इंदौर में सेमिनार में जैन समुदाय के योगदानों और सेवाओं की चर्चा
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग और देवी अहिल्या विवि का आयोजनस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Friday 24 April 2026 01:18:05 PM
इंदौर। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने ज्ञान साझेदार के रूपमें देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर केसाथ 'जैन समुदाय का भारतीय अर्थव्यवस्था, शिक्षा और परोपकार में योगदान' विषय पर इंदौर मैरियट होटल में राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया। सेमिनार में केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने वीडियो संदेश से कहाकि परोपकार जैन समाज की परिभाषा है, अस्पताल, धर्मशालाएं, गौशालाएं और सामुदायिक रसोइयों के माध्यम से सेवाएं प्रदान करते हैं। उन्होंने कहाकि जैन उद्यमी भारतीय अर्थव्यवस्था को शक्ति प्रदान करते हैं, रोज़गार सृजन करते हैं और नवाचार को बढ़ावा देते हैं, साथही शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और ग्रामीण विकास का समर्थन करते हैं।
अल्पसंख्यक कार्य मंत्री ने कहाकि जैन समुदाय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण में बढ़चढ़कर योगदान दे रहा है और सरकार इन योगदानों को मान्यता देती है। उन्होंने कहाकि पीएम विकास और प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम से हम जैन युवाओं और संस्थानों को सशक्त बना रहे हैं। उन्होंने कहाकि जैन सिद्धांत अहिंसा, अपरिग्रह, अनेकांतवाद सद्भाव, स्थिरता और विविध दृष्टिकोणों केप्रति सम्मान सिखाते हैं, ये वे मूल्य हैं, जिनकी राष्ट्र को आवश्यकता है। अल्पसंख्यक कार्य राज्यमंत्री जॉर्ज कुरियन ने अल्पसंख्यक समुदायों को सशक्त बनाने वाली विभिन्न सरकारी पहलों पर विस्तार से बताया, जिसमें पीएम विकास योजना भी शामिल है। उन्होंने बतायाकि ये कार्यक्रम कौशल विकास, उद्यमिता और शिक्षा पर केंद्रित हैं, जो आर्थिक विकास में अधिक भागीदारी सक्षम बनाते हैं। उन्होंने समावेशी विकास केलिए सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर दिया, जो आजीविका को मजबूत करने और समुदायों में सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान को बढ़ावा देने के अवसर पैदा करती है।
एनसीएम की सदस्य एस मुना वारी बेगम ने जैन समुदाय की सेवा और उत्थान केप्रति प्रतिबद्धता की सराहना की, यह नोट करते हुएकि उनका योगदान भारत के सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करता है। एनसीएम के सदस्य बर्जिस देसाई ने कहाकि अहिंसा और बहुलवाद के जैन मूल्य आज गहन रूपसे प्रासंगिक हैं और उनके आर्थिक एवं परोपकारी योगदान सभी केलिए प्रेरणादायक उदाहरण हैं। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की सचिव स्मति अलका उपाध्याय ने कहाकि आयोग जैन समुदाय के हितों की रक्षा करने में सक्रिय रूपसे संलग्न है। उन्होंने बतायाकि आयोग झारखंड सरकार केसाथ सम्मेद शिखरजी पहाड़ी की पवित्रता से संबंधित मामले पर सक्रिय है, जो जैन समुदाय का सबसे पवित्र तीर्थस्थल है। उन्होंने आयोग की समावेशी विकास को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को दोहराया। मध्य प्रदेश सरकार के सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य कुमार कश्यप, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ राकेश सिंघई, शांतिलाल मुथा फाउंडेशन के संस्थापक शांतिलाल मुथा और जैन इंटरनेशनल ट्रेडिंग ऑर्गनाइजेशन के उपाध्यक्ष कमलेश सोजतिया ने भी सेमिनार को संबोधित किया।
देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर में जैन अध्ययन केंद्र के प्रमुख प्रोफेसर राजनिष जैन ने तकनीकी सत्र को संचालित किया, जिसमें लालभाई दलपतभाई इंस्टीट्यूट फॉर इंडोलॉजी अहमदाबाद के पूर्व निदेशक डॉ जितेंद्र भाई शाह, दिगंबर जैन महासमिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष, एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया के सदस्य गिरीश जे शाह और उपाध्यक्ष अल्पसंख्यक विंग जेटो ने उद्गार व्यक्त किए। दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर शालिन जैन, जैन विश्वभारती लाडनूं के प्रोफेसर भगचंद जैन (सेवानिवृत्त), इंटरनेशनल स्कूल फॉर जैन स्टडीज पुणे के सहायक निदेशक डॉ नवीन कुमार श्रीवास्तव, सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी के पूर्व प्रमुख प्रोफेसर फूलचंद जैन और जैन धर्म रक्षक फाउंडेशन की संस्थापक डॉ इंदु जैन ने अहिंसा, अनेकांतवाद और अपरिग्रह जैसे मूल सिद्धांतों व उनकी प्रासंगिकता पर केंद्रित विचार विमर्श किया। वक्ताओं ने बतायाकि जैन विचार नैतिक, पर्यावरणीय और बौद्धिक विमर्श को समृद्ध करते हैं, जो स्थायी और सामंजस्यपूर्ण जीवन केलिए मूल्यवान अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के सचिव और अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के सचिव डॉ श्रीवत्स कृष्णा ने आर्थिक उद्यम, शिक्षा और परोपकार से राष्ट्र निर्माण में जैन समुदाय के योगदानों को मान्यता देने के महत्व पर प्रकाश डाला।