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प्रधानमंत्री से मिले आईजीएनसीए के न्यासी

'भारत की विविधापूर्ण संस्कृति को और अधिक लोकप्रिय बनाएं'

आईजीएनसीए के स्थापना दिवस पर विविध लोक परंपराएं प्रदर्शित

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Friday 20 March 2026 12:37:47 PM

ignca trustees meet prime minister

नई दिल्ली। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के न्यासियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। प्रधानमंत्री ने देश-विदेश में भारत की विविधतापूर्ण संस्कृति को और अधिक लोकप्रिय बनाने से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। आईजीएनसीए ट्रस्ट के अध्यक्ष रामबहादुर राय, सदस्य सचिव डॉ सच्चिदानंद जोशी एवं ट्रस्ट के और 14 सदस्यों ने संस्थान के 39वें स्थापना दिवस समारोह से पूर्व प्रधानमंत्री से भेंट की। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर ‘युगे युगीन भारत संग्रहालय’ का उल्लेख किया और कहाकि जो स्थान पहले सत्ता का केंद्र हुआ करता था, वह अब संस्कृति के केंद्र में परिवर्तित हो गया है। उन्होंने दोहरायाकि पहले नॉर्थ और साउथ ब्लॉक सत्ता के प्रतीक माने जाते थे, लेकिन अब यह स्थिति बदल गई है। प्रधानमंत्री ने कहाकि इतिहास की समझ होना बेहद ही आवश्यक है और आईजीएनसीए जैसे सांस्कृतिक संगठनों ने लोगों में इतिहास की समझ को जगाने में बड़ी भूमिका निभाई है। उन्होंने ‘स्व’ की भावना से भारत को समझने के महत्व पर भी बल दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर लिखाकि आईजीएनसीए के न्यासियों से मुलाकात में हमने देश की विविध संस्कृतियों को और अधिक लोकप्रिय बनाने में अधिक-से-अधिक लोगों को जोड़ने, डिजिटल व जमीनीस्तर की पहलों से जनसंपर्क को मजबूत करने, कलाकारों, विद्वानों को समृद्ध विरासत के संरक्षण और संवर्धन में सहयोग देने के तरीकों पर विचार किया। प्रधानमंत्री से मिलने वाले आईजीएनसीए के न्यासियों में पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ सोनल मानसिंह, हर्षवर्धन नेओटिया, डॉ पद्मा सुब्रह्मण्यम, डॉ भारत गुप्त, डॉ संध्या पुरेचा, देवेंद्र शर्मा, राठी विनय झा, प्रोफेसर निर्मला शर्मा, बिराद याज्ञिक, प्रोफेसर कुलदीप अग्निहोत्री, वंदना जैन और प्रसून जोशी प्रमुख थे। रामबहादुर राय ने कहाकि आईजीएनसीए के अध्यक्ष के रूपमें कार्यभार संभालने केबाद बीते दस वर्ष में यह संस्थान एक विशिष्ट संस्थान से बदलकर हर भारतीय का संस्थान बन गया है और देश के लोगों केलिए संस्कृति का एक लोकतांत्रिक केंद्र बनकर उभरा है। ट्रस्टियों ने सामूहिक रूपसे पिछले दशक को सांस्कृतिक पुनर्जागरण का काल बताया, एक ऐसा काल जो सुचारु, विवादों से मुक्त और हर दृष्टि से सफल रहा है।
