स्वतंत्र आवाज़
word map

'देश का युवा जितना सशक्त, देश उतना ही सशक्त'

प्रधानमंत्री का आईआईटी दिल्ली के दीक्षांत में जेन-जी को प्रेरक संबोधन

शैक्षिक उपलब्धियों पर बधाई और उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दीं

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Saturday 8 August 2026 03:44:27 PM

pm modi 57th convocation ceremony of iit delhi

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज आईआईटी दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में जेन-जी को संबोधित करते हुए कहा हैकि देश के युवा जितने अधिक सशक्त होंगे, देश उतना ही अधिक सशक्त होगा। नरेंद्र मोदी ने स्नातकों और उनके परिजनों को उनकी शानदार शैक्षणिक उपलब्धियों पर बधाई देते हुए कहाकि उनकी डिग्रियां मात्र शैक्षणिक सफलता से कहीं अधिक महत्व रखती हैं, बल्कि राष्ट्र केप्रति योगदान देने का दायित्व भी प्रदान करती हैं। उन्होंने उपाधियां पाएं स्नातकों की विशेष प्रशंसा की और संस्थान में शुरू की गई नई एआई पहलों का जश्न मनाया। नरेंद्र मोदी ने स्नातकों से प्रेरक संबोधन में कहाकि वे यहां से देश केलिए बहुत कुछ करने के सपने केसाथ जा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने छात्रों के ओरिएंटेशन दिवस से लेकर दीक्षांत समारोह तकके सफर को जीवंत रूपसे याद किया और उनकी विविध आकांक्षाओं को स्वीकार किया, जिनमें पहली नौकरी पाना, स्टार्टअप शुरू करना और आगे की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करना शामिल है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों को वर्तमान क्षणों को संजोने केलिए प्रोत्साहित करते हुए हास्यपूर्ण ढंग से परिसर की कुछ प्यारी यादों का जिक्र किया, जिनमें कुमाऊं, आरा, कारा, विंधी, नीलगिरी, कैलाश और हिमाद्री के छात्रावासों केबीच की प्रतिद्वंद्विताएं, साथही जिया सराय के पोहा और सतपुरा मेस के पराठे जैसे स्थानीय व्यंजन शामिल थे। नरेंद्र मोदी ने कहाकि आनेवाले समय में जब उनपर बड़ी जिम्मेदारियां होंगी तो इस जगह की यादें निश्चित रूपसे उनको ऊर्जा प्रदान करेंगी। संस्थागत सहयोग प्रणाली केप्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने स्नातक छात्रों से अपने सहपाठियों, प्रोफेसरों, मार्गदर्शकों और सहायक कर्मचारियों को जीवनभर की संपत्ति के रूपमें पहचानने का आग्रह किया, जो वास्तव में उनके लिए परिवार के समान बन गए। नरेंद्र मोदी ने तेजी से बदलते भू-राजनीतिक और रणनीतिक वैश्विक परिदृश्य का जिक्र करते हुए तकनीकी प्रगति की निरंतर गति को इन विशाल वैश्विक परिवर्तनों का प्राथमिक उत्प्रेरक बताया। उन्होंने इस तीव्र परिवर्तन युग को अभूतपूर्व चुनौतियों और विशाल नए अवसरों के दोहरे परिदृश्य के रूपमें प्रस्तुत किया। उन्होंने कहाकि इस तीव्र परिवर्तन केबीच मेरे शब्दों को याद रखेंकि जो निरंतर सीखता रहता है, वही विजयी होगा।
आईआईटी डिग्री के वास्तविक मूल्य को पुनर्परिभाषित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहाकि यह योग्यता केवल उच्च सीजीपीए या आकर्षक नौकरी के प्रस्ताव से कहीं अधिक है, यह उन्नत समस्या-समाधान क्षमताओं का एक निश्चित वैश्विक प्रमाणपत्र है। नरेंद्र मोदी ने शैक्षणिक लगन और जीवनभर की दृढ़ता केबीच तुलना करते हुए युवाओं को सलाह दीकि वे जीवन की बड़ी चुनौतियों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर उनका सामना करें, ठीक वैसेही जैसे वे जटिल प्रयोगशाला सिमुलेशन को हल करते हैं। उन्होंने कहाकि जीवन में कठिनाइयां आना तय है, लेकिन साथही नए अवसर भी मिलेंगे। प्रधानमंत्री ने संरचित शैक्षणिक वातावरण और अप्रत्याशित वास्तविक जीवन की परिस्थितियों केबीच तुलना करते हुए स्नातकों से कहाकि विश्वविद्यालय की परीक्षाओं के विपरीत जीवन की सबसे महत्वपूर्ण चुनौतियां पूरी तरह से पाठ्यक्रम से बाहर होती हैं। उन्होंने कहाकि सच्ची सफलता केवल पूर्वनिर्धारित प्रश्नों के उत्तर देने में नहीं, बल्कि उन समस्याओं को पहचानने और हल करने में निहित है, जिन्हें समाज ने उदासीनता से स्वीकार कर लिया है। नरेंद्र मोदी ने कहाकि कई पूर्व छात्रों की सफलता का मूल कारण यह थाकि उन्होंने उन महत्वपूर्ण प्रश्नों को साहसपूर्वक पहचाना, जिन्हें दुनिया ने प्रश्न