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'जनप्रतिनिधियों के मुद्दों को प्राथमिकता दें'

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की आईएएस अफसरों से बड़ी अपेक्षाएं!

केंद्र में सहायक सचिव के रूप में कार्यरत आईएएस से भेंट

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Wednesday 20 May 2026 06:16:50 PM

president droupadi murmu has high expectations of ias officers

नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा हैकि लोकतंत्र का उद्देश्य जनता की आकांक्षाओं को साकार करना है, ये आकांक्षाएं उनके चुने हुए जनप्रतिनिधियों के माध्यम से व्यक्त की जाती हैं, इसलिए अधिकारियों का यह कर्तव्य हैकि वे जनता के हित में जनप्रतिनिधियों के उठाए गए मुद्दों को प्राथमिकता दें। राष्ट्रपति ने एक टिप्पणी में कहाकि बहती धारा केसाथ बहते रहने में कोई मेहनत नहीं लगती, 'विकसित भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करने और समाज को प्रगति के शिखर तक पहुंचाने केलिए अधिकारियों को अक्सर विपरीत परिस्थितियों में भी संघर्ष करते हुए आगे बढ़ना होगा। उन्होंने आईएएस अधिकारियों को सलाह दीकि वे भारत की जनता विशेषकर समाज के वंचित वर्गों को अपने विचारों और कार्यों के केंद्र में रखें, चाहे वे क्षेत्र में हों या कार्यालय में। राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त कियाकि वे विकसित और समावेशी भारत के निर्माण में अमूल्य योगदान देंगे।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से आज विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों में सहायक सचिव के रूपमें कार्यरत भारतीय प्रशासनिक सेवा-2024 बैच के अधिकारियों के एक समूह ने राष्ट्रपति भवन में मुलाकात की। राष्ट्रपति ने आईएएस अधिकारियों को अपने प्रेरक संबोधन में अखिल भारतीय सेवाओं विशेषकर आईएएस अधिकारियों की देश के विकास में बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका की प्रशंसा की। उन्होंने कहाकि अब जब देश विकास के उच्चस्तर पर पहुंच चुका है तो उनसे अपेक्षाएं भी अधिक हैं। राष्ट्रपति ने कहाकि आईएएस अधिकारियों को विविध क्षेत्रोंमें काम करने का अनूठा अवसर मिलता है, कई अवसरों पर वे विशिष्ट क्षेत्रोंमें विशेषज्ञों की टीमों का नेतृत्व करते हैं, इसलिए उनके सीखने का दायरा और गति बहुत व्यापक तथा त्‍वरित होनी चाहिए। उन्होंने कहाकि विभिन्न क्षेत्रों और परिस्थितियों के अनुकूल ढलने की अधिकारियों की क्षमता असाधारण होनी चाहिए।
राष्ट्रपति ने कहाकि अधिकारियों की निष्पक्षता उनकी न्यायसंगतता का सूचक होती है, उनकी विश्वसनीयता उनकी पारदर्शिता और निरंतर निष्पादन पर आधारित होती है, उनके व्यक्तिगत और व्यावसायिक आचरण से निर्धारित उनकी सत्यनिष्ठा उन्हें जनहित में निर्णायक कार्रवाई करने का नैतिक साहस प्रदान करती है। उन्होंने कहाकि अधिकारियों में करुणा और तर्कसंगतता का मिश्रण होना चाहिए, भावुक हुए बिना संवेदनशील होना चाहिए, नियमों का पालन करें, लेकिन व्यापक उद्देश्यों को न भूलें। राष्ट्रपति ने कहाकि नैतिकता और सुशासन एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। उन्होंने कहाकि जिस प्रकार न्याय मिलने में देरी को न्याय से वंचित करना माना जाता है, उसी प्रकार प्रशासनिक निर्णय लेने में देरी भी लोगों को उनके वैध हितों से वंचित करने के समान है। उन्होंने रेखांकित कियाकि अधिकारियों को ईमानदार और नैतिक होना चाहिए, साथही उन्हें परिणाम भी देने होंगे। राष्ट्रपति ने कहाकि निर्णय लेने से बचना नैतिकता नहीं है, बल्कि जनहित और स्थापित व्यवस्था के अनुरूप सही निर्णय लेना ही नैतिकता का सच्चा सार है।

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