आईजीएनसीए के 39वें स्थापना दिवस का शुभारंभ तीन महत्वपूर्ण प्रदर्शनियों के भव्य उद्घाटन केसाथ हुआ। उल्लेखनीय हैकि संस्कृति मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्थान आईजीएनसीए 19 से 21 मार्च 2026 तक अपना 39वां स्थापना दिवस मना रहा है। स्थापना दिवस समारोह के अंतर्गत कलाकोष प्रभाग ने पुस्तक श्रृंखला ‘कलातत्वकोश’ के आठवें खंड के विमोचन एवं चर्चा हेतु एक कार्यक्रम आयोजित किया। इसका विमोचन प्रोफेसर सुधीर लाल विभागाध्यक्ष (कलाकोष), प्रोफेसर आर्यभूषण शुक्ल प्रमुख भारतीय विद्या प्रयोजना, प्रोफेसर मारुति नंदन तिवारी, प्रोफेसर रजनीश कुमार मिश्रा और प्रोफेसर ओमनाथ विमली ने किया। वक्ताओं ने भारतीय कला के मूलभूत अवधारणाओं को समझने में ‘कलातत्वकोश’ के महत्व पर बल दिया और इसे भारतीय ज्ञान परंपरा का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज बताया। प्रोफेसर सुधीर लाल ने स्वागत एवं परिचयात्मक वक्तव्य प्रस्तुत किया। उन्होंने इस खंड की पृष्ठभूमि, उद्देश्यों तथा विशिष्ट विशेषताओं पर प्रकाश डाला। उपस्थित विद्वानों और प्रतिभागियों ने इस प्रकाशन को भारतीय कला अध्ययन के क्षेत्रमें एक उपलब्धि बताया और आईजीएनसीए के प्रयासों की सराहना की।
प्रदर्श​नियों में ‘कलादृष्टि: ए डिकेड ऑफ विजन’ नामक फोटोग्राफिक प्रदर्शनी आकर्षण रही। यह प्रदर्शनी तस्वीरों में वर्ष 2016 से लेकर वर्ष 2026 तकके एक दशक में आईजीएनसीए की समृद्ध यात्रा की झलक प्रस्तुत करती है। अन्य प्रदर्श​नियों में ‘ब्रीदिंग हाइड्स-द सोल ऑफ आंध्र पपेट्री’ शामिल है, जो आंध्र प्रदेश की पारंपरिक चमड़े की कठपुतली कला पर एक कथात्मक प्रदर्शनी है तथा ‘थेवा: लेसर नोन ऑफ राजस्थान’ पर केंद्रित प्रदर्शनी भी शामिल है। ये प्रदर्शनियां आगंतुकों को भारत की दुर्लभ और जीवंत कलात्मक परंपराओं से परिचित कराती हैं। स्थापना दिवस समारोह भारतीय कला, संस्कृति और परंपराओं का एक भव्य उत्सव प्रस्तुत करता है, जिसमें शास्त्रीय नृत्य, लोक कलाओं, पारंपरिक प्रथाओं और सुव्यवस्थित प्रदर्शनियों से भारत की सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों के विविध आयामों को प्रदर्शित किया जा रहा है। पहले दिन 19 मार्च को शाम प्रसिद्ध नृत्यगुरु, सांस्कृतिक विद्वान और राज्यसभा की सदस्य रहीं पद्मविभूषण डॉ सोनल मानसिंह ने ‘नाट्य कथा देवी’ से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
सांस्कृतिक विचारक भरतनाट्यम की अग्रणी कलाकार और पद्म विभूषण डॉ पद्मा सुब्रह्मण्यम ने दूसरे दिन 20 मार्च को भगवद्गीता पर एक विशेष नृत्य नाट्य प्रस्तुति दी, जिसमें वे अपनी अभिव्यक्ति और भाव-भंगिमाओं से इसके दार्शनिक संदेशों को जीवंत किया। तीसरा दिन 21 मार्च भारत की विविध लोक परंपराओं और मार्शल आर्ट्स को समर्पित होगा। कार्यक्रम की शुरुआत शाम 4 बजे असम के बागुरुम्बा नृत्य से होगी, इसके बाद हिमाचल प्रदेश का ‘नाटी’ नृत्य, गुजरात का तलवार रास, केरल की प्राचीन मार्शल आर्ट कलारीपयट्टु, मध्यप्रदेश की कबीर गायन परंपरा प्रस्तुत की जाएगी और समापन आकर्षक सूफी एवं कबीर संगीत प्रस्तुतियों केसाथ होगा। स्थापना दिवस समारोह भारत की सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण, संवर्धन और प्रसार केप्रति आईजीएनसीए की सतत प्रतिबद्धता का प्रतिबिंब है। यह विभिन्न कला रूपों केबीच संवाद केलिए एक मंच भी प्रदान करता है, जो परंपरा और समकालीन अभिव्यक्ति के संगम को सामने लाता है।

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