डॉ भीमराव आंबेडकर आधुनिक भारत के महानतम निर्माता-उपराष्ट्रपति
आंबेडकर जयंती पर डॉ आंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में अर्पित की पुष्पांजलिस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Wednesday 15 April 2026 02:22:59 PM
नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने ‘राष्ट्र निर्माता के रूपमें डॉ आंबेडकर: विकसित भारत की ओर मार्ग’ विषय पर डॉ आंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र दिल्ली में द्वितीय डॉ आंबेडकर स्मृति व्याख्यान दिया। इससे पहले उन्होंने भारतरत्न डॉ भीमराव रामजी आंबेडकर की जयंती पर डॉ आंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में स्थापित उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। उपराष्ट्रपति ने आंबेडकर जयंती, तमिल नववर्ष और बैसाखी की शुभकामनाएं देते हुए कहाकि यह अवसर भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता और एकता को दर्शाता है। उन्होंने बाबासाहेब डॉ भीमराव रामजी आंबेडकर को आधुनिक भारत के महानतम निर्माताओं में से एक और सच्चे राष्ट्र निर्माता के रूपमें वर्णित किया, जिनके योगदान से गणतंत्र का मार्गदर्शन होता रहता है। उपराष्ट्रपति ने व्याख्यान श्रृंखला केलिए सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की सराहना की और कहाकि ऐसी पहलें युवा पीढ़ी को लोकतांत्रिक आदर्शों और संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखने केलिए प्रेरित करेंगी। उन्होंने कहाकि यह व्याख्यान राष्ट्र की नैतिक और बौद्धिक नींव से पुनः जुड़ने का अवसर प्रदान करता है।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने डॉ आंबेडकर की जीवन यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहाकि अपार कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने दृढ़ता, विद्वत्ता और न्याय केप्रति प्रतिबद्धता से चुनौतियों को अवसरों में परिवर्तित किया। उन्होंने कहाकि बाबासाहेब का दृढ़ विश्वास थाकि शिक्षा सामाजिक परिवर्तन की कुंजी है और उनका मानना थाकि सच्ची स्वतंत्रता शिक्षा से ही शुरू होती है। उपराष्ट्रपति ने डॉ भीमराव आंबेडकर की बौद्धिक प्रतिभा को रेखांकित करते हुए उनकी महत्वपूर्ण रचना ‘रुपये की समस्या’ और औपनिवेशिक आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाने के उनके साहस का उल्लेख किया। उन्होंने कहाकि उन्होंने यह सिद्ध किया थाकि ज्ञान और बुद्धिमत्ता सबसे शक्तिशाली प्रणालियों को भी चुनौती दे सकती है। संविधान के निर्माण में डॉ आंबेडकर की महत्वपूर्ण भूमिका का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहाकि व्यापक विचार-विमर्श में अपने नेतृत्व से उन्होंने न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व पर आधारित एक समावेशी भारत की नींव रखी। उपराष्ट्रपति ने भारत के संविधान को विश्व के सबसे व्यापक लोकतांत्रिक संविधानों में से एक बताया।
संवैधानिक नैतिकता के महत्व पर उपराष्ट्रपति ने राज्यसभा के सभापति के रूपमें अपनी भूमिका पर कहाकि लोकतांत्रिक संस्थाओं को संवाद, वाद-विवाद और रचनात्मक चर्चा से कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहाकि संसदीय चर्चा से व्यवधान के बजाय निर्णय निकलने चाहिएं। उपराष्ट्रपति ने सूचित तथा सम्मानजनक भागीदारी की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने राजनीतिक लोकतंत्र केसाथ सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र के बारेमें डॉ आंबेडकर के दृष्टिकोण की चर्चा की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में समावेशी विकास, वित्तीय सशक्तिकरण और पिछड़े क्षेत्रों के उत्थान की विभिन्न पहलों का उल्लेख करते हुए कहाकि ऐसे प्रयास डॉ भीमराव आंबेडकर के आदर्शों के अनुरूप हैं। उन्होंने लैंगिक समानता पर डॉ आंबेडकर के प्रगतिशील दृष्टिकोण को रेखांकित करते हुए समाज की प्रगति के मापदंड के रूपमें महिला सशक्तिकरण पर उनके महत्व का स्मरण किया। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रोंमें महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और उपलब्धियों तथा महिला नेतृत्व वाले विकास को समर्थन देने वाली सरकार की पहलों पर प्रकाश डाला।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहाकि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण की आकांक्षा को पूरा करने केलिए संवैधानिक मूल्यों से निर्देशित सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने कहाकि एक विकसित भारत समावेशी, न्यायसंगत, नवोन्मेषी और लोकतांत्रिक सिद्धांतों पर आधारित होना चाहिए। उपराष्ट्रपति ने डॉ भीमराव आंबेडकर के जीवन से जुड़े पंचतीर्थों के विकास पर प्रकाश डालते हुए कहाकि ये स्थल भावी पीढ़ियों केलिए स्थायी प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने नागरिकों से एक न्यायपूर्ण और समावेशी समाज के निर्माण की दिशामें मिलकर काम करने का आह्वान किया, जो डॉ भीमराव आंबेडकर को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के सचिव सुधांश पंत, विद्वान, गणमान्य नागरिक इस अवसर पर उपस्थित थे।