युद्धपोत निर्माण में आत्मनिर्भरता का एक प्रशंसनीय प्रतीक
जहाज का निर्माण और वितरण निर्धारित समयसीमा कियास्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Friday 1 May 2026 06:17:45 PM
मुंबई। भारतीय नौसेना को नीलगिरी श्रेणी (प्रोजेक्ट 17ए) का छठा और इस श्रेणी का चौथा जहाज महेंद्रगिरी (यार्ड12654) मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड मुंबई में आज समारोहपूर्वक सुपुर्द कर दिया गया है। इसका निर्माण एमडीएसएल में हुआ है और यह सुपुर्दगी युद्धपोत डिजाइन और निर्माण में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। प्रोजेक्ट 17ए फ्रिगेट बहुमुखी बहुमिशन प्लेटफॉर्म हैं, जिन्हें समुद्री क्षेत्रमें वर्तमान और उभरती चुनौतियों का समाधान करने केलिए डिज़ाइन किया गया है। यह अत्याधुनिक फ्रिगेट नौसेना डिजाइन, स्टील्थ, मारक क्षमता, स्वचालन और उत्तरजीविता में एक अभूतपूर्व छलांग का प्रतीक है और युद्धपोत निर्माण में आत्मनिर्भरता का एक प्रशंसनीय प्रतीक है।
युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो के डिजाइन किए गए और युद्धपोत निरीक्षण दल (मुंबई) के पर्यवेक्षित पी17ए फ्रिगेट स्वदेशी जहाज डिजाइन, स्टील्थ क्षमता, टिकाऊपन और युद्ध क्षमता में एक पीढ़ीगत छलांग का प्रतीक है। एकीकृत निर्माण के सिद्धांत से प्रेरित होकर जहाज का निर्माण और वितरण निर्धारित समयसीमा के भीतर किया गया। पी17ए जहाजों में पी17 (शिवालिक-श्रेणी) की तुलना में उन्नत हथियार और सेंसर प्रणाली लगी हुई है। इन जहाजों में संयुक्त डीजल या गैस प्रणोदन संयंत्र लगे हैं, जिनमें एक डीजल इंजन और गैस टरबाइन शामिल हैं, जो प्रत्येक शाफ्ट पर एक नियंत्रणीय पिच प्रणोदक और एक अत्याधुनिक एकीकृत प्लेटफॉर्म प्रबंधन प्रणाली को संचालित करते है। शक्तिशाली हथियार और सेंसर प्रणाली में सतहरोधी, वायुरोधी और पनडुब्बीरोधी युद्ध प्रणालियां शामिल हैं।
महेंद्रगिरी छठा पी17ए जहाज है, जिसे भारतीय नौसेना को 20 दिसंबर 2024 को एमडीएसएल ने पहले पी17ए (नीलगिरी) की डिलीवरी केबाद 17 महीने से भी कम समय में सौंपा है। करीब 75 प्रतिशत स्वदेशी भागीदारी वाली इस परियोजना में एमडीएसएल के 200 से अधिक लघु एवं मध्यम उद्यम शामिल हैं। इसने प्रत्यक्ष रूपसे लगभग 4000 और अप्रत्यक्ष रूपसे 10000 से अधिक कर्मियों केलिए रोज़गार सृजन किया है। ज्ञातव्य हैकि एमडीएसएल भारत के रक्षा मंत्रालय के तहत मुंबई में एक प्रमुख 'नवरत्न' सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम शिपयार्ड है, जो भारतीय नौसेना केलिए युद्धपोत और पारंपरिक पनडुब्बियां बनाता है। वर्ष 1774 में स्थापित यह भारत के सबसे पुराने और प्रमुख जहाज निर्माण यार्डों में से एक है, जो विध्वंसक और पनडुब्बियों के निर्माण में विशेषज्ञता रखता है।