बैतूल में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय का महासम्मेलन
'आध्यात्मिक जागृति से आदिवासियों का सशक्तिकरण' पर राष्ट्रपति खुशस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Thursday 18 June 2026 05:21:12 PM
बैतूल (मध्यप्रदेश)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज बैतूल में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के ‘आध्यात्मिक जागृति द्वारा आदिवासी समाज का सशक्तिकरण’ विषयक महासम्मेलन पर खुशी व्यक्त की। जनसमुदाय को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहाकि उपभोग की संस्कृति पर आधारित आजकी तेज भागती दुनिया में समाज के हरवर्ग की आध्यात्मिक शुचिता बहुत महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने कहाकि इसीके बल पर दीर्घकालिक रूपसे समतापरक आचरण पद्धति और प्राकृतिक संपदाओं केप्रति संवेदनशील जीवनशैली विकसित की जा सकती है। राष्ट्रपति ने कहाकि आजके तनाव और युद्ध से त्रस्त विश्व में इसकी आवश्यकता अतीत के किसीभी कालखंड की तुलना में और अधिक हो गई है, ऐसे परिदृश्य में ‘आध्यात्मिक जागृति द्वारा आदिवासी समाज का सशक्तिकरण’ जैसे महासम्मेलनों का महत्व और भी बढ़ जाता है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहाकि जनजातीय समुदाय की जीवनशैली सहज रूपसे ही अध्यात्म की मूलभूत प्रेरणाओं के निकट होती है और प्राकृतिक सम्पदाओं से जुड़ाव उनकी वह सहज शक्ति है, जो सर्वमंगलकारी सोच और कार्यनीति को जीवन के हर आयाम में सामने लाती है। राष्ट्रपति को यह जानकर प्रसन्नता हुईकि ब्रह्माकुमारी के जरिए आदिवासी अध्यात्म केप्रति भी जागरुक हो रहे हैं, इस दृष्टि से ब्रह्माकुमारी संस्थान देश के अनेक हिस्सों में जनजातीय समाज केसाथ मिलकर लंबे समय से अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। राष्ट्रपति ने कहाकि भारतीय जीवन दृष्टि के अनुसार कार्यरत प्रत्येक संस्था को इस बात का सदैव ध्यान रखना चाहिएकि समाज के किसीभी वर्ग का सशक्तिकरण केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं हो सकता, वास्तविक सशक्तिकरण तब होता है, जब व्यक्ति आत्मविश्वास, आत्मसम्मान और जागरुकता से सामाजिक दायित्वबोध केसाथ अपने कार्यक्षेत्र में सक्रिय होता है।
राष्ट्रपति ने कहाकि आध्यात्मिक जागृति व्यक्ति को उसकी आंतरिक शक्तियों का अनुभव कराती है और साथही उसे सकारात्मक सोच और जीवन के उच्च उद्देश्यों से जोड़ती है। राष्ट्रपति ने कहाकि विकास और पारम्परिक मूल्यों का संतुलन ही एक सशक्त एवं समृद्ध समाज का आधार है। उन्होंने कहाकि सार्थक विकास वह है, जो हमारी जड़ों और जीवन मूल्यों से पोषण भी ग्रहण करे तथा उन जड़ों को मजबूत भी बनाए। राष्ट्रपति ने कहाकि हम जब ऐसी समग्र दृष्टि से काम करेंगे तभी समाज में समसरता और समता की प्रबल धारा प्रवाहित होगी, तभी हम समावेशी विकास के नए प्रतिमान स्थापित कर सकेंगे। राष्ट्रपति ने सभीसे आग्रह कियाकि सब मिलकर वर्ष 2047 तक एक ऐसे विकसित भारत के निर्माण केलिए अधिक प्रतिबद्धता के साथ कार्य करें, जहां अध्यात्म, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण और मानव कल्याण हमारे समावेशी विकास की आधारशिला बनें।