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राष्ट्र सेवा को समर्पित भारत रणभूमि दर्शन अभियान

सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने अभियान को झंडी दिखाकर रवाना किया

इस अभियान की राष्ट्रीय महत्वता और रणनीतिक पहुंच बहुत सराहनीय

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Thursday 26 February 2026 02:13:01 PM

bharat battlefield darshan campaign dedicated to the service of the nation

नई दिल्ली। भारतीय थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक दिल्ली में विशिष्ट नागरिक और रक्षा गणमान्यों की उपस्थिति में भारत रणभूमि दर्शन अभियान को झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अभियान का नेतृत्व भारतीय सेना की तोपखाना रेजिमेंट ने किया। सेना प्रमुख ने इस अवसर पर इसकी राष्ट्रीय महत्वता और रणनीतिक पहुंच की सराहना की। उन्होंने कहाकि ऐसे प्रयास भारत की समृद्ध विरासत को संरक्षित करते हैं और वर्तमान एवं भावी पीढ़ियों को राष्ट्र सेवा के सर्वोच्च आदर्शों को बनाए रखने केलिए प्रेरित करते हैं। इस अभियान ने रणभूमि दर्शन पहल को भी बढ़ावा दिया और ऐतिहासिक रूपसे महत्वपूर्ण युद्धक्षेत्रों और सीमावर्ती क्षेत्रों पर राष्ट्रीय ध्यान आकर्षित किया, जो भारत की सुरक्षा रणनीति का आधार हैं।
भारत रणभूमि दर्शन अभियान का सफल समापन सशस्त्र बलों की अतीत का सम्मान करने, वर्तमान से जुड़ने और भविष्य को प्रेरित करने की अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण है, जो भारत के वीर बलिदानों को एक सुरक्षित, एकजुट और गतिशील भविष्य की आकांक्षाओं से जोड़ता है। गुजरात के तटीय शहर द्वारका से 3 फरवरी 2026 को आरंभ हुई 3400 किलोमीटर लंबी एसयूवी यात्रा ने गुजरात और राजस्थान के प्रमुख युद्धक्षेत्रों और अग्रिम क्षेत्रों को पार किया, जिनमें कच्छ का रण और थार रेगिस्तान भी शामिल थे। यह यात्रा राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर समाप्त हुई। इस यात्रा मार्ग में द्वारका, भुज, कच्छ का रण, मुनाबाओ, गडरा, लोंगेवाला, जैसलमेर, बीकानेर, अंबाला और नई दिल्ली शामिल थे। यह यात्रा सीमावर्ती सड़कों और पगडंडियों से गुजरी, जिससे दूरस्थ सीमावर्ती क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी का प्रदर्शन हुआ और परिचालन तत्परता तथा आम नागरिकों की पहुंच दोनों को सुगम बनाने वाले उन्नत बुनियादी ढांचे को रेखांकित किया गया।
रणभूमि दर्शन अभियान के 35 सदस्यीय दल में तोपखाना रेजिमेंट के तोपची, भारतीय नौसेना और सीमा सुरक्षा बल के जवान शामिल थे। यह अभियान सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंच और राष्ट्रीय एकता की राष्ट्रीय दृष्टि के अनुरूप था। यात्रा के दौरान दल ने पश्चिमी मोर्चे पर प्रमुख युद्ध स्मारकों और ऐतिहासिक युद्ध स्थलों पर श्रद्धांजलि अर्पित की और देश की सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीरों को नमन किया। यह अभियान वीर नारियों, वीरंगनाओं, पूर्व सैनिकों, एनसीसी कैडेटों, छात्रों और सीमावर्ती क्षेत्रों के निवासियों केसाथ जुड़ने का एक सशक्त माध्यम भी साबित हुआ। प्रत्येक पड़ाव पर नागरिक अधिकारियों और स्थानीय समुदायों के स्नेह और सम्मान ने सुरक्षा बलों और उनके द्वारा संरक्षित नागरिकों केबीच गहरे बंधन को प्रदर्शित किया।

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