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कच्छ में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड की आबादी पुनर्जीवित

यह उपलब्धि जंपस्टार्ट अप्रोच एक नवीन संरक्षण उपाय से संभव हुई

वनमंत्री ने लुप्तप्राय ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के संरक्षण की जानकारी दी

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Sunday 29 March 2026 02:01:28 PM

great indian bustard population revived in kutch

कच्छ/ नई दिल्ली। पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने लुप्तप्राय ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (गोडावण) के संरक्षण में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साझा की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर गुजरात के कच्छ में एक दशक बाद हुए गोडावण के एक चूजे के जन्म के बारेमें बताया है। उन्होंने बतायाकि यह उपलब्धि जंपस्टार्ट अप्रोच नामक एक नवीन संरक्षण उपाय से संभव हुई है, यह योजना एकवर्ष पहले बनाई गई थी और इसका समन्वय पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने राजस्थान, गुजरात के राज्य वन विभागों और भारतीय वन्यजीव संस्थान के सहयोग से किया। वनमंत्री ने बतायाकि देशमें गोडावण की यह पहली अंतर्राज्यीय पहल है, जिसे गुजरात में सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया। उन्होंने कहाकि यह बताना महत्वपूर्ण हैकि गुजरात में कच्छ के घास के मैदानों में केवल तीन मादा गोडावण ही बची हैं, जिससे जंगल में उपजाऊ अंडे मिलने की कोई संभावना नहीं है। एक सेए हुए अंडे को कच्छ में वांछित घोंसले के स्थान तक पहुंचाने केलिए 770 किलोमीटर की कठिन सड़क यात्रा करनी पड़ी, जिसे सम राजस्थान से नालिया गुजरात तक बिना रुके एक मार्ग बनाकर पूरा किया गया।
वनमंत्री भूपेंद्र यादव ने बतायाकि प्रोजेक्ट गोडावण की परिकल्पना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2011 में गुजरात सहित इसके प्राकृतिक आवासों में गोडावण के संरक्षण केलिए की थी और इसे औपचारिक रूपसे 2016 में लॉंच किया था। उन्होंने कहाकि यह परियोजना गोडावण प्रजाति के संरक्षण और पुनर्प्राप्ति प्रयासों को मजबूत करने में लगातार प्रगति कर रही है। वनमंत्री ने जानकारी दीकि राजस्थान के सैम और रामदेवरा संरक्षण प्रजनन केंद्रों में पक्षियों की संख्या 73 हो गई है, जिसमें वर्तमान प्रजनन मौसम के दौरान पांच नए चूजे शामिल हुए हैं। उन्होंने कहाकि दीर्घकालिक संरक्षण योजना केतहत भारत निकट भविष्य में पक्षियों को उनके प्राकृतिक आवास में वापस छोड़ने की दिशामें तेजीसे आगे बढ़ रहा है। इस अभूतपूर्व पहल के बारेमें विस्तार से बताते हुए वनमंत्री ने कहाकि अगस्त 2025 में टैग की गई मादा गोडावण ने कच्छ में एक बांझ अंडा दिया, जहां स्थानीय आबादी के सभी नर बहुत पहले ही मर चुके थे। एक बड़े अंतर्राज्यीय संरक्षण प्रयास केतहत राजस्थान के संरक्षण प्रजनन कार्यक्रम से एक बंदी प्रजनित गोडावण अंडे को एक पोर्टेबल इनक्यूबेटर में 19 घंटे से अधिक की सड़क यात्रा करके सफलतापूर्वक 22 मार्च को घोंसले में वापस रख दिया गया।
वनमंत्री ने बतायाकि मादा ने उपजाऊ अंडे को सेने की प्रक्रिया पूरी कर ली और 26 मार्च को चूजे को सफलतापूर्वक जन्म दिया। क्षेत्रीय निगरानी दल ने गोडावण चूजे को उसके प्राकृतिक आवास में उसकी पालक माँ द्वारा पाला पोसा जाते हुए देखा। उन्होंने इसे गंभीर रूपसे लुप्तप्राय प्रजाति के संरक्षण की दिशामें एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। भूपेंद्र यादव ने कहाकि यह प्रयास ग्रेट इंडियन बस्टर्ड की आबादी को पुनर्जीवित करने केलिए उठाए जा रहे कई कदमों में से एक है और वन्यजीव संरक्षण केप्रति भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने इस प्रयास में शामिल सभी वैज्ञानिकों, फील्ड अधिकारियों, वन्यजीव प्रेमियों को बधाई दी और चूजे के जीवित रहने की आशा व्यक्त करते हुए कहाकि सरकार संरक्षण के इस प्रयास को सफल बनाने केलिए हर संभव कार्य केलिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहाकि भारत वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्रमें लगातार प्रगति कर रहा है और आनेवाली पीढ़ियों केलिए ग्रेट इंडियन बस्टर्ड और भी कई लुप्तप्राय प्रजातियों की रक्षा केलिए दृढ़ता से प्रतिबद्ध है।
गौरतलब हैकि गोडावण भारतीय उपमहाद्वीप में पाई जाने वाली एक पक्षी प्रजाति है, यह लगभग एक मीटर ऊंचाई वाला एक बड़ा ज़मीनी पक्षी है। इसकी पहचान इसके हल्के रंग के सिर और गर्दन के विपरीत काली टोपी से आसानी से हो जाती है। बीते काफी वर्ष पहले राजस्थान और गुजरात जैसे भारत के शुष्क घास के मैदानों और झाड़ियों में पाई जानेवाली गोडावण प्रजाति की 2018 तक अनुमानित संख्या मात्र 150 रह गई थी, जबकि 2011 में यह संख्या लगभग 250 थी। भारी शिकार और आवास के विनाश के कारण यह गंभीर रूपसे संकटग्रस्त है। भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम-1972 केतहत इसके संरक्षण पर जोर दिया गया है। राजस्थान ने 2013 में विश्व पर्यावरण दिवस पर प्रोजेक्ट ग्रेट इंडियन बस्टर्ड की शुरुआत की थी, जिसके तहत मौजूदा संरक्षित क्षेत्रोंमें बस्टर्ड के प्रजनन स्थलों की पहचान करके उनकी बाड़बंदी की गई और संरक्षित क्षेत्रों के बाहर सुरक्षित प्रजनन बाड़े उपलब्ध कराए गए थे।

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