भारत-श्रीलंका में द्विपक्षीय संबंधों का महत्वपूर्ण स्तंभ बना संसदीय सहयोग
वैश्विक अनिश्चितताओं केबीच भारत में तेज प्रगति से रू-ब-रू हुए सांसदस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Tuesday 24 March 2026 12:59:23 PM
नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से श्रीलंका की संसद में अवसंरचना और मामलों की संसदीय निगरानी समिति के अध्यक्ष एसएम मारिक्कर के नेतृत्व में एक श्रीलंकाई संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने संसद भवन नई दिल्ली में मुलाकात की। लोकसभा अध्यक्ष ने श्रीलंकाई संसदीय प्रतिनिधियों से बातचीत करते हुए कहाकि श्रीलंका, भारत का एक करीबी पड़ोसी है और दोनों देश हजारों वर्ष से चली आरही सभ्यतागत, सांस्कृतिक एवं भाषाई विरासत साझा करते हैं। ओम बिरला ने बीते दशक में भारत के सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन केबारे में उन्हें बताया और कहाकि निरंतर अनुसंधान एवं नवाचार ने भारत में मजबूत बुनियादी ढांचे के विकास को गति दी है। ओम बिरला ने भारत की ‘पड़ोसी पहले’ नीति केप्रति प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हुए अवसंरचना और संपर्क के क्षेत्रमें हुई प्रगति साथही संसदीय कार्यप्रणाली को सुदृढ़ करने में नवाचार एवं प्रौद्योगिकी की बढ़ती भूमिका की भी जानकारी साझा की।
लोकसभा अध्यक्ष ने श्रीलंकाई संसदीय प्रतिनिधियों को भारत के विकास कार्यों से रू-ब-रू कराते हुए कहाकि मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत तेजीसे प्रगति कर रहा है। ओम बिरला ने कहाकि भारत ने राज्यों को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों का व्यापक नेटवर्क विकसित किया है, बंदरगाहों और हवाई अड्डों का भी काफी विस्तार किया है, ये सभी देश की वृद्धि और विकास को गति देने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहाकि 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने के दृढ़ संकल्प केसाथ भारत दुनिया की सबसे तेजीसे बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एकके रूपमें उभरा है। उन्होंने कहाकि भारत और श्रीलंका केबीच मजबूत सहयोग से आपसी प्रगति और साझा समृद्धि को बढ़ावा मिल सकता है, बुनियादी ढांचा दोनों देशों केबीच सहयोग का एक नया क्षेत्र बन सकता है। दोनों देशों ने इन चर्चाओं में द्विपक्षीय संबंधों के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूपमें संसदीय सहयोग को मजबूत करने पर भी ध्यान केंद्रित किया, जिसमें लोकतांत्रिक संस्थानों को सुदृढ़ करने और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने केलिए विधायिकाओं केबीच व्यवस्थित आदान प्रदान पर जोर दिया गया।
ओम बिरला ने प्रतिनिधिमंडल को बतायाकि दोनों विधायिकाओं केबीच संबंधों को और ज्यादा मजबूत करने केलिए ग्यारह सदस्यीय भारत श्रीलंका संसदीय मैत्री समूह का गठन किया गया है। उन्होंने जवाबदेही और प्रभावी शासन सुनिश्चित करने में संसदीय समितियों की भूमिका पर जोर दिया। ओम बिरला ने कहाकि वसुधैव कुटुंबकम दर्शन भारत की प्रतिबद्धता है और भारत अपने मित्र पड़ोसी देशों को सहायता प्रदान करने केलिए तत्पर है। ओम बिरला ने भारतीय संसद के राष्ट्रमंडल अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन में श्रीलंका की संसद के अध्यक्ष केसाथ अपनी मुलाकात को स्नेहपूर्वक याद किया। उन्होंने कहाकि सम्मेलन बेहद सफल रहा, इसमें नवाचारों और राष्ट्रमंडल देशों की संसदों के समक्ष आनेवाले चुनौतियों पर सार्थक चर्चा हुई। उन्होंने कहाकि 28वें सीएसपीओसी में राष्ट्रमंडल देशों के प्रतिनिधियों की अबतक की सबसे अधिक भागीदारी देखी गई, जिसने इसे एक ऐतिहासिक मंच बना दिया। प्रतिनिधिमंडल आवास और शहरी कार्य संसदीय समिति और भारत-श्रीलंका संसदीय मैत्री समूह से मिला।