स्वतंत्र आवाज़
word map

आत्मनिर्भर रक्षा विनिर्माण देश की शक्ति-रक्षामंत्री

एनआईबीई ग्रुप के रक्षा विनिर्माण परिसर का शिरडी में उद्घाटन किया

रॉकेट प्रक्षेपण प्रणाली 'सूर्यस्त्र' को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Monday 25 May 2026 12:17:55 PM

the 'suryastra' rocket launch system was flagged off.

शिरडी (मुंबई)। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा हैकि यह नया भारत है, जहां निजी उद्योग केवल कलपुर्जों के आपूर्तिकर्ता ही नहीं हैं, बल्कि अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों का नवप्रवर्तक और निर्माता बनकर उभर रहे हैं। उन्होंने कहाकि जब सरकार की दूरदृष्टि निजी क्षेत्र के नवाचार से मिलती है, तभी राष्ट्र नई ऊंचाइयों को छूता है। उन्होंने यह बात निजी क्षेत्र की कंपनी एनआईबीई ग्रुप के रक्षा विनिर्माण परिसर का शिरडी में उद्घाटन करते हुए कही। उन्होंने कहाकि जो राष्ट्र अपने हथियार स्वयं बनाता है, वह अपना भविष्य स्वयं लिखता है। रक्षामंत्री ने कहाकि आजकी दुनिया में 'सुरक्षा' और 'अर्थव्यवस्था' को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता, क्योंकि एक मजबूत अर्थव्यवस्था एक सशक्त सेना तथा आधुनिक रक्षा क्षमताओं की नींव होती है। उन्होंने कहाकि राष्ट्रीय सुरक्षा निवेश, औद्योगिक विकास और समग्र विकास केलिए अनुकूल एक स्थिर वातावरण बनाती है, हालांकि हम वर्तमान में व्यापार और आपूर्ति श्रृंखलाओं से दुर्लभ खनिजों तक लगभग हर चीज के शस्त्रीकरण को देख रहे हैं।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहाकि ऐसे समय में हम अपनी रक्षा उत्पादन आवश्यकताओं केलिए दूसरों पर निर्भर नहीं रह सकते, रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता केवल युद्ध की आवश्यकता नहीं है, बल्कि शांति, विकास और आर्थिक स्थिरता केलिए अनिवार्य है। उन्होंने कहाकि यह अत्याधुनिक परिसर उन्नत तोपखाने प्रणालियों, मिसाइल एवं अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, रॉकेट प्रणालियों, ऊर्जावान सामग्री व स्वायत्त रक्षा प्लेटफार्मों के निर्माण केलिए विकसित किया गया है। रक्षामंत्री ने कार्यक्रम के अंतर्गत भारत की पहली 300 किलोमीटर की सार्वभौमिक रॉकेट प्रक्षेपण प्रणाली 'सूर्यस्त्र' को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके लिए एक मिसाइल परिसर की आधारशिला भी रखी। स्वदेशी टीएनटी संयंत्र प्रौद्योगिकी, आरडीएक्स संयंत्र प्रौद्योगिकी और नवीकरणीय जैव ऊर्जा संपीड़ित बायोगैस संयंत्र का अनावरण किया गया। उपग्रह संयोजन के क्षेत्रमें एनआईबीई समूह और ब्लैक स्काई केबीच एक समझौता भी हुआ। रक्षामंत्री ने गोला-बारूद उत्पादन में आत्मनिर्भरता के महत्व पर जोर दिया और विश्वास जतायाकि यह परिसर रक्षा बलों की परिचालन संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने तथा देश के औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में सहायक होगा।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहाकि रक्षा उत्पादन, जो पहले मुख्य रूपसे सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों और आयुध कारखानों तक सीमित था, वह नरेंद्र मोदी सरकार ने निजी क्षेत्र केलिए खोल दिया है। उन्होंने कहाकि हमने निजी क्षेत्रकी क्षमताओं को पहचाना है, क्योंकि यह भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र में बदल सकता है। राजनाथ सिंह ने कहाकि भविष्य के युद्धों का परिणाम देश की सैन्य शक्ति के आकार से नहीं, बल्कि गोला-बारूद और स्वचालन के क्षेत्रमें उसकी प्रगति एवं क्षमताओं से निर्धारित होगा। उन्होंने कहाकि इसकी झलक रूस-यूक्रेन संघर्ष और पश्चिम एशिया की स्थिति में देखी जा सकती है एवं भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान यह क्षमता प्रदर्शित की थी। रक्षामंत्री ने बतायाकि भारत के निजी उद्योगों को भविष्य के युद्ध की बारीकियों की गहरी समझ है और वे देश को अत्याधुनिक प्रणालियों से लैस करने केलिए अथक प्रयास कर रहे हैं। राजनाथ सिंह ने भारत को गोला-बारूद व स्वचालन के वैश्विक केंद्र में बदलने केलिए हितधारकों के संयुक्त प्रयासों का आह्वान किया। उन्होंने कहाकि सरकार महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों और उन्नत प्रणालियों में 'मेक इन इंडिया' को लगातार बढ़ावा दे रही है।