आईबीसीए व एडीबी करेंगे प्रकृति अनुकूल वित्तपोषण पहलों में सहयोग
वन मंत्री भूपेंद्र यादव ने किया अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटनस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Wednesday 2 September 2026 06:29:45 PM
नई दिल्ली। पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने 'बाघ बहुल क्षेत्र: आजीविका और आय सृजन के स्तंभ के रूपमें संरक्षण, जैव अर्थव्यवस्था और पारिस्थितिक पर्यटन' विषय पर दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला का आज नई दिल्ली में उद्घाटन किया। यह कार्यशाला अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट एलायंस, एशियाई विकास बैंक व पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने संयुक्त रूपसे आयोजित की है। भूपेंद्र यादव ने प्रोजेक्ट टाइगर केतहत भारत में बाघ संरक्षण पर कहाकि यहां बाघों का अस्तित्व जंगलों, घास के मैदानों, नदियों, शिकार प्रजातियों, वन्यजीव गलियारों और स्थानीय समुदायों के स्वास्थ्य से गहराई से जुड़ा हुआ है।
वन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहाकि बाघ बहुल क्षेत्र बहुमूल्य प्राकृतिक पूंजी का प्रतिनिधित्व करते हैं, ये जल सुरक्षा, कार्बन पृथक्करण, जलवायु विनियमन, जैव विविधता संरक्षण, आजीविका सहायता जैसी महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएं प्रदान करते हैं। भूपेंद्र यादव ने प्रजाति केंद्रित संरक्षण से आगे बढ़कर एकीकृत परिदृश्य प्रबंधन की आवश्यकता पर बल दिया, जो एकसाथ पारिस्थितिक सुरक्षा और सामाजिक एवं आर्थिक विकास को बढ़ावा दे। उन्होंने प्रकृति आधारित समाधानों, नवीन वित्तपोषण तंत्रों और समुदाय आधारित इकोटूरिज्म पर भी बल दिया। भूपेंद्र यादव ने कहाकि पारिस्थितिक संरक्षण की नींव सद्भावपूर्ण संरक्षण और मानव प्रकृति सहअस्तित्व पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने कहाकि भूमि संरक्षण का अर्थ है-गुणवत्तापूर्ण भोजन की सुरक्षा, जो अंततः मानव प्रजाति के अस्तित्व केलिए जरूरी है। भूपेंद्र यादव ने कहाकि विश्व मरुस्थलीकरण, मिट्टी की नमी में कमी और गुणवत्ता में गिरावट जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है, ऐसे में बाघों के प्राकृतिक आवासों का संरक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है, इसके लिए स्थानीय समुदाय के ज्ञान का उपयोग करके सतत सामाजिक व आर्थिक विकास को बढ़ावा दिया जा सकता है, साथही प्रकृति की रक्षा भी की जा सकती है।
भूपेंद्र यादव ने कार्यशाला में प्रतिभागियों से पारंपरिक ज्ञान को संहिताबद्ध करने, संरक्षण, जैव अर्थव्यवस्था व पर्यावरण पर्यटन के क्षेत्रों में नीति निर्माण को शामिल करने की आवश्यकता पर विमर्श का आह्वान किया। कार्यशाला में विचार विमर्श में बाघ परिदृश्यों को प्राकृतिक पूंजी के रूपमें मान्यता देने, पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं के महत्व को उजागर करने और यह पता लगाने पर ध्यान केंद्रित किया गयाकि संरक्षण, जैव अर्थव्यवस्था और इकोटूरिज्म किस प्रकार सतत आजीविका, स्थानीय आय सृजन और दीर्घकालिक पारिस्थितिक सुरक्षा के प्रमुख चालक बन सकते हैं। अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट एलायंस और एशियाई विकास बैंक ने इस दौरान एक एमओयू को औपचारिक रूप दिया। यह एमओयू भूदृश्य संरक्षण, सतत विकास, क्षमता निर्माण, ज्ञान आदान प्रदान और प्रकृति अनुकूल वित्तपोषण पहलों में सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। वन मंत्री ने कहाकि अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट एलायंस की बढ़ती भूमिका बाघ की सात प्रजातियों के संरक्षण केलिए काम कर रहे देशों और संस्थानों केबीच सहयोग का एक वैश्विक मंच है।
एडीबी की कंट्री डायरेक्टर मिया ओका ने आईबीसीए और एडीबी केबीच साझेदारी का स्वागत करते हुए बतायाकि 2026 में एडीबी और भारत की साझेदारी के 40 वर्ष पूरे हो जाएंगे। एडीबी की कंट्री डायरेक्टर ने कहाकि भारत केपास पारिस्थितिक संरक्षण और सतत सामाजिक एवं आर्थिक विकास का व्यापक अनुभव है, जिसे वह बाघ प्रजातियों वाले देशों केसाथ साझा कर सकता है। मिया ओका ने एडीबी द्वारा बाघ प्रजातियों वाले देशों को एकजुट करने, भारत के समृद्ध संरक्षण अनुभव को साझा करने और पारिस्थितिक संरक्षण केलिए सतत वित्तपोषण वाली भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यशाला में बांग्लादेश, भूटान, कंबोडिया, मलेशिया, नेपाल, वियतनाम के प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञ और सरकारी प्रतिनिधि, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, राज्यों के वन विभागों और बाघ अभ्यारण्यों के प्रतिनिधि, विकास भागीदार, शोधकर्ता, संरक्षण विशेषज्ञ और हितधारक एकसाथ आए।