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'नक्सलवाद के बाद अब घुसपैठ होगी समाप्त'

स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट देश की सीमाओं को अभेद्य बनाएगा-गृहमंत्री

बीएसएफ का अलंकरण समारोह और रूस्तमजी स्मृति व्याख्यान

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Friday 22 May 2026 06:06:43 PM

bsf investiture ceremony and rustamji memorial lecture

नई दिल्ली। गृहमंत्री अमित शाह ने कहा हैकि 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार बनने केबाद से हमारी रक्षा नीति और सीमाओं की सुरक्षा के बारेमें हमारे नजरिए में आमूलचूल परिवर्तन आया है, पाकिस्तान के तीनों हमलों का हमने जवाब दिया है, चाहे उरी हो, पुलवामा हो या पहलगाम हो, हमने सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान के अंदर उनके मर्मस्थान पर प्रहारकर उसको मुंहतोड़ जवाब दिया है। उन्होंने कहाकि वह ज़माना गयाकि आतंकी हमलों केबाद वार्ताएं होती थीं, नक्सलवादी बेखौफ होकर जनसंहार करते थे और सरकारें सिर्फ़ वार्ता करती थीं। गृहमंत्री ने कहाकि हमने अपने सुरक्षा परिदृश्य को भारत के संविधान की स्पिरिट केसाथ मज़बूत बनाने का काम किया है, यह एक प्रकार से नए रक्षा सिद्धांत की घोषणा है और इसमें सीमा सुरक्षा बल का बहुत बड़ा योगदान रहा है। गृहमंत्री अमित शाह आज नई दिल्ली में सीमा सुरक्षा बल के अलंकरण समारोह और रुस्तमजी स्मृति व्याख्यान को संबोधित कर रहे थे।
गृहमंत्री अमित शाह ने कहाकि भारत सरकार और गृह मंत्रालय सीमा को एक स्मार्ट बॉर्डर बनाने में सीमा सुरक्षा बल को तकनीकी सहायता प्रदान करेंगे। उन्होंने कहाकि आने वाले 1 साल के अंदर ही स्मार्ट बॉर्डर कंसेप्ट केसाथ सीमा की सुरक्षा में सभी प्रकार की तकनीक को समाहितकर एक अभेद्य बॉर्डर का सुरक्षा ग्रिड बनाने का काम आगे बढ़ रहा है। गृह मंत्रालय बहुत जल्दी ड्रोन, रडार, आधुनिक कैमरा औरभी नई तकनीक केसाथ स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट से देश की सीमाओं की रक्षा करेगा। अमित शाह ने कहाकि इस शुरूआत केबाद सीमा सुरक्षा बल का काम काफी सरल हो जाएगा और इसे मजबूती भी मिलेगी। अमित शाह ने कहाकि सीमा सुरक्षा बल की स्थापना के 60वें साल में ही हम स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट की शुरूआतकर बांग्लादेश और पाकिस्तान की पूरी सीमा को अभेद्य बना देंगे, जिससे बीएसएफ़ को बहुत बड़ी तकनीकी सहायता उपलब्ध हो जाएगी, इससे पराक्रम, शौर्य, समर्पण, देशभक्ति केसाथ एक मजबूत तकनीकी सपोर्ट भी बल केपास उपलब्ध होगा, जिससे हम दोनों सीमाओं को और अधिक सुरक्षित कर देंगे।
गृहमंत्री ने कहाकि हम न केवल घुसपैठ को रोकेंगे, बल्कि एक-एक घुसपैठिए को चुन-चुनकर देश से बाहर निकाल देंगे और अपनी जनसांख्यिकी में कृत्रिम बदलाव नहीं होने देंगे। उन्होंने कहाकि अब त्रिपुरा, असम और पश्चिम बंगाल में ऐसी सरकारें हैं, जो नीतिगत रूपसे मानती हैंकि देश में घुसपैठ नहीं होनी चाहिए, यह सीमा सुरक्षा बल की जिम्मेदारी हैकि हम न केवल सीमाओं की सुरक्षा करें, बल्कि गांव के पटवारी, थाने, डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर, डीडीओ, जिला