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहाकि हम गोला-बारूद और स्वचालित प्रणालियों में भारत को अग्रणी बनाने केलिए हर आवश्यक कदम उठाने को तैयार हैं। राजनाथ सिंह ने कहाकि प्रौद्योगिकी का मूल उद्देश्य सैनिकों की क्षमताओं को कम करना नहीं, बल्कि उन्हें और अधिक सशक्त बनाना है। रक्षामंत्री ने कहाकि अंतिम निर्णय हमेशा मानव हाथों में ही रहना चाहिए, आधुनिक हथियार प्रणालियां और स्वचालित तकनीकें भविष्य के युद्धों में निर्णायक भूमिका निभा रही हैं, इसलिए भारत केलिए इस दिशामें तेजीसे आगे बढ़ना अत्यंत आवश्यक है। राजनाथ सिंह ने देशवासियों और रक्षा उद्योग का आह्वान करते हुए कहाकि हमसब मिलकर रक्षा और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्रमें भारत को पूर्णतः आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प लें और रक्षा कंपनियों से भारत की सामरिक एवं तकनीकी क्षमताओं को और मजबूत बनाने का आग्रह किया। रक्षामंत्री ने इस एक दशक में रक्षा मंत्रालय के प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए कहाकि साहसिक नीतिगत सुधार, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के उदारीकरण, रणनीतिक साझेदारी मॉडल की शुरुआत, सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियों की अधिसूचना और इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सीलेंस, एसिंग डेवलपमेंट ऑफ इनोवेटिव टेक्नोलॉजीज विद आईडेक्स तथा टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड जैसी योजनाओं के शुभारंभ से युवा नवप्रवर्तकों को प्रोत्साहन मिल रहा है।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहाकि आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया में निजी क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, क्योंकि वीर सैनिक घरेलू उद्योग की शक्ति के बल पर राष्ट्रीय हितों की रक्षा कर रहे हैं। राजनाथ सिंह ने कहाकि एक समय था, जब रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र का योगदान नगण्य था और अब यह लगभग 25-30 प्रतिशत तक पहुंच गया है। राजनाथ सिंह ने कहाकि आज जिन संयंत्रों का उद्घाटन किया गया है, वे अनुसंधान उन्मुख केंद्र बनने केलिए तैयार हैं, इनसे भारत की रक्षा क्षमताओं को और मजबूती मिलेगी। उन्होंने आशा व्यक्त कीकि यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चिंग सिस्टम केलिए बना मिसाइल कॉम्प्लेक्स भारत की भविष्य की युद्ध क्षमताओं को नई दिशा प्रदान करेगा। उन्होंने कहाकि स्वदेशी तकनीक से संचालित रॉकेट प्रणाली हमारी मारक क्षमता को कई गुना बढ़ा देगी, यह रणनीतिक रूपसे निर्णायक साबित होगी। रक्षामंत्री ने इस बात की सराहना कीकि यह परिसर न केवल उच्च प्रौद्योगिकी उद्योगों, बल्कि लघु मध्यम उद्यमों, छोटे पैमाने के उद्योगों और स्थानीय अर्थव्यवस्था केलिए भी विशाल पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करेगा। उन्होंने आशा व्यक्त कीकि गोला-बारूद, मिसाइलों, रॉकेट प्रणालियों और उपग्रह घटकों का उत्पादन सहायक इकाइयों, आपूर्तिकर्ताओं और विक्रेताओं को रोज़गार प्रदान करेगा एवं इस क्षेत्रके युवाओं को अत्याधुनिक तकनीकी कौशल से सशक्त बनाया जाएगा, जिससे वे राष्ट्र निर्माण में योगदान दे सकेंगे।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस भी इस अवसर पर उपस्थित थे। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया पहल से देश की रक्षा तैयारियों को मजबूत करने में केंद्र सरकार के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को भारतीय सैनिकों की अद्वितीय वीरता और देश की बढ़ती स्वदेशी रक्षा क्षमताओं का एक उत्कृष्ट उदाहरण बताया। मुख्यमंत्री ने कहाकि सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्रों की सक्रिय व समान भागीदारी से भारत के रक्षा तंत्र में परिवर्तन आया है और यह राष्ट्रीय हितों की रक्षा केलिए रक्षा बलों को निरंतर मजबूती प्रदान करता रहेगा। उन्होंने कहाकि भारत अपनी रणनीतिक शक्ति को बढ़ाते हुए वैश्विक शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने में रचनात्मक भूमिका निभा रहा है। कार्यक्रम में लघु मध्यम उद्यमों की रक्षा क्षमताओं का प्रदर्शन और उद्योग जगत के नेताओं तथा रक्षा क्षेत्र के हितधारकों में संवाद हुआ। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, महाराष्ट्र सरकार के उद्योग मंत्री उदय सामंत, जल संसाधन मंत्री राधाकृष्ण ई विखेपाटिल, रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ समीर वी कामत, वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, रणनीतिक साझेदार और उद्योग जगत के हितधारक भी कार्यक्रम में उपस्थित थे।

हिन्दी या अंग्रेजी [भाषा बदलने के लिए प्रेस F12]