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'प्रशासन में विविध विशेषज्ञता की जरूरत है'

उपराष्ट्रपति ने राज्यों से भर्ती नीतियों में सुधार करने का आग्रह किया

सिविल सेवा दिवस पर प्रशासनिक अधिकारियों को सुझाव व प्रोत्साहन

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Tuesday 21 April 2026 05:16:00 PM

vice president on civil services day

नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा हैकि प्रशासनिक सेवाओं में केवल सामान्य ज्ञान रखने वालों पर निर्भर रहने का युग समाप्त हो गया है और अधिक विशेषज्ञता की मांग की। उन्होंने राज्यों से भी शासन-प्रशासन को और ज्यादा मजबूत एवं सुदृढ़ करने केलिए दूरदर्शी भर्ती नीतियों को अपनाने का आग्रह किया। उपराष्ट्रपति आज 18वें सिविल सेवा दिवस पर विज्ञान भवन नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने देशभर में कार्यरत प्रशासनिक अधिकारियों और उनके सेवानिवृत्त साथियों को शुभकामनाएं दीं। उपराष्ट्रपति ने याद दिलायाकि स्वतंत्र भारत के प्रथम गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने सर्वप्रथम दिल्ली में प्रशासनिक सेवाओं के प्रशिक्षुओं को संबोधित किया था, जिसमें उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को ‘भारत का स्तंभ’ बताया था, आज इसबात को 79 वर्ष हो चुके हैं।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहाकि प्रशासनिक अधिकारियों के विभिन्न बैचों ने इस विरासत को निरंतर कायम रखा है और प्रगति एवं समृद्धि की राह पर राष्ट्र की ठोस संरचना के रूपमें कार्य किया है। उन्होंने विभिन्न राज्यों में कार्यरत प्रशासनिक अधिकारियों को राष्ट्रीय एकता और एकजुटता का सबसे बड़ा दूत बताया। उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हासिल की गईं अभूतपूर्व प्रगति का जिक्र करते हुए सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के मार्गदर्शक विजन पर प्रकाश डाला। उन्होंने लगभग 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालना, गरीबों केलिए 4 करोड़ से अधिक घरों का निर्माण, सीमावर्ती गांवों को जीवंत समुदायों के रूपमें विकसित करना, लखपति दीदी, नमो ड्रोन दीदी, आकांक्षी जिला कार्यक्रम, एक जिला एक उत्पाद जैसी सरकारी नीतियों के सच्चे क्रियांवयनकर्ता के रूपमें प्रशासनिक अधिकारियों की सराहना करते हुए कहाकि इन उपलब्धियों में उनकी निष्ठापूर्ण कार्यशैली प्रशंसनीय है। उन्होंने ऐसे कई और कार्यक्रमों का जिक्र किया और अधिकारियों से कहाकि कोई भी राज्य या जिला पीछे नहीं छूटना चाहिए।
सीपी राधाकृष्णन ने कहाकि 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास' के सिद्धांत का अनुभव प्रत्येक नागरिक को करना चाहिए। उपराष्ट्रपति ने कहाकि 2047 तक विकसित भारत की राह में भारत को अभी लंबा सफर तय करना है। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को सुझाव व प्रोत्साहन देते हुए उनका समावेशी विकास और प्रभावी शासन सुनिश्चित करने की निरंतर प्रतिबद्धता, ईमानदारी और अंतिम छोर तक सेवाएं पहुंचाने पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहाकि प्रशासनिक अधिकारियों से तेजी से विकसित हो रहे तकनीकी परिदृश्य पर सरकारी कर्मचारियों से अपने कौशल को निरंतर उन्नत करने और भविष्य केलिए तैयार रहने का आग्रह किया। उन्होंने क्षमता निर्माण केलिए iGOT कर्मयोगी जैसे प्लेटफार्मों पर प्रकाश डाला और दक्षता, पारदर्शिता और लाभार्थियों तक सही ढंग से पहुंचने में प्रौद्योगिकी की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहाकि तकनीकी प्रगति ने भ्रष्टाचार को कम करने और सेवा वितरण में सुधार करने में मदद की है, साथही यह चेतावनी भी दीकि कल्याणकारी योजनाओं को सावधानीपूर्वक तैयार किया जाना चाहिए, ताकि वे पात्र लाभार्थियों तक पहुंच सकें।
उपराष्ट्रपति ने सिविल सेवकों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग, नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग और ब्लॉकचेन जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाने केलिए प्रोत्साहित किया। उपराष्ट्रपति ने तमिल संतकवि तिरुवल्लुवर के शब्दों को उद्धृत करते हुए कहाकि धर्म (अरम) सर्वोच्च धन है, जो भौतिक समृद्धि और नैतिक शक्ति दोनों प्रदान करता है। उन्होंने कहाकि विशेषकर चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सच्चा नेतृत्व नैतिक आचरण में निहित है। उन्होंने वैध मार्गदर्शन का पालन करने और अनुचित दबाव के आगे झुकने केबीच अंतर स्पष्ट किया और अधिकारियों से हर समय ईमानदारी और निष्पक्षता बनाए रखने का आह्वान किया। उपराष्ट्रपति ने प्रशासनिक सेवाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहाकि 2016 में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 21 प्रतिशत थी, जो 2025 की परीक्षा में बढ़कर लगभग 31 प्रतिशत हो गई है और आज कई महिलाएं वरिष्ठ पदों पर कार्यरत हैं। उन्होंने इसे नारी शक्ति का सशक्त प्रमाण बताया, जो न केवल संख्यात्मक परिवर्तन है, बल्कि सोच में भी बदलाव है। उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के माध्यम से विधायी निकायों में भी इसी तरह की प्रगति की आशा व्यक्त की।
उपराष्ट्रपति ने सिविल सेवा परीक्षाओं में कड़ी प्रतिस्पर्धा का जिक्र किया, जिसमें प्रतिवर्ष 12 से 15 लाख उम्मीदवार शामिल होते हैं और केवल लगभग 1000 का ही चयन होता है। अधिकारियों को उनकी विशेषाधिकार प्राप्त स्थिति याद दिलाते हुए उन्होंने उनसे राष्ट्र और उसके नागरिकों के प्रति अपने दायित्वों केप्रति सचेत रहने का आग्रह किया। उन्होंने उनसे अपने अधीनस्थों केसाथ मजबूत संपर्क बनाए रखने का आग्रह किया, ताकि चुनौतियों का बेहतर समाधान किया जा सके। सेवातीर्थ और कर्तव्य भवन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहाकि ये राष्ट्र केप्रति सेवा, कर्तव्य और समर्पण की गहरी प्रतिबद्धता के प्रतीक हैं। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों से आग्रह कियाकि वे यह सुनिश्चित करेंकि उनका कार्य सुदूरतम क्षेत्रों तक पहुंचे, लोगों के जीवन में बदलाव लाएं, त्वरित शिकायतों का समाधान करें और नागरिकों को सशक्त बनाएं, जिससे समानता, गरिमा और न्याय के मूल्यों को मजबूती मिले। इस अवसर पर कार्मिक राज्यमंत्री डॉ जितेंद्र सिंह, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ पीके मिश्रा, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव-2 शक्तिकांत दास, कैबिनेट सचिव डॉ टीवी सोमनाथन, प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग की सचिव निवेदिता शुक्ला वर्मा और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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