'देश की प्रगति व विकास केलिए दक्ष और कुशल सुरक्षा तंत्र जरूरी'
राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में बोलीं राष्ट्रपतिस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Wednesday 15 April 2026 01:32:59 PM
गांधीनगर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गांधीनगर में राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की। राष्ट्रपति ने सशस्त्र बलों, पुलिस संगठनों और सुरक्षा समुदाय से जुड़े विद्यार्थियों को भी उपाधियां और पदक प्रदान किए। उन्होंने कहाकि देश की प्रगति और विकास केलिए आंतरिक सुरक्षा अनिवार्य है, हम जैसे-जैसे वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ेंगे, वैसे-वैसे देश के आंतरिक सुरक्षा तंत्र के सुचारू संचालन केलिए दक्ष एवं कुशल पेशेवरों की आवश्यकता बढ़ेगी। राष्ट्रपति ने कहाकि यह प्रसन्नता का विषय हैकि राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय इस दिशा में आवश्यक कदम उठा रहा है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहाकि आनेवाले समय में सुरक्षा परिदृश्य औरभी अधिक जटिल हो जाएगा, अभी कुछवर्ष पहले तक हम डिजिटल अरेस्ट, साइबर अपराध और फिशिंग अटैक जैसे शब्दों से अपरिचित थे, किंतु आज ये हमारे समक्ष प्रमुख खतरों के रूपमें खड़े हैं। उन्होंने कहाकि ऐसे परिदृश्य में राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों की महत्ता और उत्तरदायित्व में व्यापक वृद्धि हुई है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहाकि देश को ऐसे पुलिस अधिकारियों की आवश्यकता है, जो साइबर धोखाधड़ी करने वाले अपराधियों को पकड़ने और उन्हें सजा दिलाने में तकनीकी रूपसे सक्षम और निपुण हों, ऐसे फोरेंसिक विशेषज्ञों की जरूरत है, जो अदालती जांच की कसौटी पर खरे उतरने वाले साक्ष्य प्रदान कर सकें और ऐसे सक्षम पेशेवरों की भी आवश्यकता है, जो जियोपॉलिटिक्स की बारीकियों को समझ सकें और वैश्विक मंच पर आत्मविश्वास एवं स्पष्टता केसाथ भारत का दृष्टिकोण प्रस्तुत कर सकें। राष्ट्रपति ने कहाकि रणनीतिक अध्ययन अब केवल युद्ध और शांति के सिद्धांतों तक ही सीमित नहीं रह गया है, अब इसके दायरे में रक्षा निर्माण, उभरती प्रौद्योगिकियां, सप्लाई चेन और आत्मनिर्भर औद्योगिक क्षमताएं भी सम्मिलित हैं। उन्होंने कहाकि रक्षा और सुरक्षा से जुड़े उद्योगों केसाथ समन्वय स्थापित करना इन लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। राष्ट्रपति ने कहाकि सूचना प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्र विश्व की दिशा और दशा निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और सरकार इस दिशा में गंभीर प्रयास कर रही है। उन्होंने कहाकि इंडिया एआई मिशन और एआई इम्पैक्ट समिट 2026 जैसी पहलों से भारत वैश्विक एआई गवर्नेंस में एक महत्वपूर्ण शक्ति के रूपमें उभरा है।
राष्ट्रपति ने कहाकि एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में 'नई दिल्ली घोषणापत्र' को मिले व्यापक अंतर्राष्ट्रीय समर्थन ने न केवल एक तकनीकी उपलब्धि को दर्शाया है, बल्कि यह भारत की नेतृत्व क्षमता का भी प्रमाण है। राष्ट्रपति ने कहाकि साइबर सुरक्षा, आंतरिक सुरक्षा, वित्तीय स्थिरता और डिजिटल विश्वसनीयता का एक अभिन्न अंग है, भारत ने 'इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर' और 'नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल' जैसे सुदृढ़ संस्थागत तंत्र विकसित किए हैं, जो नागरिकों केलिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रहे हैं। राष्ट्रपति ने कहाकि राष्ट्र की शक्ति न केवल सैन्य कर्मियों और सुरक्षा बलों के साहस और पराक्रम पर निर्भर करती है, बल्कि सुरक्षा केलिए अनिवार्य हथियारों और शस्त्रों की गुणवत्ता, उत्पादन, प्रशिक्षण और तकनीकी आत्मनिर्भरता पर भी निर्भर है और सरकार इस दिशामें निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने जिक्र कियाकि स्वदेशी क्षमताओं और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देकर रक्षा क्षेत्रमें आयात पर निर्भरता कम की जा रही है। राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त कियाकि राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय सुरक्षा शिक्षा के क्षेत्रमें एक उत्कृष्ट वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में निरंतर अग्रसर रहेगा और यहां से स्नातक होनेवाले विद्यार्थी एक सुरक्षित, न्यायपूर्ण और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपना योगदान देंगे। उन्होंने कहाकि ऐसे प्रयासों से भारत एक सुरक्षित, सशक्त और विकसित राष्ट्र के रूपमें उभरेगा।