एनसीजीजी और सेशेल्स के लोक सेवा ब्यूरो के बीच ऐतिहासिक समझौता
राष्ट्रीय सुशासन केंद्र का मसूरी नई दिल्ली में क्षमता निर्माण कार्यक्रम शुरूस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Tuesday 12 May 2026 04:06:33 PM
मसूरी/ नई दिल्ली। राष्ट्रीय सुशासन केंद्र (एनसीजीजी) ने सेशेल्स के सिविल सेवकों केलिए प्रथम क्षमता निर्माण कार्यक्रम की शुरूआत कर दी है। यह दो सप्ताह का कार्यक्रम 11 से 22 मई 2026 तक विदेश मंत्रालय के सहयोग से मसूरी और नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है। इस पहले समूह में रक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी, वित्त, न्यायपालिका, शिक्षा, लोक प्रशासन, राष्ट्रपति कार्यालय आदि महत्वपूर्ण क्षेत्रों के महानिदेशकों और वरिष्ठ अधिकारियों सहित 29 उच्च पदस्थ अधिकारी शामिल हैं। यह कार्यक्रम एनसीजीजी और सेशेल्स के लोक सेवा ब्यूरो केबीच फरवरी 2026 में हस्ताक्षरित एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन का पहला चरण है। यह तीन वर्षीय समझौता सेशेल्स के 250 सिविल सेवकों को प्रशिक्षित करने केलिए एक व्यापक कार्ययोजना की रूपरेखा तैयार करता है, जिसमें संस्थागत नेतृत्व को मजबूत करने और डिजिटल परिवर्तन को गति देने पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
राष्ट्रीय सुशासन केंद्र के महानिदेशक डॉ सुरेंद्रकुमार बागडे ने 29 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए भारत और सेशेल्स केबीच मजबूत ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों की जानकारी देते हुए कहाकि क्षमता निर्माण पाठ्यक्रम को अधिकारियों की पेशेवर प्रोफाइल के अनुरूप सावधानीपूर्वक तैयार किया गया है, इसमें सेशेल्स के सतत विकास केलिए महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है। उन्होंने कहाकि इसका उद्देश्य अधिकारियों को उच्च-प्रभावशाली राष्ट्रीय कार्यक्रमों को तैयार करने और लागू करने केलिए आवश्यक उपकरण एवं ज्ञान प्रदान करना है। उन्होंने प्रतिभागियों को अपने-अपने विभागों से केस स्टडी प्रस्तुत करने केलिए आमंत्रित किया, जिससे अंतर देशीय शिक्षण केलिए सहयोगात्मक वातावरण को बढ़ावा मिले और भविष्य के प्रशिक्षण विषयों की पहचान हो सके। राष्ट्रपति कार्यालय के नीतिगत कार्यों के उप सचिव और प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख एलेक्स हेंडरसन ने इस अवसर केलिए भारत सरकार केप्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहाकि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल क्षमता निर्माण को बढ़ावा देगा, बल्कि द्विपक्षीय संवाद को भी प्रोत्साहित करेगा और भारत सेशेल्स केबीच संबंधों को सुदृढ़ बनाने में सहायक होगा। एनसीजीजी के एसोसिएट प्रोफेसर और कार्यक्रम के पाठ्यक्रम सह समन्वयक डॉ बीएस बिष्ट ने राष्ट्रीय सुशासन केंद्र की उपलब्धियों की जानकारी दी।
डॉ बीएस बिष्ट ने बतायाकि यह प्रशिक्षण लोक नीति के अंतर्विषयक क्षेत्रों पर केंद्रित होगा, जिनमें सुशासन के सिद्धांत, नीति निर्माण और कार्यांवयन, शासन में तकनीकी नवाचार, न्यायालय प्रबंधन और भारत में न्यायिक सुधार, ई-न्यायालय और डिजिटलीकरण यानी कानूनी पहुंच में परिवर्तन, जीईएम यानी सरकारी खरीद में पारदर्शिता लाना, एआई सक्षम सुशासन, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, पीएम गति शक्ति, प्रशासन में नैतिकता और सत्यनिष्ठा, अवसंरचना में पीपीपी, प्रदर्शन प्रबंधन के सिद्धांत, राष्ट्रीय सुरक्षा परिदृश्य, डिजिटल भुगतान यानी भारतीय कहानी और कई विषय शामिल होंगे। उन्होंने बतायाकि कार्यक्रम के दूसरे चरण में समग्र शिक्षण अनुभव केलिए महत्वपूर्ण संस्थानों का दौरा शामिल होगा। उल्लेखनीय हैकि एनसीजीजी ने अबतक 52 देशों के सिविल सेवकों को प्रशिक्षण प्रदान किया है, इनमें मेडागास्कर, मलेशिया, श्रीलंका, बांग्लादेश, केन्या, तंजानिया, ट्यूनीशिया, गैम्बिया, मालदीव, अफगानिस्तान, लाओस, वियतनाम, नेपाल, भूटान, म्यांमार, इथियोपिया, इरिट्रिया, कंबोडिया, अफ्रीकी और लैटिन अमरीकी देशों के सिविल सेवक प्रमुख थे। कार्यक्रम का पर्यवेक्षण और समन्वय पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ बीएस बिष्ट, सह पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ संजीव शर्मा और एनसीजीजी की क्षमता निर्माण टीम कर रही है।