'रोगी देखभाल और आधुनिक चिकित्सा के उच्चतम मानक स्थापित किए'
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान नई दिल्ली का 51वां दीक्षांत समारोहस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Wednesday 13 May 2026 01:10:19 PM
नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली के 51वें दीक्षांत समारोह में कहाकि बीते 70 वर्ष से एम्स दिल्ली चिकित्सा नवाचार केंद्र के रूपमें कार्य कर रहा है, इसने रोगी देखभाल और आधुनिक चिकित्सा के उच्चतम मानक स्थापित किए हैं, साथही यह बेहद किफायती चिकित्सा सुविधाएं भी प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहाकि एम्स दिल्ली की चिकित्सा सेवाएं अतुलनीय हैं। उन्होंने कहाकि एम्स ने विश्वास और दृढ़ता से खुदको एक ब्रांड के तौरपर स्थापित किया है, जिसका प्रमाण कोविड महामारी और चिकित्सा नवाचार में इसकी अग्रणी भूमिका है। सीपी राधाकृष्णन ने कहाकि एम्स दिल्ली में प्रतिवर्ष 50 लाख बाह्य रोगी इलाज केलिए आते हैं, यहां ग़रीब मरीजों को सर्वोत्तम चिकित्सा उपचार और देखभाल मिलती है। उन्होंने कहाकि एम्स के चिकित्सा पेशेवरों ने न केवल देश, बल्कि विश्वभर के प्रतिष्ठित संस्थानों में शीर्ष पदों को प्राप्त किया है।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने इसवर्ष एम्स की टीम के अंटार्कटिका के मैत्री अनुसंधान केंद्र में एक व्यक्ति पर किए गए विश्व के पहले लाइव रिमोट टेली रोबोटिक अल्ट्रासाउंड के ज़रिए प्रौद्योगिकी के शानदार प्रदर्शन की सराहना की। उपराष्ट्रपति ने कहाकि 12000 किलोमीटर दूर से हमारे विशेषज्ञों ने एआई संचालित रोबोटिक्स का उपयोग करते हुए बर्फ से जमे महाद्वीप केबीच की दूरी को खत्म करते हुए यह साबित कर दियाकि भौगोलिक स्थितियां अब जीवन को बचाने की राह में बाधा नहीं हैं। उन्होंने कहाकि स्वास्थ्य में एआई केलिए भारत-फ्रांस केंद्र का उद्घाटन नैदानिक नवाचार के वैश्विक केंद्र के रूपमें हमारी स्थिति को और मजबूत करता है, जहां दोनों देशों के प्रतिभाशाली दिमाग अब मस्तिष्क स्वास्थ्य और डिजिटल चिकित्सा केलिए सहयोग करेंगे। उपराष्ट्रपति ने एम्स परिवार के योगदान को भी रेखांकित किया, जिसे वर्षों से लगातार प्रतिष्ठित पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया जा रहा है, इनमें 2 पद्म विभूषण, 15 पद्म भूषण और 51 पद्मश्री सम्मान प्रमुख हैं। उन्होंने वैश्विक स्तरपर एम्स की प्रसिद्धि पर भी प्रकाश डाला, जिसमें एम्स दिल्ली के 56 वैज्ञानिक 2025 में स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय की विश्व के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में शामिल किए गए। स्वास्थ्य सेवा ढ़ांचे के विस्तार पर सीपी राधाकृष्णन ने कहाकि एक दशक में देशभर में नए एम्स संस्थानों की स्थापना से गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा और चिकित्सा शिक्षा तक पहुंच मजबूत हुई है, खासकर कम सुविधाओं वाले क्षेत्रों में। उन्होंने कहाकि देश के हर कोने में एम्स का विस्तार देश के एकीकरण का प्रतीक है।
