा धर्मिक आयोजन केसाथ एक ऐतिहासिक पुनर्मिलन भी है, इतने साल केबाद इस पवित्र भूमि पर तथागत बुद्ध अपनी सबसे प्रिय भूमि पर लौटे हैं, जो बहुत सौभाग्य का विषय है। गृहमंत्री अमित शाह ने कहाकि लद्दाख सैकड़ों वर्ष से धम्म की जीवंत भूमि है, जब बौद्ध धर्मगुरू परमपावन दलाई लामा यहां आते हैं और कहते हैंकि यह भूमि केवल भौगोलिक भूमि नहीं है, बल्कि बौद्ध संस्कृति और करुणा की जीवंत प्रयोगशाला जहां विश्वास मजबूत होता जाता है।
अमित शाह ने कहाकि लद्दाख की भूमि पर ज्ञान का संरक्षण और संवर्धन हुआ है, जबभी बौद्धधर्म पर संकट आए, तब इस भूमि ने भगवान बुद्ध के शांति संदेश को संरक्षित करने और जनविश्वास को मजबूत करने और आस्थावान बनाने का काम किया है, जिसकी अनुभूति होती रहती है। उन्होंने कहाकि जब शांतिकाल आया तो संरक्षित और संवर्धित ज्ञान ने प्रचारित प्रसारित किया। उन्होंने कहाकि भारत तथागत के उपदेश को चीन और कई देशों में पहुंचाने का माध्यम बना। गृहमंत्री ने कहाकि लद्दाख की आध्यात्मिक पहचान चार प्रमुख परंपराओं-न्यिंग्मा, काग्यु, शाक्य और गेलुग से बनी है। उन्होंने कहाकि-पहली जो जैसा है उसे वैसाही देखिए, दूसरी गुरु की कृपा और निरंतर आत्मचिंतन ही मुक्ति का द्वार है, तीसरी साधना के बिना ज्ञान अधूरा है और साधना ज्ञान के बिना अंधी होती है, इसीलिए ज्ञान और साधना का मिलन ही सही रास्ता है, चौथी नैतिक अनुशासन नहीं है तो कभी प्रज्ञावान जीवन नहीं बन सकता। अमित शाह ने कहाकि लद्दाख की भूमि से निकला, यह संदेश आज विश्व केलिए जीवन को आगे ले जाने का कारण बना है।
केंद्रीय गृहमंत्री ने कहाकि लद्दाख में इन पवित्र अवशेषों की उपस्थिति याद दिलाती हैकि भारत की सभ्यता हज़ारों वर्ष से शांति और सहअस्तित्व का संदेश दे रही है। उन्होंने कहाकि लद्दाख और कारगिल जैसे विविधताओं से भरे स्थानों में यह संदेश और ज्यादा प्रासंगिक हो जाता है। अमित शाह ने कहाकि यह विरासत हमें बताती हैकि संघर्ष और अशांति केबीच शांति और करुणा का मार्ग ही हमें अंतिम समाधान दे सकता है। उन्होंने कहाकि लद्दाख में सदियों से बौद्धधर्म अलग-अलग तरीकों से और अलग-अलग समय पर पहुंचता और पनपता रहा और विकसित होकर लद्दाख से बाहर भी गया है। उन्होंने कहाकि लद्दाख कश्मीर के बौद्ध अध्ययन, महायान दर्शन और बौद्धकला का प्राचीन केंद्र था और वहींसे लद्दाख को सबसे पहले बौद्धधर्म का संपर्क, संसर्ग और सत्संग का रास्ता मिला। सम्राट अशोक के दूतों ने लद्दाख में बौद्ध प्रभाव की नींव रखी, कुषाणकाल में लगभग पहली और तीसरी सदी में महायान बौद्धधर्म का उत्कर्ष और उसका विकास लद्दाख तक पहुंचा, कई प्राचीन स्तूप, बौद्ध प्रतिमाएं, खरोष्टी-ब्राह्मी अभिलेख इस बात के साक्षी हैंकि इसकाल में भी बौद्धधर्म यहां आगे बढ़ा।
अमित शाह ने कहाकि सिल्क रूट के कारण भी कश्मीर, लेह, यारकंद, खोतान और तिब्बत को जोड़ने वाले मार्ग सिर्फ व्यापार ही नहीं बल्कि विचार केलिए भी बहुत महत्वपूर्ण बना। अमित शाह ने कहाकि सातवीं से 10वीं सदी में महायान और वज्रयान परंपराएं तिब्बत से लद्दाख पहुंची और यहां पर तथागत का संदेश समृद्ध हुआ, इसके बाद निर्णायक योगदान 10वीं-11वीं सदी में आया, जब संस्कृत ग्रंथों का तिब्बती भाषा में अनुवाद हुआ, 108 मठों की स्थापना हुई, अलची मठ की स्थापना हुई और बौद्ध धर्म को संस्थागत और स्थाई स्वरूप दिया गया। अमित शाह ने कहाकि दुनिया में जहां-जहां बौद्ध परंपरा है, वहां लद्दाख से संवर्धित हुआ यह ज्ञान बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। उन्होंने कहाकि महायान बौद्ध साहित्य में कहा गया हैकि जब पवित्र अवशेषों का दर्शन करने का सौभाग्य मिलता है, तब बुद्ध का ही दर्शन करने का सौभाग्य मिलता है।
अमित शाह ने लद्दाख प्रशासन से आग्रह कियाकि सभी मतों विशेषकर बौद्धधर्म के अनुयायियों के यहां आने और दर्शन करने की संपूर्ण व्यवस्था करे। उन्होंने कहाकि भगवान बुद्ध ने जब ज्ञान प्राप्त किया और भिक्षुओं के माध्यम से उसका प्रचार-प्रसार किया, उस वक्त बुद्ध का ज्ञान जितना प्रासंगिक था, आज 2500 साल बाद बुद्ध का ज्ञान दुनिया केलिए औरभी ज्यादा प्रासंगिक है। अमित शाह ने आह्वान किया कि दुनिया को भारत के ज्ञान और भगवान बुद्ध के महान संदेश को समझ और स्वीकार कर समाधान के रास्ते पर चलना चाहिए और मध्यम मार्ग पर बढ़ना चाहिए। इस अवसर पर लद्दाख के उपराज्यपाल वीके सक्सेना और केंद्रीय गृह सचिव और बड़ी संख्या में बौद्ध भिक्षु और अनुयायी उपस्थित थे।

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