राष्ट्रपति का भारतीय सूचना, सांख्यिकी सेवा प्रशिक्षुओं को प्रेरक संबोधन
'विश्वसनीय सूचना एक जीवंत और संवेदनशील लोकतंत्र का स्तंभ है'स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Wednesday 19 August 2026 05:57:27 PM
नई दिल्ली। भारतीय सूचना सेवा और भारतीय सांख्यिकी सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों का समूह आज राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मिला। राष्ट्रपति ने कहाकि दोनों ही सेवाएं भारतीय सूचना सेवा और भारतीय सांख्यिकी सेवा के कार्य अलग-अलग हैं, किंतु दोनों के लक्ष्य एकसमान हैं, वह हैं-प्रशासन की गुणवत्ता को और ज्यादा बेहतर करना तथा देश के लोगों की सेवा करना। राष्ट्रपति ने कहाकि प्रभावी सम्प्रेषण और विश्वसनीय सूचना एक जीवंत और संवेदनशील लोकतंत्र के अनिवार्य स्तंभ हैं। उन्होंने कहाकि जब प्रशिक्षु अधिकारी अपने सेवाकाल की शुरुआत कर रहे हैं, तब उन्हें निरंतर सीखते रहने और स्वयं को परिस्थिति के अनुरूप ढालने की क्षमता विकसित करनी चाहिए। उन्होंने कहाकि आधुनिक, प्रामाणिक और प्रौद्योगिकी आधारित सांख्यिकीय तंत्र के निर्माण में उनका योगदान भारत को विकसित भारत बनाने की यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनेगा।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहाकि टेक्नोलॉजी की दुनिया, मीडिया, अर्थनीति और लोकनीति में तेजीसे परिवर्तन हो रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को जिज्ञासु बने रहने, नई योग्यताएं अर्जित करने और अनुभव से सीख लेने की सलाह दी। उन्होंने उनसे कहाकि वे अपने निर्णयों में विवेक का इस्तेमाल करें, अपने आचरण में करुणामय रहें और सत्यनिष्ठा के पालन में अटल बने रहें। उन्होंने कहाकि उन्हें सौंपे गए प्रत्येक दायित्व में निष्पक्षता, विनम्रता और समर्पण केसाथ लोगों की सेवा करने का गंभीर उत्तरदायित्व समाहित है। राष्ट्रपति ने कहाकि भारतीय सूचना सेवा ने नागरिकों केसाथ सरकार के जुड़ाव को सशक्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहाकि सोशल मीडिया ने नागरिकों के जानकारी पाने, उसे साझा करने और उसपर प्रतिक्रिया करने के तौर तरीकों में मूलभूत रूपसे परिवर्तन कर दिया है। उन्होंने भारतीय सूचना सेवा के अधिकारियों को सलाह दीकि वे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का उपयोग केवल जानकारी देने और लोगों को जोड़ने केलिए न करके उनकी चिंताओं को सुनने और समझने तथा उनका समाधान करने केलिए भी करें।
राष्ट्रपति ने कहाकि ऐसे परिवेश में जब सूचना द्रुत गति से फैलती है, सूचना प्रदान करने में सटीकता, विश्वसनीयता और जनहित का हमेशा ध्यान रखा जाना चाहिए। राष्ट्रपति ने कहाकि जैसे-जैसे भारत वर्ष 2047 की ओर बढ़ रहा है, भारतीय सूचना सेवा के अधिकारियों की भूमिका औरभी अधिक महत्वपूर्ण होती जाएगी, क्योंकि जानकारी से परिपूर्ण नागरिक ही विकास कार्यों और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में सक्रियतापूर्वक भाग ले सकते हैं। राष्ट्रपति ने कहाकि आजकी डेटा आधारित दुनिया में लोकनीति की गुणवत्ता काफी हदतक सटीक, समय पर और विश्वसनीय डेटा की उपलब्धता पर निर्भर करती है। उन्होंने कहाकि भारतीय सांख्यिकी सेवा उन आधिकारिक आंकड़ों को तैयार करने, उनका विश्लेषण करने और उनकी व्याख्या करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जो हमारे लाखों-करोड़ों देशवासियों की जिंदगियों पर प्रभाव डालने वाले निर्णयों का आधार बनते हैं। उन्होंने कहाकि भारतीय सांख्यिकी सेवा के अधिकारियों के कार्य से अर्थव्यवस्था और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में प्रमाण आधारित नीति निर्माण में मदद मिलेगी। उन्होंने अधिकारियों को यह बात सदैव याद रखने की सलाह दीकि प्रत्येक डेटासेट के पीछे मानव समुदाय और उनका जीवन होता है। उन्होंने उनसे कहाकि नागरिकों, शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं केलिए आंकड़ों की सुलभता बढ़ाई जाए।