आवश्यक वस्तुओं की कालाबाज़ारी जमाखोरी न हो-प्रधानमंत्री
भारत सरकार ने किए कम से कम असुविधा के व्यापक इंतजामस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Monday 23 March 2026 01:22:37 PM
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंत्रिमंडल की सुरक्षा मामलों की समिति की एक उच्चस्तरीय बैठक में मिडिल ईस्ट में जारी भयावह संघर्ष में प्रस्तावित व्यापक राहत उपायों की समीक्षा की। प्रधानमंत्री ने मंत्रियों और सचिवों का समूह बनाकर कार्य करने के निर्देश दिए, जो 'संपूर्ण सरकार' दृष्टिकोण से क्षेत्रीय समूह हितधारकों केसाथ परामर्श करके काम करें। प्रधानमंत्री ने कहाकि यह संघर्ष लगातार बदलती हुई स्थिति है, इससे पूरी दुनिया किसी न किसी रूपमें प्रभावित है, ऐसी स्थिति में नागरिकों को इस संघर्ष के प्रभाव से बचाने केलिए हर संभव प्रयास किए जाएं। प्रधानमंत्री ने निर्देश दियाकि सरकार के सभी अंग मिलकर काम करें। प्रधानमंत्री ने राज्य सरकारों केसाथ उचित समन्वय सुनिश्चित करने केलिए भी कहा, ताकि यह सुनिश्चित हो सकेकि आवश्यक वस्तुओं की कालाबाज़ारी और जमाखोरी न हो।
कैबिनेट सचिव ने वैश्विक स्थिति और भारत सरकार के सभी संबंधित मंत्रालयों एवं विभागों के अबतक किए गए और नियोजित राहत उपायों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। कृषि, उर्वरक, खाद्य सुरक्षा, पेट्रोलियम, बिजली, एमएसएमई, निर्यातक, शिपिंग, व्यापार, वित्त, आपूर्ति श्रृंखला जैसे सभी प्रभावित क्षेत्रों में अपेक्षित प्रभाव और उससे निपटने केलिए उठाए गए उपायों पर चर्चा की गई। देश में समग्र वृहद आर्थिक परिदृश्य और आगे किए जाने वाले उपायों पर भी चर्चा की गई। पश्चिम एशिया में संघर्ष का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर महत्वपूर्ण अल्पकालिक, मध्यकालिक और दीर्घकालिक प्रभाव पड़ेगा। बैठक में भारत पर इसके प्रभाव का आकलन किया गया और तत्काल तथा दीर्घकालिक दोनों तरह के जवाबी उपायों पर चर्चा की गई। भोजन, ऊर्जा और ईंधन सुरक्षा सहित आम आदमी केलिए आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता का विस्तृत आकलन किया गया।
देश में आवश्यक वस्तुओं की लगातार उपलब्धता सुनिश्चित करने केलिए अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई, किसानों पर पड़ने वाले असर और खरीफ मौसम केलिए उनकी खाद की ज़रूरतों का आकलन किया गया। बीते कुछ वर्ष में खाद का पर्याप्त भंडार बनाए रखने केलिए जो कदम उठाए गए हैं, उनसे समय पर खाद की उपलब्धता और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होगी। भविष्य में खाद की लगातार उपलब्धता सुनिश्चित करने केलिए खाद के वैकल्पिक स्रोतों पर भी चर्चा की गई। यहभी तय किया गयाकि बिजली संयंत्रों में कोयले का पर्याप्त भंडार होने से भारत में बिजली की कोई कमी नहीं होगी। केमिकल्स, फार्मास्यूटिकल्स, पेट्रोकेमिकल्स और औद्योगिक क्षेत्रों केलिए ज़रूरी आयात स्रोतों में विविधता के उपायों पर चर्चा की गई। भारतीय सामानों को बढ़ावा देने केलिए निकट भविष्य में निर्यात के नए गंतव्य विकसित किए जाएंगे। विभिन्न मंत्रालयों के प्रस्तावित उपायों को हितधारकों से परामर्श केबाद आनेवाले दिनों में तैयार और लागू किया जाएगा।