'कहो कालिदास' में प्रेम, विरह, प्रकृति और नारी पात्रों का अन्वेषण
पुस्तक को पढ़ें और उस पर चर्चा भी करें-केंद्रीय संस्कृति मंत्रीस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Wednesday 26 August 2026 01:27:22 PM
नई दिल्ली। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा हैकि शास्त्रीय संस्कृत कवि कालिदास की कृतियों में महिलाएं केवल सौंदर्य विषय मात्र नहीं हैं, बल्कि उन्हें चेतना, गरिमा और प्रेम के मूर्तरूप में चित्रित किया गया है। वे साहित्य, संस्कृति और सार्वजनिक जीवन के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में युगल जोशी की मंजुल पब्लिशिंग हाउस से प्रकाशित पुस्तक ‘कहो कालिदास!’ के विमोचन पर परिचर्चा कार्यक्रम में बोल रहे थे। पुस्तक में शामिल महाकवि कालिदास के जीवन और कृतियों के विभिन्न आयाम-प्रेम, विरह, दायित्व, प्रकृति और विशेष रूपसे उनके नारी पात्रों का अन्वेषण किया गया है, जिसमें कवि की स्वयं की रचनाओं में निहित भावनाओं और सूक्ष्म संकेतों को आधार बनाया गया है।
गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहाकि कल्पना मानव जीवन का एक शाश्वत पक्ष है, जो मनुष्य को वास्तव में मनुष्य बनाती है। उन्होंने इस अवसर को केवल पुस्तक विमोचन से कहीं अधिक बताया। उन्होंने इसे उस ऐतिहासिक मौन को आवाज़ देने का अवसर कहा, जो लंबे समय से कालिदास के अपेक्षाकृत कम ज्ञात व्यक्तिगत और रचनात्मक जीवन को घेरे हुए है। संस्कृति मंत्री ने कहाकि चूंकि कालिदास के जीवन से संबंधित प्रामाणिक जीवनीपरक विवरण सीमित हैं, इसलिए इस प्रकार के साहित्यिक अन्वेषणों से उनकी कृतियों के जरिए उनके जीवन और संवेदनाओं को समझने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने कहाकि साहित्य, कला और संस्कृति के सृजनकर्ता अपनी रचनात्मकता के माध्यम से समाज को प्रेरित करते हैं और भावी पीढ़ियों केलिए सांस्कृतिक विरासत के निर्माण में योगदान देते हैं।
संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहाकि ‘कहो कालिदास!’ शीर्षक एक आत्मीय पुकार के रूपमें कार्य करता है, जो वर्तमान समय से कालिदास केसाथ संवाद स्थापित करता है। उन्होंने कहाकि जहां इतिहास यह पूछता हैकि क्या हुआ, कब और कहां हुआ, वहीं साहित्य यह समझने का प्रयास करता हैकि मानव मन में क्या घटित हुआ और वह इस प्रकार संवेदनशीलता, कल्पना एवं आख्यान से इतिहास के अनन्वेषित आयामों का पता लगाने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने इस रचनात्मक प्रयास केलिए लेखक युगल जोशी को बधाई दी और आशा व्यक्त कीकि पुस्तक को व्यापक रूपसे पढ़ा जाएगा और उसपर चर्चा की जाएगी, जिससे पाठक कालिदास को एक नए दृष्टिकोण से समझ सकेंगे।
युगल जोशी ने पुस्तक की विषयवस्तु में प्रसिद्ध लेखक गोएथे की कालिदास पर की गई टिप्पणी का उल्लेख करते हुए कहाकि यदि स्वर्ग और मानवलोक को एकसाथ देखा जा सकता है तो यह केवल कालिदास के ‘अभिज्ञान शाकुंतलम्’ में ही संभव है। उन्होंने कहाकि मिथिला के लोग कालिदास को अपना मानते हैं, इसी प्रकार उज्जैन और उत्तराखंड के लोग भी उन्हें अपना मानते हैं। देश के विभिन्न हिस्सों के लोग भी उन्हें अपना बताते हैं, जबकि महाकवि कालिदास पूरे राष्ट्र के हैं। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के कला निधि प्रभाग के आईजीएनसीए के समवेत सभागार नई दिल्ली में आयोजित इस कार्यक्रम में साहित्य, कला, संस्कृति और शिक्षा जगत से बड़ी संख्या में लोग उपस्थित हुए।