जूनागढ़ व बर्दा वन्यजीव अभयारण्य में एशियाई शेरों का प्राकृतिक विस्तार
वन मंत्री भूपेंद्र यादव और गुजरात के मुख्यमंत्री ने की कार्यक्रम की शुरूआतस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Thursday 14 May 2026 05:03:47 PM
गिर (गुजरात)। पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने आज सासन गिर में 'लायन' स्पीशीज स्पॉटलाइट कार्यक्रम का शुभारंभ किया। यह कार्यक्रम अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट एलायंस शिखर सम्मेलन 2026 से पहले आयोजित कार्यक्रमों की श्रृंखला का हिस्सा है। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने वर्चुअली कहा हैकि आईबीसीए की स्थापना शेरों के संरक्षण केलिए एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुई है। उन्होंने शेरों के संरक्षण केप्रति बढ़ती वैश्विक जागरुकता का श्रेय इसी दूरदृष्टि को दिया है। भूपेंद्र पटेल ने एशियाई शेर के संरक्षण में सामुदायिक भागीदारी की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहाकि शेर इस क्षेत्रकी लोक संस्कृति का अभिन्न अंग है, जिसने गिर में एशियाई शेरों की बढ़ती आबादी में योगदान दिया है। भूपेंद्र पटेल ने कहाकि गिर इस बातका उत्कृष्ट उदाहरण हैकि पारिस्थितिक दृष्टिकोण अपनाकर आर्थिक विकास और वन्यजीव संरक्षण को एकसाथ आगे बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों की विभिन्न वन्यजीव संरक्षण पहलों की जानकारी दी, जिनमें एशियाई शेरों के प्राकृतिक विस्तार केलिए एक नए स्थल के रूपमें बर्दा वन्यजीव अभयारण्य का विकास शामिल है।
वनमंत्री भूपेंद्र यादव ने बतायाकि भारत 1 और 2 जून 2026 को नई दिल्ली में प्रथम आईबीसीए शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। इस दौरान तकनीकी सत्र भी आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहाकि 'शेरों को बचाओ, मानवता को बचाओ, पारिस्थितिकी तंत्र को बचाओ' के नारे केसाथ इस शिखर सम्मेलन में एशिया, अफ्रीका, अमेरिका और 95 देशों के राष्ट्राध्यक्ष, शासनाध्यक्ष, नीति निर्माता, वैज्ञानिक, संरक्षण कार्यकर्ता, बहुपक्षीय एजेंसियां, वित्तीय संस्थान, सहयोगी संगठन और 400 प्रतिनिधि एकसाथ जुटेंगे। उन्होंने कहाकि आईबीसीए एक वैश्विक गठबंधन है, जो सात प्रतिष्ठित बड़ी बिल्ली प्रजातियों यानी बाघ, शेर, तेंदुआ, हिम तेंदुआ, चीता, जगुआर और प्यूमा के संरक्षण केलिए समर्पित है और इसके लिए वह सहयोगात्मक अंतर्राष्ट्रीय कार्रवाई और मजबूत वैज्ञानिक एवं तकनीकी सहयोग का उपयोग करता है। वनमंत्री ने सासन गिर को भारत की समृद्ध जैव विविधता, प्राकृतिक संवेदनशीलता और संरक्षण प्रतिबद्धता का जीवंत प्रतीक बताया। उन्होंने कहाकि गिर का शेर न केवल गुजरात की पहचान है, बल्कि देश के गौरव, साहस और प्राकृतिक विरासत का प्रतीक भी है।
भूपेंद्र यादव ने बतायाकि एशियाई शेरों की जनसंख्या का आकलन करने की पहल जूनागढ़ में राष्ट्रीय वन्यजीव केंद्र की स्थापना और बर्दा राष्ट्रीय वन्यजीव अभयारण्य को एशियाई शेरों के प्राकृतिक विस्तार के स्थल के रूपमें विकसित करने जैसे विभिन्न प्रोजेक्ट मिशन मोड में हो रहे हैं। भूपेंद्र यादव ने कहाकि 'लायन' स्पीशीज स्पॉटलाइट कार्यक्रम ने शेरों की वैश्विक संरक्षण स्थिति और प्रजाति संरक्षण में भारत की पहलों को उजागर किया। उन्होंने कहाकि कार्यक्रम का उद्देश्य भारत के सफल शेर संरक्षण मॉडल को प्रदर्शित करना, शेरों के निवास स्थान वाले देशों केबीच अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना, पर्यावास संबंधी दबाव, जलवायु परिवर्तन और मानव-वन्यजीव अंतर्संबंध जैसी उभरती चुनौतियों पर विचार-विमर्श करना, ज्ञान का आदान-प्रदान और क्षमता निर्माण को मजबूत करना है। उन्होंने शेरों को विश्व की सबसे प्रतिष्ठित और विशालकाय बिल्ली प्रजातियों में से एक बताते हुए कहाकि शेर शीर्ष शिकारी होते हैं, जो शाकाहारी जीवों की आबादी को नियंत्रित करके, पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बनाए रखकर और जैव विविधता तथा अंतर-प्रजाति संबंधों को आकार देकर एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिक भूमिका निभाते हैं। उन्होंने बतायाकि पर्यावास के क्षरण और गिरावट के कारण वैश्विक स्तरपर शेरों की आबादी में 30 प्रतिशत से अधिक की कमी आई है, जबकि एशियाई शेर भारत के गिर क्षेत्रमें एकमात्र जंगली आबादी के रूपमें जीवित है।
भारत की वन्यजीव संरक्षण सफलताओं का उल्लेख करते हुए भूपेंद्र यादव ने बतायाकि ग्रेटर गिर लैंडस्केप में शेरों की आबादी 2025 तक बढ़कर अनुमानित 891 हो गई है। उन्होंने कहाकि प्रभावी संरक्षण और प्रबंधन प्रयासों से गिर लैंडस्केप के कई क्षेत्रोंमें शेरों की उप आबादी को स्थिर करने और बढ़ाने में मदद मिली है। उन्होंने बतायाकि एशियाई शेर को वन्यजीवों और वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर सम्मेलन के परिशिष्ट-I और वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम-1972 की अनुसूची-I केतहत सर्वोच्च स्तर का कानूनी संरक्षण प्राप्त है। उन्होंने बतायाकि 2020 में शुरू किया गया 'प्रोजेक्ट लायन' एशियाई शेरों के दीर्घकालिक संरक्षण केलिए पर्यावास बहाली, जनसंख्या प्रबंधन और पारिस्थितिक मजबूती के जरिए एक व्यापक दृष्टिकोण अपनाता है। इस अवसर पर गुजरात के वन मंत्री अर्जुन मोढवाडिया, वन राज्यमंत्री प्रवीण माली, आईबीसीए, केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। गिर क्षेत्र के विभिन्न शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों सहित उपस्थित लोगों को शेरों के संरक्षण केलिए किए जारहे प्रयासों पर विस्तृत प्रस्तुतियां और शैक्षिक फिल्में भी दिखाई गईं।