ऊर्जा प्रौद्योगिकी में घरेलू क्षमताओं के विस्तार की आवश्यकता
पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में दी जानकारीस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Wednesday 25 March 2026 06:20:06 PM
नई दिल्ली। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान और प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ जितेंद्र सिंह ने आज लोकसभा में जानकारी दी हैकि भारत आयात पर निर्भरता कम करने, घरेलू उत्पादन बढ़ाने और भविष्य के औद्योगिक व तकनीकी विकास को समर्थन देने केलिए एक लचीली आपूर्ति श्रृंखला पर ध्यान केंद्रित करते हुए महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्रमें अपनी स्थिति को लगातार मजबूत बना रहा है। डॉ जितेंद्र सिंह ने कहाकि भारत ने दुर्लभ पृथ्वी स्थायी चुम्बकों के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने और लिथियम जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की खोज केलिए प्रयासों को तेज कर दिया है। उन्होंने कहाकि इसका लक्ष्य वर्ष 2030 तक उत्पादन क्षमता को 5000 टन तक पहुंचाना है। मौजूदा बजट सत्र में प्रश्नकाल में पूछे गए प्रश्नों का उत्तर देते हुए डॉ जितेंद्र ने कहाकि देश की दुर्लभ पृथ्वी स्थायी चुम्बकों की वर्तमान आवश्यकता लगभग 4000 टन है, जिसके वर्ष 2030 तक बढ़कर लगभग 8000 टन होने का अनुमान है, यह वृद्धि घरेलू क्षमताओं के तेजीसे विस्तार की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने कहाकि हालही में नियोडिमियम-आयरन-बोरॉन स्थायी चुम्बकों की प्रायोगिक परियोजना शुरू की गई है, जबकि विशाखापत्तनम में समैरियम-कोबाल्ट चुम्बक संयंत्र को 500 टन प्रतिवर्ष की प्रारंभिक उत्पादन क्षमता केसाथ चालू कर दिया गया है। उन्होंने बतायाकि अगले चरण में इस क्षमता को बढ़ाकर 2000 टन और वर्ष 2030 तक 5000 टन तक पहुंचाया जाएगा। डॉ जितेंद्र सिंह ने कहाकि सरकार महत्वपूर्ण खनिजों की खोज और विकास में तेजी लाने केलिए समग्र दृष्टिकोण केतहत विभिन्न मंत्रालयों से समन्वय केसाथ काम कर रही है। डॉ जितेंद्र सिंह ने महिमा कुमारी मेवाड़ के प्रश्न का उत्तर देते हुए कहाकि राजस्थान के देगाना में लिथियम भंडार में प्रारंभिक सर्वेक्षण कार्य जारी है और आगे की खोज जल्द ही शुरू होने की उम्मीद है। उन्होंने कहाकि खान मंत्रालय के अंतर्गत जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में भी इसी तरह के प्रयास जारी हैं। डॉ जितेंद्र सिंह ने कहाकि लिथियम और दुर्लभ पृथ्वी तत्व इलेक्ट्रिक वाहनों, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा, एयरोस्पेस और अंतरिक्ष अनुप्रयोगों जैसे क्षेत्रों केलिए महत्वपूर्ण हैं और स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन केसाथ विश्वसनीय ऊर्जा प्रणालियों की आवश्यकता वाली उभरती प्रौद्योगिकियों का समर्थन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
डॉ जितेंद्र सिंह ने बतायाकि परमाणु ऊर्जा (संशोधन) ढांचे केतहत प्रावधानों सहित हाल में किएगए नीतिगत उपायों ने कई महत्वपूर्ण खनिजों की खोज को निजी क्षेत्रकी भागीदारी केलिए खोल दिया है, इनमें यूरेनियम जैसे रणनीतिक संसाधनों केलिए सुरक्षा उपाय शामिल हैं। उन्होंने कहाकि प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन केलिए घरेलू इकोसिस्टम को मजबूत करने केलिए तमिलनाडु, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और केरल में दुर्लभ पृथ्वी गलियारे की घोषणा की गई है। डॉ जितेंद्र सिंह ने कहाकि दुर्लभ पृथ्वी तत्व समुद्र तट की रेत और चट्टानों दोनों में पाए जाते हैं, जिनकी खोज केलिए भूवैज्ञानिक स्थितियों पर अलग-अलग दृष्टिकोणों की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहाकि राजस्थान, गुजरात और झारखंड सहित कुछ क्षेत्रोंमें चट्टानों में खनिजों के महत्वपूर्ण भंडार हैं, जिनकी खोज करना अपेक्षाकृत अधिक जटिल है। डॉ जितेंद्र सिंह ने कहाकि खनन संबंधी सुरक्षा उपाय खान मंत्रालय और संबंधित नियामक ढांचों के अधिकार क्षेत्रमें आते हैं और अवैध खनन पर अंकुश लगाने की आवश्यकता पर जोर दिया।