उपराष्ट्रपति ने स्नातकों और उनके अभिभावकों को उनके अथक त्याग, मेहनत और अनुशासन केलिए बधाई दी। उन्होंने कहाकि वे एक ऐसे संस्थान से स्नातक हो रहे हैं, जो न केवल दुनिया के बाकी हिस्सों केसाथ कदम मिलाकर चल रहा है, बल्कि वास्तव में चिकित्सा के भविष्य की दिशा भी तय कर रहा है, एआई निदान से नैदानिक नैतिकता के उच्चतम मानकों को बनाए रखने तक उन्होंने यहां जो कौशल हासिल किए हैं, वे भारतीय स्वास्थ्य सेवा को बदलने केलिए जरूरी उपकरण हैं। स्वास्थ्य मंत्री जगतप्रकाश नड्डा ने भी भारत के प्रमुख चिकित्सा संस्थान से स्नातक छात्रों को बधाई देते हुए कहाकि यह दीक्षांत समारोह सात दशक की नि:स्वार्थ सेवा को डिजिटल युग से संचालित भविष्य से जोड़ने वाला एक सेतु है। उन्होंने कहाकि दिल्ली एम्स शुरू से ही एक शैक्षणिक केंद्र या अस्पताल से कहीं अधिक रहा है, यह अपने आपमें एक ब्रांड है। उन्होंने एम्स के छात्रों पर निहित बड़ी जिम्मेदारी पर जोर दिया, जिन्हें देशभर में उभरते हुए एम्स संस्थानों का मार्गदर्शन और समर्थन करने का महत्वपूर्ण कार्य सौंपा गया है। जेपी नड्डा ने कहाकि दिल्ली एम्स वर्तमान में 300 करोड़ रुपये की निधि केसाथ 900 से अधिक बाह्य अनुसंधान परियोजनाओं पर कार्य कर रहा है, इसके अलावा 150 से अधिक आंतरिक शोध कार्य भी चल रहे हैं। जेपी नड्डा ने कहाकि दिल्ली एम्स ने उत्कृष्टता की अनुशासित संस्कृति से एनआईआरएफ में लगातार प्रथम स्थान प्राप्त किया है, जो हर वार्ड और कक्षा में व्याप्त है।
स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने बतायाकि नवीनतम क्यूएस विश्व विश्वविद्यालय रैंकिंग में दिल्ली एम्स ने दो साल पहले के 145वें स्थान से छलांग लगाकर चिकित्सा क्षेत्रमें वैश्विक स्तरपर 105वां स्थान हासिल किया है, जिससे भारत के प्रमुख चिकित्सा संस्थान के रूपमें इसका स्थान और मजबूत हुआ है और अब यह वैश्विक शीर्ष 100 में शामिल होनेके बेहद करीब पहुंच गया है। उन्होंने 11 वर्ष में भारत के स्वास्थ्य सेवा परिदृश्य को बेहतर बनाने की केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बतायाकि देशभर में एम्स की संख्या 23 हो गई है, इसी तरह आज लगभग 825 मेडिकल कॉलेज हैं। उन्होंने बतायाकि केंद्र सरकार 2025-2029 केबीच देश में स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर की 10,000 और सीटें सृजित करेगी। उन्होंने छात्रों से राष्ट्रीय स्वास्थ्य के संरक्षक बनने का आग्रह किया। एम्स के दीक्षांत समारोह में चिकित्सा विज्ञान, शिक्षा, अनुसंधान और रोगी देखभाल में असाधारण योगदान केलिए पांच प्रतिष्ठित पूर्व संकाय सदस्यों को आजीवन उपलब्धि पुरस्कार से सम्मानित किया गया ये हैं-डॉ टीपी सिंह पूर्व डीन (परीक्षा), एक्स-रे क्रिस्टलोग्राफी और संरचना आधारित दवा खोज के क्षेत्रमें अग्रणी, डॉ शशि वाधवा पूर्व डीन (अकादमिक) और प्रख्यात न्यूरोबायोलॉजिस्ट, डॉ एससी तिवारी भारत में नेफ्रोलॉजी और गुर्दा देखभाल नवाचारों के क्षेत्रमें अग्रणी, डॉ आरसी डेका प्रतिष्ठित ईएनटी सर्जन और एम्स के पूर्व निदेशक और डॉ वीएस मेहता भारत में ब्रेकियल प्लेक्सस सर्जरी के क्षेत्र में अग्रणी।
एम्स के दीक्षांत समारोह में स्नातक, स्नातकोत्तर, सुपरस्पेशलिटी, डॉक्टरेट, नर्सिंग और संबद्ध स्वास्थ्य विज्ञान कार्यक्रमों में कुल 523 डिग्रियां प्रदान की गईं। संस्थान की ओर से एमबीबीएस, नर्सिंग और संबद्ध स्वास्थ्य विज्ञान कार्यक्रमों के मेधावियों को पदक, पुस्तक पुरस्कार और प्रशंसा प्रमाणपत्र प्रदान किए गए, जो विभिन्न विषयों और कार्यक्रमों में उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन को मान्यता देते हैं। दीक्षांत में दिल्ली एम्स के निदेशक प्रोफेसर निखिल टंडन, दिल्ली एम्स की डीन प्रोफेसर राधिका टंडन और दिल्ली एम्स के रजिस्ट्रार प्रोफेसर गिरिजा प्रसाद रथ और संकाय सदस्य एवं बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित थे।