मानना ही छोड़ दिया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने याद दिलायाकि कैसे स्वतंत्रता प्राप्त करने के एकमात्र लक्ष्य ने एक ऐसे युग को परिभाषित किया, जो अपार बलिदान और तपस्या से भरा था। उन्होंने वर्तमान पीढ़ी को चुनौती दीकि वे अगले तीन दशक में राष्ट्र के विकास लक्ष्यों केसाथ अपने करियर पथ को जोड़कर अपनी विरासत स्वयं परिभाषित करें। नरेंद्र मोदी ने कहाकि उनके प्रत्येक निर्णय का आधार यह होना चाहिएकि इससे देश को क्या लाभ होगा और कौन सी राष्ट्रीय आवश्यकता पूरी होगी? प्रधानमंत्री ने आर्थिक, तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्रों में व्यापक आत्मनिर्भरता का वर्णन करते हुए कहाकि युवा सशक्तिकरण एक विकसित भारत की आधारशिला है। उन्होंने प्रशासन के उन रणनीतिक नीतिगत निर्णयों की सराहना की, जिनके तहत पारंपरिक रूपसे प्रतिबंधित क्षेत्रों को युवा नवप्रवर्तकों केलिए सुलभ बनाया गया है। प्रधानमंत्री ने युवा इंजीनियरों की अभूतपूर्व उपलब्धियों की सराहना की, जो अब सक्रिय रूपसे अपने स्वयं के रॉकेट डिजाइन और लॉंच कर रहे हैं। उन्होंने कहाकि अंतरिक्ष क्षेत्र युवाओं केलिए नए अवसरों का आकाश बन गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेमीकंडक्टर निर्माण प्रगति पर कहाकि प्रारंभिक उत्पादन इकाइयां पहले से ही चालू हैं, जिनसे देश में अपार आत्मविश्वास पैदा हो रहा है। नरेंद्र मोदी ने कहाकि कहीं न कहीं कोई युवा पूरे आत्मविश्वास केसाथ गर्व से कह रहा होगा 'भारत में चिप बनाने वाला मैं अपने वंश का पहला व्यक्ति हू्र'। प्रधानमंत्री ने बतायाकि युवा नवप्रवर्तक कृषि और चिकित्सा सेवाओं से राष्ट्रीय रक्षा तकके क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव ला रहे हैं। नरेंद्र मोदी ने भारत की स्टार्टअप क्रांति को गति देने का श्रेय वर्तमान पीढ़ी को देते हुए यूनिकॉर्न कंपनियों, डिजिटल भुगतान और फिनटेक बूम से उत्पन्न विशाल आर्थिक गति की प्रशंसा की, जिसने लाखों लोगों को अभूतपूर्व उद्यमशीलता मंच मिले हैं। नरेंद्र मोदी ने कहाकि इन क्रांतियों ने देश के लाखों युवाओं को पहलीबार कुछ बिल्कुल नया करने का अविश्वसनीय अवसर दिया है। प्रधानमंत्री ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा केंद्र, महत्वपूर्ण खनिज, गहरे समुद्र की खोज, क्वांटम कंप्यूटिंग और ऊर्जा सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण उभरते क्षेत्रों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहाकि ऐसे कई अत्याधुनिक क्षेत्र उनकी अपार प्रतिभा, साहसिक नवाचार और सशक्त नेतृत्व की प्रतीक्षा कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने आईआईटी दिल्ली के सोनीपत परिसर में एआई पावर्ड हाई परफॉर्मेंस सुपरकंप्यूटिंग सुविधा 'परम प्रज्ञा' का भी उद्घाटन किया।
प्रधानमंत्री ने अनुसंधान फैलोशिप और राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन की स्थापना सहित मजबूत समर्थन तंत्रों की रूपरेखा प्रस्तुत की, जिसके लिए एक लाख करोड़ रुपये तकके अभूतपूर्व निधि लक्ष्य का प्रावधान किया गया है। प्रधानमंत्री ने 'एक राष्ट्र एक सदस्यता' कार्यक्रम पर प्रकाश डाला, जो यह सुनिश्चित करता हैकि प्रतिष्ठित वैश्विक शोध पत्रिकाएं छोटे से छोटे शहरों में भी बिना किसी अतिरिक्त लागत के उपलब्ध हों। उन्होंने इस पुनर्जागरण केलिए युवाओं की प्रतिबद्धता पर पूर्ण विश्वास जताया। नरेंद्र मोदी ने स्नातकों को सोशल मीडिया के हानिकारक प्रभावों से आगाह करते हुए उनसे आग्रह कियाकि वे अपने वेतन, नौकरी या स्टार्टअप की उपलब्धियों की तुलना अपने साथियों से बिल्कुल न करें और अपने मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें एवं आत्मसुधार पर ध्यान केंद्रित करें। उन्होंने कहाकि याद रखें कि जीवन कोई लीडरबोर्ड नहीं है, आपकी असली दौड़ किसी और से नहीं, बल्कि खुद से है। प्रधानमंत्री ने स्नातकों को उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। दीक्षांत समारोह में शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी, आशीष साल्वे, प्रोफेसर अभय करंदिकर, आईआईटी दिल्ली के निदेशक प्रोफेसर रंगन बैनर्जी, प्रोफेसर और छात्र उपस्थित थे।

हिन्दी या अंग्रेजी [भाषा बदलने के लिए प्रेस F12]