दूरसंचार विभाग उत्तर प्रदेश पूर्व लाइसेंस सेवा क्षेत्र का स्पष्टीकरण
मोबाइल टावर रेडिएशन से स्वास्थ्य पर बुरे असर के दावे बेबुनियादस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Tuesday 21 April 2026 01:30:19 PM
लखनऊ। भारत संचार मंत्रालय के अंतर्गत दूरसंचार विभाग के उत्तर प्रदेश पूर्व लाइसेंस सेवा क्षेत्र ने मोबाइल टावरों से उत्सर्जित होने वाले इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड रेडिएशन के संबंध में जनमानस में व्याप्त भ्रांतियों के निवारण हेतु महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। दूरसंचार विभाग ने दावा करते हुए जनमानस को आश्वस्त किया हैकि मोबाइल टॉवर पूर्णतः सुरक्षित हैं और अफवाहों से बचें। विभाग ने बतायाकि 5G, 4G सहित सभी मोबाइल टावरों से उत्सर्जित तरंगें दूरसंचार विभाग के निर्धारित सुरक्षा मानकों के अंतर्गत होती हैं और जनमानस को रेडिएशन संबंधी किसीभी भ्रामक जानकारी पर विश्वास नहीं करना चाहिए। विभाग ने स्पष्ट किया हैकि 5G या अन्य किसीभी नेटवर्क के टावर रेडिएशन से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की बात पूर्णतः निराधार है, 2G से 5G तक सभी मोबाइल नेटवर्क नॉन-आयनाइजिंग रेडियो फ्रीक्वेंसी का उपयोग करते हैं, इनमें ऊर्जा का स्तर इतना न्यून होता हैकि ये मानव शरीर अथवा डीएनए को कोई क्षति नहीं पहुंचा सकतीं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन भी इस तथ्य की पुष्टि कर चुका है। यह अत्यंत महत्वपूर्ण हैकि भारत सरकार के निर्धारित ईएमएफ उत्सर्जन मानक अंतर्राष्ट्रीय मानकों की तुलना में 2 गुना अधिक कठोर हैं, जो नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। आम जनमानस की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उत्तर प्रदेश पूर्व एलएसए अपने क्षेत्राधिकार में स्थापित सभी मोबाइल टावरों की निरंतर निगरानी और ईएमएफ रेडिएशन अनुपालन परीक्षण सुनिश्चित करता है। दूरसंचार सेवा प्रदाता सभी टावरों का स्व-प्रमाणन प्रस्तुत करता है, इसके उपरांत विभाग की टीम प्रत्येक वर्ष कुल लगाए गए मोबाइल टावर के 5 प्रतिशत टॉवरों का औचक निरीक्षण और ईएमएफ रेडिएशन अनुपालन परीक्षण करती है। उत्तर प्रदेश (पूर्व) एलएसए क्षेत्र में कुल 1,21,866 बेस ट्रांससीवर स्टेशन में से 6,240 का वर्ष 2025-26 के दौरान ईएमएफ रेडिएशन अनुपालन परीक्षण किया गया है और ये सभी बीटीएस निर्धारित सुरक्षित सीमाओं के भीतर कार्य करते पाए गए हैं। मानकों का उल्लंघन करने वाले दूरसंचार सेवा प्रदाताओं पर भारी आर्थिक जुर्माना लगाने केसाथ संबंधित बेस ट्रांससीवर स्टेशन को तत्काल प्रभाव से बंद करने का सख्त प्रावधान भी लागू है।
बेस ट्रांससीवर स्टेशन की सुरक्षा प्रणाली को पुष्ट करते हुए उत्तर प्रदेश (पूर्व) एलएसए के अपर महानिदेशक दूरसंचार अरुण कुमार वर्मा कहते हैंकि विभाग नागरिकों को पूर्णतः आश्वस्त करना चाहता हैकि उत्तर प्रदेश (पूर्व) एलएसए में संचालित सभी दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के बेस ट्रांससीवर स्टेशन चाहे वह 2G हो या 5G दूरसंचार विभाग के ईएमएफ रेडिएशन अनुपालन परीक्षण की कसौटी पर अभीतक खरे उतरे हैं। उन्होंने कहाकि विभाग का नियमित ईएमएफ रेडिएशन अनुपालन परीक्षण यह सुनिश्चित करता हैकि जन स्वास्थ्य एवं सुरक्षा केसाथ कोई समझौता न हो। पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से दूरसंचार विभाग ने तरंग संचार पोर्टल tarangsanchar.gov.in संचालित किया है। इसपर कोईभी नागरिक सुगमतापूर्वक अपने आवास अथवा कार्यालय के समीप स्थापित मोबाइल टावरों की स्थिति देख सकता है, साथही यहभी सत्यापित करा सकता हैकि संबंधित टावर सुरक्षित ईएमएफ रेडिएशन मानकों का अनुपालन कर रहा है या नहीं।
तरंग संचार पोर्टल पर वैज्ञानिक तथ्य एवं अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न भी जन जागरुकता हेतु उपलब्ध हैं। यदि किसी नागरिक को अपने आवास, कार्यालय अथवा परिसर के समीप किसी विशिष्ट मोबाइल टावर से उत्सर्जित रेडिएशन के विषय में तनिक भी संशय है तो वह इसकी जांच हेतु आधिकारिक अनुरोध कर सकता है। व्यक्तिगत ईएमएफ रेडिएशन परीक्षण हेतु मात्र ₹4000 का शुल्क निर्धारित किया गया है। दूरसंचार विभाग डिजिटल इंडिया के संकल्प को साकार करने की दिशामें 5G एवं अन्य दूरसंचार सेवाओं के सुचारू, बाधारहित एवं सुरक्षित विस्तार हेतु पूर्णतः प्रतिबद्ध है। इच्छुक व्यक्ति तरंग संचार पोर्टल https://tarangsanchar.gov.in/EMFPortal/Request/Dmeasurement पर ऑनलाइन आवेदन कर टावर की ईएमएफ रेडिएशन जांच करा सकते हैं।