पुलिस अधीक्षक केसाथ हमारा संवाद होना चाहिए। कौन नया घुसपैठिया आया है, उसके आने का क्या रूट है, कहां से तस्करी, गौ तस्करी हो रही है? इन सभी रूट्स को चुन-चुनकर बंद करना और समाप्त करना बीएसएफ की जिम्मेदारी है। इनसे मिली हुई सारी सूचना का उपयोगकर घुसपैठियों को निकालने और रोकने की एक सुचारू व्यवस्था बनानी चाहिए। गृहमंत्री ने कहाकि अब समय आ गया हैकि सालों से बेरोक-टोक चल रही घुसपैठ को हमें रोकना होगा। गृहमंत्री ने कहाकि बीएसएफ अडिग निष्ठा, कतर्व्यपरायणता और राष्ट्र केप्रति पूर्ण समर्पण का प्रतीक है।
अमित शाह ने कहाकि वर्ष 1965 के युद्ध केबाद सीमाओं की सुरक्षा व्यवस्था में पाए गए गैप्स और कमियों का गहन अध्ययन करने केबाद एक ऐसे बल की आवश्यकता महसूस की गई, जो शांतिकाल में भी हमारी सीमाओं की सुरक्षा करे, उस समय पद्म विभूषण केएफ रुस्तमजी के नेतृत्व में बीएसएफ का गठन हुआ और तबसे इसने देश की सीमाओं की सुरक्षा को सुनिश्चित किया है। उन्होंने कहाकि रुस्तमजी ने सीमा सुरक्षा बल की जो नींव डाली उसपर सुरक्षा के क्षेत्रमें एक भव्य इमारत बनाने का काम आज बीएसएफ ने किया है, जो देश केलिए बड़ी गौरव की बात है। गृहमंत्री ने बीएसएफ की महिला टीम को माउंट एवरेस्ट फतह करने की ऐतिहासिक उपलब्धि केलिए दल के सदस्यों और सीमा सुरक्षा बल के जवानों को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहाकि एवरेस्ट की चोटी पर जब वंदे मातरम गाया जाता है तो यहां दिल्ली में बैठकर भी हमारे मन में बहुत आनंद और संतोष की अनुभूति होती है। गृहमंत्री ने कहाकि सीमा सुरक्षा बल की वीरांगनाओं को विश्व की सबसे ऊंची चोटी पर वंदे मातरम का गान करने का सौभाग्य मिला है।
अमित शाह ने कहाकि अवैध घुसपैठ, नारकोटिक्स की तस्करी, गौ तस्करी, नकली करेंसी, संगठित अपराध, ड्रोन से हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी सहित कई प्रकार की चुनौतियां सीमा सुरक्षा बल के सामने हैं, लेकिन बीएसएफ ने लगातार इनसे निपटने का सुनियोजित प्रयास किया है। अमित शाह ने कहाकि बीएसएफ ने अपने पास उपलब्ध संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग करते हुए इन चुनौतियों के बखूबी सामनाकर देश की सुरक्षा करने का काम किया है। उन्होंने कहाकि आने वाले दिनों में बीएसएफ की भूमिका को और अधिक समन्वित औरभी व्यापक करना होगा। अमित शाह ने कहाकि अब हम केवल पारंपरिक तरीके से सीमाओं की सुरक्षा नहीं कर सकते, हमें राज्य पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल, अन्य सशस्त्र बल, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, खुफिया एजेंसियों और राज्य प्रशासन केसाथ सुरक्षा ग्रिड को मजबूत करना पड़ेगा, सीमा सुरक्षा को एक आइसोलेटेड ज़िम्मेदारी के रूपमें देखने की जगह एक टेरिटोरियल रिस्पांसिबिलिटी के रूपमें देखना होगा, आने वाले खतरों को भी देखना पड़ेगा, हमारी जिम्मेदारी हैकि सीमापार से घुसपैठ द्वारा कृत्रिम तरीके से जनसांख्यिकी में किए जा रहे बदलाव को रोकने केलिए भी हमें सतर्क और सजग रहना पड़ेगा।
