'भारत-इज़राइल स्थायी मित्रता व लोकतांत्रिक परंपराओं के लिए समर्पित'
पीएम मोदी का इज़राइल की संसद नेसेट के विशेष पूर्ण अधिवेशन में संबोधनस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Thursday 26 February 2026 01:20:44 PM
यरूशलम। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यरूशलम में इज़राइली संसद नेसेट के विशेष पूर्ण अधिवेशन को संबोधित किया। वे इज़राइल की संसद को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं। नेसेट पहुंचने पर प्रधानमंत्री का स्वागत नेसेट के अध्यक्ष अमीर ओहाना ने किया और उन्हें समारोहपूर्वक अभ्यर्थना प्रदान की गई। इज़राइल के प्रधानमंत्री बेन्जामिन नेतन्याहू, विपक्ष के नेता यायर लापिद और अध्यक्ष अमीर ओहाना ने प्रधानमंत्री के संबोधन से पूर्व पूर्ण अधिवेशन में वक्तव्य दिए और भारत-इज़राइल संबंधों केप्रति सशक्त द्विदलीय समर्थन व्यक्त किया। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत विशेष सम्मान केलिए अध्यक्ष केप्रति आभार व्यक्त करते हुए की। उन्होंने स्पीकर ऑफ द नेसेट पदक से सम्मानित किए जाने पर कृतज्ञता प्रकट की और इसे दोनों देशों की स्थायी मैत्री एवं साझा लोकतांत्रिक परंपराओं को समर्पित किया।
भारत और इज़राइल के दीर्घकालिक मित्रतापूर्ण संबंधों को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने उल्लेख कियाकि दोनों देशों के लोगों केबीच प्राचीन सभ्यतागत संबंधों केसाथ प्रौद्योगिकी, नवाचार, रक्षा, सुरक्षा और सामरिक अभिसरण पर आधारित एक सशक्त समकालीन साझेदारी विद्यमान है। उन्होंने कहाकि कृषि, ग्रामीण विकास, जल प्रबंधन, स्थिरता और उद्यमिता के क्षेत्रमें सहयोग पर जीवंत जन से जन संबंधों ने द्विपक्षीय संबंधों को ऊर्जावान दृष्टिकोण प्रदान किया है। दोनों देशों केबीच ऐतिहासिक संबंधों और लोगों की द्विपक्षीय आवाजाही पर प्रधानमंत्री ने कहाकि इज़राइल में भारतीय समुदाय और भारत में यहूदी प्रवासी समुदाय का दोनों देशों की प्रगति में अनुकरणीय योगदान है। उन्होंने कहाकि महाराष्ट्र के बेने इज़राइल, केरल के कोचिनी यहूदी, कोलकाता और मुंबई के बग़दादी यहूदी और पूर्वोत्तर के बेनी मेनाशे ने भारत को समृद्ध किया है। दोनों देशों की आतंकवाद केप्रति शून्य सहिष्णुता की अडिग नीति का स्मरण करते हुए प्रधानमंत्री ने इज़राइल में 7 अक्तूबर के आतंकवादी हमले पर संवेदना व्यक्त की और कहाकि ऐसी क्रूरता का कोई औचित्य नहीं हो सकता। उन्होंने क्षेत्रमें स्थायी शांति और स्थिरता में योगदान देने वाले सभी प्रयासों केप्रति भारत के समर्थन की पेशकश की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस संदर्भ में संयुक्तराष्ट्र सुरक्षा परिषद की अनुमोदित गज़ा शांति पहल केप्रति भारत के दृढ़ समर्थन को रेखांकित किया। बहुपक्षीय मंचों पर भारत और इज़राइल केबीच जारी सहयोग का उल्लेख करते हुए उन्होंने भारत मध्य पूर्व यूरोप आर्थिक गलियारा और I2U2 रूपरेखाओं के अंतर्गत दोनों देशों केबीच और गहन सहभागिता का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने भारत की विकास गाथा को रेखांकित किया और व्यापार, निवेश, अवसंरचना विकास, हरित विकास, स्टार्टअप, डिजिटल समाधान तथा उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्रोंमें अधिक द्विपक्षीय सहयोग का आह्वान किया, जिससे युवाओं की नवाचार क्षमता और सृजनशीलता को प्रोत्साहित किया जा सके। द्विपक्षीय निवेश संधि के संपन्न होने पर संतोष व्यक्त करते हुए उन्होंने अप्रयुक्त व्यापारिक संभावनाओं को साकार करने केलिए एक महत्वाकांक्षी मुक्त व्यापार समझौते को शीघ्र अंतिम रूप देने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने हाल हीमें भारत में इज़राइल केलिए गठित संसदीय मैत्री समूह का लाभ उठाते हुए दोनों जीवंत लोकतंत्रों केबीच अधिक संसदीय संवाद को बढ़ाने केलिए भी कहा।
भारत और इज़राइली सभ्यताओं केबीच समानताओं पर प्रधानमंत्री ने कहाकि भारत का दर्शन ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ (समस्त विश्व एक परिवार है) और इज़राइल का सिद्धांत ‘तिक्कुन ओलाम’ (विश्व के उपचार का भाव) एक सामंजस्यपूर्ण समाज केप्रति साझा दृष्टिकोण को अभिव्यक्त करते हैं। प्रधानमंत्री ने नेसेट के सदस्यों को भारत इज़राइल संबंधों में उनके योगदान केलिए धन्यवाद दिया और पर्व ‘पुरिम’ केलिए शुभकामनाएं भी दीं। इससे पहले तेल अवीव हवाईअड्डे पर विशेष सम्मान के रूपमें इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी पत्नी सारा नेतन्याहू ने वहां पहुंचकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगवानी की और उनका रस्मी स्वागत किया। इसके बाद दोनों प्रधानमंत्रियों केबीच व्यक्तिगत बैठक हुई। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी होटल पहुंचे तो वहां मौजूद भारतीय प्रवासियों और यहूदी-भारतीय समुदाय के लोगों ने बड़े उत्साह केसाथ उनका अभिनंदन किया। इस मौके पर भारत और इजराइल के कलाकारों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, जो दोनों देशों के गहरे रिश्तों का प्रतीक हैं।