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'भारत में कौशल विकास में परिवर्तनकारी बदलाव'

मुंबई में रतन टाटा कौशल विश्वविद्यालय का प्रथम दीक्षांत समारोह

उपराष्ट्रपति का नई युग की प्रौद्योगिकी को अपनाने का आह्वान

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Sunday 22 March 2026 12:20:40 PM

first convocation ceremony of ratan tata skill university in mumbai

मुंबई। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने मुंबई में रतन टाटा महाराष्ट्र राज्य कौशल विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में स्नातक छात्रों को कौशल विकास, रोज़गार-योग्यता तथा आधुनिक प्रौद्योगिकी के महत्व पर संबोधन किया। उपराष्ट्रपति ने कहाकि यह दीक्षांत समारोह न केवल शैक्षणिक उपलब्धि का उत्सव है, बल्कि कुशल मानव पूंजी का वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में भारत की यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव भी है। उत्तीर्ण विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहाकि विश्वविद्यालय के पहले बैच का हिस्सा बनकर उन्होंने इतिहास रच दिया है। महाराष्ट्र और अन्य राज्यों के राज्यपाल के रूपमें अपने कार्यकाल को याद करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहाकि विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों को आधुनिक चुनौतियों का सामना करने और शिक्षा को उद्योग की ज़रूरतों के अनुरूप बनाने केलिए पाठ्यक्रम को लगातार अपडेट करते रहना चाहिए।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहाकि डिग्रियां तभी सार्थक होती हैं, जब वे रोज़गार के अवसर में बदलती हैं। उन्होंने कौशल विकास और नई युग की प्रौद्योगिकी पर अधिक ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया। उपराष्ट्रपति ने कहाकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने कौशल विकास और मानव पूंजी के विकास केप्रति अपने दृष्टिकोण में एक परिवर्तनकारी बदलाव देखा है। उन्होंने स्किल इंडिया, पीएम सेतु, डिजिटल हब, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय की स्थापना और व्यावसायिक प्रशिक्षण में सुधार जैसी प्रमुख पहलकदमियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहाकि इन प्रयासों ने भविष्य केलिए भारत की युवा पीढ़ी को तैयार करने के तरीके को पुनर्परिभाषित किया है। उपराष्ट्रपति ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस के दृष्टिकोण की भी सराहना की और कहाकि अब यह राज्य दुनिया की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं केसाथ प्रतिस्पर्धा कर रहा है। भारत के जनसांख्यिकीय लाभ की बात करते हुए उन्होंने कहाकि भारत की युवा आबादी अगर सही ढंग से कुशल हो तो वह एक बड़ी ताकत बन सकती है और अगर उन्हें सही कौशल नहीं मिला तो यह एक चुनौती भी बन सकती है।
सीपी राधाकृष्णन ने स्नातकों से आग्रह कियाकि वे जहां भी काम करें, भारत की प्रतिभा और क्षमता के दूत के रूपमें कार्य करें। उन्होंने ज़ोर दियाकि उनका समर्पण और पेशेवर रवैया विश्व में भारत की विश्वसनीयता को बढ़ाएगा। रतन टाटा की विरासत का ज़िक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहाकि विश्वविद्यालय की यह ज़िम्मेदारी हैकि वह शिक्षा और रोज़गार केबीच के अंतर को पाटे और सामाजिक रूपसे ज़िम्मेदार व्यक्तित्व निर्माण करे। उन्होंने कहाकि उद्योग को सामाजिक ज़िम्मेदारी की भावना केसाथ आगे बढ़ना चाहिए, क्योंकि इसी से महान नेता देश केलिए आदर्श बन पाते हैं। उपराष्ट्रपति ने नशे को छोड़ें अभियान भी शुरू किया और कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व पहल के तहत उद्योग भागीदारों ने लगाई प्रदर्शनी का दौरा किया। दीक्षांत समारोह में महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा, मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार, महाराष्ट्र सरकार में कौशल, रोज़गार, उद्यमिता एवं नवाचार मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा, वरिष्ठ अधिकारी, संकाय सदस्य, अभिभावक और विद्यार्थी उपस्थित थे।

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