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भारत में कृषि में ग्लोबल लीडर बनने की क्षमता

ओम बिरला का आत्मनिर्भर कृषि मॉडल विकसित करने का आह्वान

'सतत कृषि नवाचार और अनुसंधान विकसित भारत की आधारशिला'

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Sunday 14 June 2026 04:46:42 PM

om birla in national conference on sustainable agriculture

नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा हैकि पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक के प्रभावी समन्वय से भारत वैश्विक कृषि नेतृत्वकर्ता के रूपमें उभरने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहाकि सतत कृषि, नवाचार और अनुसंधान ‘विकसित भारत@2047’ के संकल्प को साकार करने के प्रमुख आधार हैं। उन्होंने कहाकि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की यात्रा उसके खेतों, किसानों और गांवों से होकर गुजरती है। ओम बिरला ‘विकसित भारत@2047 केलिए सतत कृषि: परंपरा, प्रौद्योगिकी और ठोस परिणाम’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। यह सम्मेलन नई दिल्ली में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सहयोग से आयोजित कर रहा है।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहाकि भारत में कृषि केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि देश की संस्कृति, सभ्यता और जीवन दर्शन का अभिन्न अंग है। उन्होंने कहाकि खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने, ग्रामीण समृद्धि को बढ़ावा देने, सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करने और समावेशी विकास को गति देने में कृषि की केंद्रीय भूमिका है। उन्होंने कहाकि भारत के गांव उसकी वास्तविक शक्ति हैं और किसान देश की अर्थव्यवस्था केसाथ सामाजिक संरचना के भी आधार स्तंभ हैं। जलवायु परिवर्तन तथा वैश्विक परिस्थितियों में होरहे तीव्र बदलावों से उत्पन्न चुनौतियों का उल्लेख करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने कहाकि वर्तमान समय में विज्ञान आधारित अनुसंधान संचालित और नवाचार केंद्रित कृषि की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। उन्होंने कहाकि पारंपरिक कृषि ज्ञान और अत्याधुनिक तकनीकों का समन्वय ही ऐसे कृषि पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण कर सकता है, जो टिकाऊ, लाभकारी और भविष्य की चुनौतियों केप्रति सक्षम हो।
ओम बिरला ने कृषि विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों, वैज्ञानिकों और नवप्रवर्तकों को भारत के कृषि भविष्य का प्रमुख आधार बताते हुए कहाकि ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा विश्लेषण और डिजिटल खेती जैसी उन्नत तकनीकें कृषि को अधिक सटीक, दक्ष और उत्पादक बना रही हैं। उन्होंने ग्रामीण विकास को गति प्रदान करने तथा किसानों की आय और आजीविका में सुधार केलिए कृषि आधारित उद्योगों, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों और कृषि स्टार्टअप्स के विस्तार पर भी बल दिया। पर्यावरणीय चुनौतियों पर ओम बिरला ने जल संरक्षण, सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों के प्रभावी उपयोग, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, उच्च गुणवत्ता वाले बीजों की उपलब्धता, उर्वरकों के संतुलित उपयोग, जलवायु अनुकूल फसल किस्मों के विकास के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कृषि उत्पादकता और स्थिरता को सुदृढ़ बनाने हेतु भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और वैज्ञानिक समुदाय के प्रयासों की सराहना की।
लोकसभा अध्यक्ष ने विश्वास व्यक्त कियाकि युवाओं की ऊर्जा, महिलाओं का नेतृत्व और जमीनी स्तरपर विकसित हो रहे नवाचार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और तेजगति प्रदान करेंगे। ओम बिरला ने शिक्षकों, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं और किसानों का आह्वान कियाकि वह ऐसा आत्मनिर्भर कृषि मॉडल विकसित करें, जो दीर्घकालिक समृद्धि और सतत विकास सुनिश्चित कर सके। लोकसभा अध्यक्ष ने कहाकि विकसित भारत का लक्ष्य तभी साकार होगा, जब नागरिक, शैक्षणिक संस्थान, सामाजिक संगठन और नीति निर्माता साझा दृष्टिकोण व समन्वित प्रयासों केसाथ आगे बढ़ेंगे। ओम बिरला ने आशा व्यक्त कीकि सम्मेलन के निष्कर्ष किसानों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने केसाथ भारत की आत्मनिर्भरता और विकसित राष्ट्र बनने की यात्रा को और तेजगति प्रदान करेंगे।

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