डिजिलॉकर की ऑस्ट्रेलियाई शिक्षा प्रतिनिधियों के संघ केसाथ साझेदारी
शैक्षणिक दस्तावेजों का अब सुरक्षित कागजरहित और आसान सत्यापनस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Saturday 8 August 2026 02:56:45 PM
नई दिल्ली। विश्व के देशों में पढ़ाई करने के इच्छुक भारतीय छात्रों को एक बड़ी खुशखबरी देते हुए केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिवीजन ने भारत में ऑस्ट्रेलियाई शिक्षा प्रतिनिधियों के संघ से साझेदारी करके 'एएईआरआई वेरीफाई' की शुरुआत कर दी है। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म डिजिलॉकर केसाथ एकीकृत ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों में आवेदन करने वाले छात्रों केलिए शैक्षणिक, पहचान, वित्तीय दस्तावेजों के सुरक्षित, कागजरहित और सहमति आधारित सत्यापन को सक्षम बनाएगा। इसका अनावरण कल नई दिल्ली में एएईआरआई वार्षिक सम्मेलन में किया गया। एएईआरआई और राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिवीजन के सहयोग से लॉंच 'एएईआरआई वेरीफाई' एक स्रोत सत्यापित प्रमाणीकरण प्लेटफॉर्म है, जिसे ऑस्ट्रेलियाई उच्च शिक्षा संस्थानों केलिए छात्र प्रमाण पत्र जांच को सुव्यवस्थित करने केलिए डिज़ाइन किया गया है।
डिजिलॉकर को 'एएईआरआई वेरीफाई' प्लेटफॉर्म केसाथ एकीकृत करके छात्र विश्वसनीय स्रोतों से सीधे प्रामाणिक, सत्यापित डिजिटल दस्तावेज़ सुरक्षित रूपसे साझा कर सकते हैं, जिससे भौतिक दस्तावेजों और मैन्युअल सत्यापन प्रक्रियाओं पर निर्भरता कम हो जाती है। हालही में शुरू डिजिटल वर्कफ़्लो धीमी, मैन्युअल दस्तावेज़ सत्यापन प्रक्रिया को दो रणनीतिक चरणों में विभाजित एक सुरक्षित ढांचे से बदल देता है-पहले चरण में छात्र सत्यापन-विश्वविद्यालय में आवेदन प्रक्रिया शुरू होने से पहले सुचारू रूपसे संपन्न किया जाता है। दूसरे चरण में प्रायोजक जांच-वित्तीय प्रामाणिकता को सत्यापित करने केलिए छात्र को प्रवेश प्रस्ताव प्राप्त होने के तुरंत बाद शुरू की जाती है। छात्र की स्पष्ट सहमति से डिजिलॉकर ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों को मूल जारीकर्ता अधिकारियों से डिजिटल रूपसे हस्ताक्षरित रिकॉर्ड तक सीधी पहुंच प्रदान करता है। इससे धोखाधड़ी का खतरा समाप्त हो जाता है, डेटा की पूर्ण गोपनीयता सुनिश्चित होती है और आवेदन प्रक्रिया में लगने वाला समय काफी कम हो जाता है।
राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिवीज़न के निदेशक जेएल गुप्ता ने इस पहल के बारेमें कहाकि यह दर्शाती हैकि भारत का डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना किस प्रकार वास्तविक वैश्विक चुनौतियों का समाधान कर रहा है। उन्होंने कहाकि डिजिलॉकर को एएईआरआई वेरिफाई केसाथ एकीकृत करके हम एक सुरक्षित, कागजरहित और विश्वसनीय ढांचा प्रदान कर रहे हैं, जो हमारे छात्रों केलिए संपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय प्रवेश प्रक्रिया को सरल बनाता है। जेएल गुप्ता ने भारत के डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के संचालन में राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिवीज़न की मूलभूत भूमिका को प्रदर्शित करते हुए एक विस्तृत प्रस्तुति भी दी। वर्ष 2009 में प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत स्थापित स्वतंत्र व्यावसायिक प्रभाग के रूपमें कार्यरत राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिवीज़न व्यापक परियोजना प्रबंधन, नीति निर्माण और तकनीकी मूल्यांकन में सहयोग प्रदान करता है। राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिवीज़न प्रौद्योगिकी प्लेटफार्मों के एक व्यापक नेटवर्क का प्रबंधन करता है, जो भारतीय सरकारी तंत्र में विभिन्न पहलुओं को आपस में जोड़ता है।
राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिवीज़न प्लेटफॉर्म विभिन्न वैधानिक संगठनों में सार्वजनिक कार्यप्रवाहों का समर्थन करता है, इनमें संघ लोकसेवा आयोग, विदेश मंत्रालय, नीति आयोग आदि शामिल हैं। डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग के अंतर्गत डिजिलॉकर नागरिकों को अधिकृत संगठनों से सीधे जारी किए गए प्रामाणिक डिजिटल दस्तावेजों को सुरक्षित रूपसे संग्रहीत करने, साझा करने और सत्यापित करने का एक सुरक्षित, सहमति आधारित वॉलेट प्रदान करता है। डिजिटल इंडिया कार्यक्रम केतहत विकसित डिजिलॉकर वर्तमान में 72 करोड़ से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ताओं को सेवा प्रदान कर रहा है और अधिकृत संस्थानों से जारी डिजिटल रूपसे हस्ताक्षरित दस्तावेजों को सुरक्षित जारी करने, भंडारण, साझाकरण और वास्तविक समय सत्यापन को सक्षम बनाता है। यह साझेदारी भारत की वैश्विक शिक्षा पारिस्थितिकी तंत्र में विस्तारित करने की दिशामें महत्वपूर्ण मानी जा रही है।