केंद्रीय गृहमंत्री ने कहाकि नार्कोटिक्स और फेक करेंसी के हमले से हमारे अर्थ तंत्र को खोखला करने के प्रयास केप्रति भी हमें सतर्क रहना होगा और साइबर चुनौतियां, हाइब्रिड वॉरफेयर और ड्रोन के खतरों केलिए एक नई रणनीति केसाथ हमें काम करना होगा। गृहमंत्री ने कहाकि सियाचिन और कश्मीर की बर्फीली पहाड़ियां, कुपवाड़ा, केरन और उरी जैसे दुर्गम क्षेत्र, राजस्थान का रण, कच्छ का छोटा रण, सरक्रीक के दलदली नाले, सुंदरवन के घने जंगल, त्रिपुरा, मेघालय और मिजोरम की कठिन पूर्वी सीमाएं और ब्रह्मपुत्र से जुड़े कठिन संवेदनशील नदी क्षेत्रों केबीच सीमा सुरक्षा बल डटा हुआ है, इसी कारण 1965 में महज 25 बटालियनों से अल्प संसाधनों केसाथ शुरू हुआ सीमा सुरक्षा बल आज 270000 की नफरी केसाथ विश्व का सबसे बड़ा सीमा सुरक्षा बल बन गया है। अमित शाह ने कहाकि भारत सरकार के अडिग और दृढ़ निश्चय के कारण पांच दशक पुरानी नक्सलवाद की समस्या आज समाप्त हो गई है और भारत नक्सल मुक्त हो चुका है। उन्होंने कहाकि हमारे जवानों ने यह कर दिखाया है। गृहमंत्री ने कहाकि समस्या को बनाए रखना या कंट्रोल में रखना सुरक्षा का दृष्टिकोण नहीं हो सकता, बल्कि समस्या को समूल समाप्त करना ही सुरक्षा का दृष्टिकोण हो सकता है।
अमित शाह ने कहाकि अब घुसपैठ केलिए भी बीएसएफ को इसी दृढ़ता केसाथ आगे बढ़ना चाहिए। गृहमंत्री ने कहाकि वाइब्रेंट विलेजेज-1 और वाइब्रेंट विलेजेज -2 सीमा सुरक्षा बल के सहयोग से लोकतांत्रिक तरीके से चलाया गया विकास कार्यक्रम है। बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र को 15 किलोमीटर से बढ़ाकर हमने 50 किलोमीटर किया है और पश्चिम बंगाल सरकार को जो भूमि देनी थी, उसका निर्णय भी हो चुका है। अमित शाह ने कहाकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उच्चशक्ति प्राप्त जनसांख्यिकी मिशन की घोषणा की है और जल्दी ही इसकी कमेटी बनाकर काम शुरू हो जाएगा। उन्होंने कहाकि बीएसएफ का 60वां वर्ष एक स्मार्ट बॉर्डर बनाने और बीएसएफ के जवानों के कल्याण का भी वर्ष है। अमित शाह ने कहाकि दो महीने के अंदर ही मोदी सरकार बीएसएफ और सीएपीएफ के जवानों के कल्याण केलिए एक बहुत बड़ा कार्यक्रम लाएगी, इसके बाद हमारे जवान सुनिश्चित होकर सीमाओं की सुरक्षा कर सकेंगे और उनके परिवारजनों की चिंता भारत सरकार का गृह मंत्रालय करेगा। गृहमंत्री ने जानकारी दीकि नारकोटिक्स के खिलाफ भी हम देश में एक बहुत बड़ा अभियान चलाने जा रहे हैं और इसमें भी सीमा सुरक्षा बल की बहुत अहम भूमिका होगी।
गृहमंत्री अमित शाह ने कहाकि बीएसएफ़ की सतर्कता से दोनों तरफ की सूचनाएं एकत्रितकर नारकोटिक्स के खिलाफ लड़ाई में भी इस बल का बहुत बड़ा योगदान है। उन्होंने कहाकि आने वाले तीन-चार साल सीमा सुरक्षा में संपूर्ण बदलाव के वर्ष होंगे। उन्होंने कहाकि तकनीकी सहायता मिलने से जवानों की जिम्मेदारी कम नहीं होती, बल्कि बढ़ती है। अमित शाह ने कहाकि तकनीक को आत्मसातकर, स्थानीय लोगों से संवाद प्रस्थापितकर, स्थानीय प्रशासन से तालमेल बढ़ाते हुए हमें देश को घुसपैठ से मुक्त करने का लक्ष्य हासिल करना है। इस अवसर पर निदेशक आसूचना ब्यूरो, सचिव सीमा प्रबंधन और सीमा सुरक्षा बल के महानिदेशक भी उपस्थित थे।

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