पूर्वोत्तर भारत में बादलदार के दीर्घकालिक संरक्षण की योजना
अंतर्राष्ट्रीय बादलदार चीता दिवस पर संरक्षण कार्ययोजना नवगठितस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Tuesday 4 August 2026 04:21:30 PM
नई दिल्ली। भारत ने अंतर्राष्ट्रीय बादलदार चीता दिवस पर नवगठित बादलदार चीता संरक्षण कार्ययोजना के जरिए एशिया के सबसे दुर्लभ चीतों में से एक बादलदार के संरक्षण केप्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की है। भारत सरकार-जीईएफ-यूएनडीपी की पहल केतहत तैयार की गई यह कार्ययोजना जुलाई 2026 के दूसरे सप्ताह में कोयंबटूर में राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति की 91वीं बैठक के दौरान जारी की गई थी। यह कार्ययोजना इस नस्ल के संरक्षण केलिए इनके आवासों को सुरक्षित करने, वन संपर्क को बहाल करने, वैज्ञानिक निगरानी को दुरुस्त करने और स्थानीय समुदायों को इसके संरक्षण केप्रति जागरुक बनाने हेतु एक व्यापक ढांचा प्रदान करती है। संरक्षण कार्ययोजना पूर्वोत्तर भारत में बादलदार चीते के दीर्घकालिक संरक्षण को मजबूत करने वाला एक महत्वपूर्ण कदम है। यह योजना इस प्रजाति और उसके आवासों की रक्षा केलिए भूभाग स्तरपर संरक्षण, वैज्ञानिक मूल्यांकन, सामुदायिक भागीदारी और प्रौद्योगिकी आधारित कार्यक्रमों पर केंद्रित है।
बादलदार चीता संरक्षण कार्ययोजना का एक प्रमुख घटक पूर्वोत्तर भारत में 14 प्राथमिकता प्राप्त संरक्षण क्षेत्रों की पहचान करना है, साथही वन आवासों केबीच संपर्क को मजबूत करने केलिए भूभागीय आवास बहाली और गलियारा संरक्षण करना है। सरकार ने एकीकृत वन्यजीव आवास विकास योजना के प्रजाति पुनर्प्राप्ति कार्यक्रम केतहत बादलदार चीता प्रजाति को शामिल करके इसके संरक्षण केलिए संस्थागत ढांचे को भी मजबूत किया है। सीएपी कैमरा ट्रैप, ऑक्यूपेंसी सर्वे, जेनेटिक्स और एनवायरनमेंटल डीएनए से मानकीकृत वैज्ञानिक निगरानी प्रदान करता है, जिससे प्रजातियों और उनकी आवास संबंधी आवश्यकताओं की बेहतर समझ विकसित होती है। यह अवैध शिकार विरोधी उपायों और वन्यजीव अपराध की रोकथाम को मजबूत करने पर भी जोर देता है। जमीनी स्तरपर काम करने वाले कर्मचारियों की क्षमता निर्माण एक महत्वपूर्ण घटक है, जिसमें संरक्षण प्रयासों को मजबूत करने केलिए एम-स्ट्राइप्स स्मार्ट एप्लिकेशन का उपयोग शामिल है।
वन्यजीव संरक्षण में स्थानीय समुदायों की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए यह कार्ययोजना समुदाय आधारित संरक्षण और सतत आजीविका सहायता को बढ़ावा देती है। यह प्रजाति के संपूर्ण क्षेत्रमें समन्वित संरक्षण केलिए पड़ोसी देशों केसाथ सीमापार सहयोग को भी प्रोत्साहित करती है। सीएपी संरक्षण नियोजन में जलवायु अनुकूलनशीलता और अनुकूली प्रबंधन को और एकीकृत करती है, जिससे बादलदार चीता के आवासों और भूदृश्यों की दीर्घकालिक स्थिरता मजबूत होती है। बादलदार चीते का संरक्षण पूर्वोत्तर भारत के जंगलों और प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण से अभिन्न रूपसे जुड़ा हुआ है। संरक्षण कार्ययोजना से भारत चीते की इस अद्भुत नस्ल के भविष्य को सुरक्षित करने केलिए पर्यावास संरक्षण, वैज्ञानिक निगरानी, भूदृश्य पुनर्स्थापन, प्रौद्योगिकी का उपयोग, सामुदायिक भागीदारी और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग केसाथ एक समन्वित दृष्टिकोण को बढ़ावा दे रहा है।